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खेतों में कटीले तार लगाने के बावजूद लावारिश पशुओं से नहीं बच रहीं फसल
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खेतों में बाड़ लगाता किसान
- फोटो : LAKHIMPUR
मैगलगंज। लावारिश पशु किसानों के जी का जंजाल बने हुए हैं। इन पशुओं से अपने खेतों की फसल बचाने के लिए किसान खेतों के चारों तरफ कंटीले तार लगाकर पेड़ों की डालें लगा रहे हैं, जिससे किसी तरह छुट्टा पशु खेतों में न आने पाएं और उनकी फसलें सुरक्षित रहें। पसगवां ब्लॉक के चपरतला, हैरमखेड़ा, रहजनियां समेत लगभग सभी गांवों में आवारा पशुओं के झुंड किसानों की फसलें नष्ट कर रहे हैं।
परेशान किसानों को कड़ाके की ठंड में रात-रात भर अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद किसानों की फसलें नहीं बच पा रही हैं। अब परेशान किसानों ने खेतों में चारों तरफ कटीले तारों के साथ-साथ पेड़ों की घनी डालें लगाना शुरू कर दिया है जिससे जानवर खेतों में न घुस पाएं। छोटे किसान कर्जा लेकर खेतों बाढ़ लगवा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सिस्टम इन आवारा पशुओं की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है जबकि क्षेत्र में दो बड़ी गोशालाओं का निर्माण किया गया है।
इनमें इन पशुओं को भेजा जा सकता है। यह लावारिश पशु नेशनल हाईवे पर विचरण करते देखे जा सकते हैं। हाईवे पर आए दिन सड़क हादसों में यह पशु या तो घायल होते हैं या उनकी मौत हो जाती है। हाईवे पर बड़ी संख्या में घायल पशुओं को देखा जा सकता है। लहूलुहान पशुओं को देखकर ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी को फोन से जानकारी दी तो उन्होंने बताया कि कई जानवरों का इलाज भी कराया गया, लेकिन केवल इलाज ही स्थायी समाधान नहीं है।
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परेशान किसानों को कड़ाके की ठंड में रात-रात भर अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद किसानों की फसलें नहीं बच पा रही हैं। अब परेशान किसानों ने खेतों में चारों तरफ कटीले तारों के साथ-साथ पेड़ों की घनी डालें लगाना शुरू कर दिया है जिससे जानवर खेतों में न घुस पाएं। छोटे किसान कर्जा लेकर खेतों बाढ़ लगवा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सिस्टम इन आवारा पशुओं की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है जबकि क्षेत्र में दो बड़ी गोशालाओं का निर्माण किया गया है।
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इनमें इन पशुओं को भेजा जा सकता है। यह लावारिश पशु नेशनल हाईवे पर विचरण करते देखे जा सकते हैं। हाईवे पर आए दिन सड़क हादसों में यह पशु या तो घायल होते हैं या उनकी मौत हो जाती है। हाईवे पर बड़ी संख्या में घायल पशुओं को देखा जा सकता है। लहूलुहान पशुओं को देखकर ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी को फोन से जानकारी दी तो उन्होंने बताया कि कई जानवरों का इलाज भी कराया गया, लेकिन केवल इलाज ही स्थायी समाधान नहीं है।
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