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Lakhimpur Kheri News: गन्ना यार्ड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश किसान
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सर्द रात में ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती बिछाकर लेटा किसान अशोक कुमार। संवाद
- फोटो : संवाद
गोला गोकर्णनाथ। कृषि प्रधान देश में अन्नदाता के संघर्ष की कहानी पुरानी है। सर्द रात में बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के गन्ना यार्ड में भयंकर सर्दी में किसान अलाव के सहारे रात बिता रहे हैं।
सर्द रात में किसान ट्रैक्टर की सीट पर खुद को कंबल में लपेटे बैठे मिले। वहीं, ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती के बिछौने पर लेटा किसान अपनी बारी का इंतजार करता मिला। गन्ना लाइन में कई किसान कूड़ा करकट बटोरकर आग तापते मिले। किसानों ने बताया कि उन्हें पूरी रात इसी तरह खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ती है। चीनी मिल न तो अलाव जलवाता है न ही ठहरने का कोई प्रबंध है। हर नई सरकार से किसानों को उम्मीद रहती है लेकिन उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं।
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किसानों की दशा सुधारने की कोई उम्मीद नहीं
पंद्रह किलोमीटर दूर लक्ष्मण नगर से दिन में 2:30 बजे चले थे। रात करीब 11 बजे नंबर आएगा। हर नई सरकार से उम्मीद रहती है, लेकिन किसानों की दशा सुधरेगी ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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अमरनाथ नाथ, किसान
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चीनी मिल तक एक ट्रॉली लाने में खर्च हो जाते हैं 7000
अभी पिछला भुगतान ही नहीं हुआ है। नए भुगतान की बात ही अलग है। एक ट्राली गन्ना बेचने पर 7000 तक का खर्चा आता है। किसान चारों ओर से समस्याओं से घिरा है। फसल को छुट्टा घूम रहे जानवरों से खतरा, किसानों को बाघ से जान का खतरा।
राकेश कुमार, किसान
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मुश्किल भरा है सर्दी की रात काटना
पूरी गन्ना लाइन में कहीं भी अलाव जलता हुआ नहीं दिख रहा। सर्दी की रात काटना मुश्किल हो जाता है। उधारी और कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
अमृतपाल सिंह, किसान
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दावा : गन्ना यार्ड में जलाए जा रहे आठ अलाव
एक जगह को छोड़कर कहीं भी अलाव सुलगता नहीं मिला। वहीं चीनी मिल के वरिष्ठ गन्ना महाप्रबंधक पीएस चतुर्वेदी का दावा है कि यार्ड में आठ अलाव जलाए जा रहे है। किसानों के लिए शेड भी है।
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सर्द रात में किसान ट्रैक्टर की सीट पर खुद को कंबल में लपेटे बैठे मिले। वहीं, ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती के बिछौने पर लेटा किसान अपनी बारी का इंतजार करता मिला। गन्ना लाइन में कई किसान कूड़ा करकट बटोरकर आग तापते मिले। किसानों ने बताया कि उन्हें पूरी रात इसी तरह खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ती है। चीनी मिल न तो अलाव जलवाता है न ही ठहरने का कोई प्रबंध है। हर नई सरकार से किसानों को उम्मीद रहती है लेकिन उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं।
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किसानों की दशा सुधारने की कोई उम्मीद नहीं
पंद्रह किलोमीटर दूर लक्ष्मण नगर से दिन में 2:30 बजे चले थे। रात करीब 11 बजे नंबर आएगा। हर नई सरकार से उम्मीद रहती है, लेकिन किसानों की दशा सुधरेगी ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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अमरनाथ नाथ, किसान
चीनी मिल तक एक ट्रॉली लाने में खर्च हो जाते हैं 7000
अभी पिछला भुगतान ही नहीं हुआ है। नए भुगतान की बात ही अलग है। एक ट्राली गन्ना बेचने पर 7000 तक का खर्चा आता है। किसान चारों ओर से समस्याओं से घिरा है। फसल को छुट्टा घूम रहे जानवरों से खतरा, किसानों को बाघ से जान का खतरा।
राकेश कुमार, किसान
मुश्किल भरा है सर्दी की रात काटना
पूरी गन्ना लाइन में कहीं भी अलाव जलता हुआ नहीं दिख रहा। सर्दी की रात काटना मुश्किल हो जाता है। उधारी और कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
अमृतपाल सिंह, किसान
दावा : गन्ना यार्ड में जलाए जा रहे आठ अलाव
एक जगह को छोड़कर कहीं भी अलाव सुलगता नहीं मिला। वहीं चीनी मिल के वरिष्ठ गन्ना महाप्रबंधक पीएस चतुर्वेदी का दावा है कि यार्ड में आठ अलाव जलाए जा रहे है। किसानों के लिए शेड भी है।

सर्द रात में ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती बिछाकर लेटा किसान अशोक कुमार। संवाद- फोटो : संवाद

सर्द रात में ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती बिछाकर लेटा किसान अशोक कुमार। संवाद- फोटो : संवाद

सर्द रात में ट्रैक्टर के नीचे जमीन पर गन्ने की पत्ती बिछाकर लेटा किसान अशोक कुमार। संवाद- फोटो : संवाद