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तिकुनिया हिंसा के गवाह पर हमले से किसानों में गुस्सा
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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड के गवाह दिलजोत सिंह पर हमले से किसानों का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है। किसान इस हमले को गवाहों को डरा धमका कर मुकदमा प्रभावित करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। घटना के बाद किसान नेताओं ने शनिवार को तिकुनिया गुरुद्वारे में बैठक बुलाई है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हमले का शिकार हुए दिलजोत सिंह ने बताया कि घटना के समय हमलावर जिस तरह उग्र होकर धमकियां दे रहे थे, उससे उनके इरादे साफ नजर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद एफआईआर की प्रति सुप्रीम कोर्ट में किसानों की पैरवी कर रहे किसानों के वकील को भेज दी थी।
जिसे संभवत: शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया गया होगा। उन्होंने बताया कि आशीष मिश्र को जमानत मिलने और फिर भाजपा की जीत के बाद उनके हौसले और बुलंद हो गए हैं और वह गवाहों को डराने धमकाने पर उतर आए हैं। दिलजोत सिंह का कहना है कि अब हम डरेंगे नहीं बल्कि डट कर मुकाबला करेंगे। किसान एकजुट हैं, उन्हें दबाया नहीं जा सकता।
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हमले की होनी चाहिए मजिस्ट्रेटी जांच - उधर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव अमन दीप सिंह संधू का कहना है कि तिकुनिया कांड के मुख्य गवाह पर जानलेवा हमला किया गया। उसका सिर फोड़ दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा मुख्य गवाहों के अंगरक्षक होने के बावजूद भी किसान पर हुआ हमला निंदनीय है। इससे किसानों में भारी रोष है।
भारतीय किसान यूनियन इसके विरोध में जल्दी ही जिला मुख्यालय का घेराव करेगी। भारतीय किसान शक्ति संगठन के अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने कहा कि तिकुनिया कांड के गवाह किसान पर हमला अति निंदनीय है। इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच हो और हमलावर दोषियों को सजा मिले।
सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान - संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से पैरवी कर चुके वकील हरजीत सिंह एडवोकेट ने बताया कि ऐसी घटनाओं से किसानों में डर का माहौल है। किसानों के ऊपर भाजपा सरकार द्वारा डर का माहौल पैदा किया जा रहा है, जिससे कि वह मुकदमे में गवाही न दे सके। चूंकि, सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
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हमले का शिकार हुए दिलजोत सिंह ने बताया कि घटना के समय हमलावर जिस तरह उग्र होकर धमकियां दे रहे थे, उससे उनके इरादे साफ नजर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद एफआईआर की प्रति सुप्रीम कोर्ट में किसानों की पैरवी कर रहे किसानों के वकील को भेज दी थी।
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जिसे संभवत: शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया गया होगा। उन्होंने बताया कि आशीष मिश्र को जमानत मिलने और फिर भाजपा की जीत के बाद उनके हौसले और बुलंद हो गए हैं और वह गवाहों को डराने धमकाने पर उतर आए हैं। दिलजोत सिंह का कहना है कि अब हम डरेंगे नहीं बल्कि डट कर मुकाबला करेंगे। किसान एकजुट हैं, उन्हें दबाया नहीं जा सकता।
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हमले की होनी चाहिए मजिस्ट्रेटी जांच - उधर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव अमन दीप सिंह संधू का कहना है कि तिकुनिया कांड के मुख्य गवाह पर जानलेवा हमला किया गया। उसका सिर फोड़ दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा मुख्य गवाहों के अंगरक्षक होने के बावजूद भी किसान पर हुआ हमला निंदनीय है। इससे किसानों में भारी रोष है।
भारतीय किसान यूनियन इसके विरोध में जल्दी ही जिला मुख्यालय का घेराव करेगी। भारतीय किसान शक्ति संगठन के अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने कहा कि तिकुनिया कांड के गवाह किसान पर हमला अति निंदनीय है। इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच हो और हमलावर दोषियों को सजा मिले।
सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान - संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से पैरवी कर चुके वकील हरजीत सिंह एडवोकेट ने बताया कि ऐसी घटनाओं से किसानों में डर का माहौल है। किसानों के ऊपर भाजपा सरकार द्वारा डर का माहौल पैदा किया जा रहा है, जिससे कि वह मुकदमे में गवाही न दे सके। चूंकि, सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।