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करोड़ों फूंकने के बाद भी 13 अंक ही सुधरी रैंकिंग
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कचहरी रोड पर कूड़ेदान में जलता कूड़ा।
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नगर पालिका में मौजूद संसाधन और सफाई कर्मियों की संख्या को देखते हुए सुधार नाकाफी
स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की रिपोर्ट में लखीमपुर की आई 154वीं रैंक, पिछले साल थी 167
जोन रैंक में पिछले साल दो नंबर पर रही नगर पालिका मोहम्मदी इस बार 45वें स्थान पर
लखीमपुर खीरी। शहर की सफाई व्यवस्था पर पालिका प्रशासन ने साल भर में भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हों, मगर धरातल पर हुआ काम सबके सामने है। इस बात की पुष्टि स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की रिपोर्ट में भी हो रही है। नगर पालिका लखीमपुर 154वें स्थान पर है, जबकि पिछले साल 167वें स्थान पर था। रैंकिंग में केवल 13 अंकों का मामूली सुधार हुआ है, जो पालिका में मौजूद संसाधन और सफाई कर्मियों की संख्या को देखते हुए यह नाकाफी है।
नगर पालिका में 30 वार्ड हैं, जिन्हें साफ सुथरा रखने के लिए नगर पालिका में दो सफाई निरीक्षक सहित करीब छह सौ सफाई कर्मियों की लंबी चौड़ी फौज है। वहीं मोहल्लों का कूड़ा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए छोटे-बड़े करीब 70 वाहन भी हैं। कर्मचारियों के वेतन से लेकर वाहनों के डीजल आदि पर हर साल नगर पालिका 14 से 15 करोड़ रुपये खर्च करती है। हर माह भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बावजूद शहर के हालात किसी से छिपे नहीं है। इसी का परिणाम है कि 6000 अंकों की प्रतियोगिता में लखीमपुर नगर पालिका को मात्र 47 प्रतिशत अंक मिले हैं। उधर, जोन रैंक में पिछले साल दो नंबर पर रही नगर पालिका मोहम्मदी इस बार 45वें नंबर है।
लखीमपुर नगर पालिका मंडल में दूसरे नंबर पर
शनिवार को जारी स्वच्छता रैंक में लखनऊ मंडल में नगर पालिका लखीमपुर दूसरे नंबर पर रही है और लखनऊ नंबर एक पर है। लखीमपुर की रैंक एक से दस लाख की आबादी वाले शहरों में हैं, जबकि लखनऊ नगर निगम होने के साथ दस लाख की आबादी से ऊपर का शहर है।
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दोपहर तक कूड़े से पटे रहते हैं डलावघर
नगर पालिका के पास न तो संसाधनों की कमी है और न ही सफाई कर्मियों की, मगर पालिका प्रशासन की उपेक्षा और उदासीनता के कारण शहर के डलावघर दोपहर तक कूड़े से पटे रहते हैं। करीब 600 सफाई कर्मचारी होने के बावजूद शहर के हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पालिका प्रशासन नगर की सफाई को लेकर कितना फिक्रमंद है।
नंबरों ने दी धरातल पर काम करने की नसीहत
सर्वेक्षण के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदु नागरिक प्रतिक्रिया, सेवा आधार और प्रमाणीकरण पर नंबर दिए गए हैं। इसमें नागरिक प्रतिक्रिया के 1800, सेवा आधार के 2400 और प्रमाणीकरण के 1800 यानी कुल 6000 अंकों की प्रतियोगिता थी। इसमें लखीमपुर नगर पालिका को 50 प्रतिशत से भी कम मात्र 2840 अंक मिले हैं। भले ही पिछले साल से इस बार की रैंकिंग में मामूली सुधार हुआ हो, मगर नंबरों ने पालिका प्रशासन को धरातल पर काम करने का आइना दिखाया है।
बिंदु- निर्धारित अंक- कुल मिले अंक
नागरिक प्रतिक्रिया- 1800- 1064
सेवा आधार- 2400- 1476
प्रमाणीकरण- 1800-300
......
नगर पालिका लखीमपुर
वार्ड- 30
जनसंख्या- 151993
---------
नेशनल रैंक- 2021-2020-2019
लखीमपुर- 154-167-320
(एक से दस लाख की आबादी पर)
.......
जोन रैंक 2021--2020-2019
गोला-15-57-607
(50 से एक लाख की आबादी पर)
........
जोन रैंक- 2021-2020-2019
पलिया- 12-350-128
खीरी- 25- 657 - 499 -
मोहम्मदी-45- 23- 2
(25 से 50 हजार की आबादी पर )
........
नगर पंचायत - 2021- 2020- 2019
धौरहरा -18 -118 - 130
मैलानी- 37 - 487 - 278
बरवर- 43 - 294 -371
सिंगाही- 46 -247 - 312
ओयल ढ़खवा-92 -124- 480
(25 हजार की आबादी पर )
काम किया पर लापरवाही भी बरती
1. मुख्य सड़कों पर सफाई तो दिखी, लेकिन डलावघर दोपहर तक कूडे़ से पटे रहे।
2. तलीझाड़ सफाई के दावों के बीच नाले नालियां चोक ही रहीं।
3. गड्ढायुक्त सड़कों पर चलने को मजबूर रहे शहरवासी, दुरुस्त सड़कें बनवाती रही नगर पालिका
4. ग्रीन शहर बनाने के लिए गुरुगोविंद सिंह तिराहा के डिवाइडर पर पौधे लगवाए, जिनकी कागजों पर देखरेख होती रही।
5. कागजों पर होता रहा शहर का सौंदर्यीकरण।
..........
इन पर होता काम तो और बेहतर होती रैंक
1. समय रहते डलावघर से कूड़े का उठान
2. अतिक्रमण हटाकर सड़कों का चौडी़करण
3. नाले नालियों की विधिवत साफ सफाई
4. शौचालयों की नियमित साफ सफाई
5. फुटपाथ कब्जा मुक्त करना
6. पार्किंग स्थल निर्माण
मेला मैदान निवासी राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि स्वच्छता को लेकर सभी को जागरूक होने की जरूरत है। नगर पालिका या तो शहर के डलावघर खत्म करे या फिर सुबह जल्दी इनसे कूड़ा उठवाए, क्योंकि दोपहर तक इनमें कूड़ा पड़ा रहने से शहर गंदा सा लगता है।
फत्तेपुर निवासी पवन वर्मा का कहना है कि रैंकिंग सुधरी जरूरी है, लेकिन इसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। अगले साल टॉप-100 में शामिल होने का संकल्प लेकर पालिका प्रशासन शहर की सफाई व्यवस्था पर ध्यान दें और लोगों को भी इसके लिए जागरूक करे।
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स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की रिपोर्ट में लखीमपुर की आई 154वीं रैंक, पिछले साल थी 167
जोन रैंक में पिछले साल दो नंबर पर रही नगर पालिका मोहम्मदी इस बार 45वें स्थान पर
लखीमपुर खीरी। शहर की सफाई व्यवस्था पर पालिका प्रशासन ने साल भर में भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हों, मगर धरातल पर हुआ काम सबके सामने है। इस बात की पुष्टि स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की रिपोर्ट में भी हो रही है। नगर पालिका लखीमपुर 154वें स्थान पर है, जबकि पिछले साल 167वें स्थान पर था। रैंकिंग में केवल 13 अंकों का मामूली सुधार हुआ है, जो पालिका में मौजूद संसाधन और सफाई कर्मियों की संख्या को देखते हुए यह नाकाफी है।
नगर पालिका में 30 वार्ड हैं, जिन्हें साफ सुथरा रखने के लिए नगर पालिका में दो सफाई निरीक्षक सहित करीब छह सौ सफाई कर्मियों की लंबी चौड़ी फौज है। वहीं मोहल्लों का कूड़ा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए छोटे-बड़े करीब 70 वाहन भी हैं। कर्मचारियों के वेतन से लेकर वाहनों के डीजल आदि पर हर साल नगर पालिका 14 से 15 करोड़ रुपये खर्च करती है। हर माह भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बावजूद शहर के हालात किसी से छिपे नहीं है। इसी का परिणाम है कि 6000 अंकों की प्रतियोगिता में लखीमपुर नगर पालिका को मात्र 47 प्रतिशत अंक मिले हैं। उधर, जोन रैंक में पिछले साल दो नंबर पर रही नगर पालिका मोहम्मदी इस बार 45वें नंबर है।
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लखीमपुर नगर पालिका मंडल में दूसरे नंबर पर
शनिवार को जारी स्वच्छता रैंक में लखनऊ मंडल में नगर पालिका लखीमपुर दूसरे नंबर पर रही है और लखनऊ नंबर एक पर है। लखीमपुर की रैंक एक से दस लाख की आबादी वाले शहरों में हैं, जबकि लखनऊ नगर निगम होने के साथ दस लाख की आबादी से ऊपर का शहर है।
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दोपहर तक कूड़े से पटे रहते हैं डलावघर
नगर पालिका के पास न तो संसाधनों की कमी है और न ही सफाई कर्मियों की, मगर पालिका प्रशासन की उपेक्षा और उदासीनता के कारण शहर के डलावघर दोपहर तक कूड़े से पटे रहते हैं। करीब 600 सफाई कर्मचारी होने के बावजूद शहर के हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पालिका प्रशासन नगर की सफाई को लेकर कितना फिक्रमंद है।
नंबरों ने दी धरातल पर काम करने की नसीहत
सर्वेक्षण के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदु नागरिक प्रतिक्रिया, सेवा आधार और प्रमाणीकरण पर नंबर दिए गए हैं। इसमें नागरिक प्रतिक्रिया के 1800, सेवा आधार के 2400 और प्रमाणीकरण के 1800 यानी कुल 6000 अंकों की प्रतियोगिता थी। इसमें लखीमपुर नगर पालिका को 50 प्रतिशत से भी कम मात्र 2840 अंक मिले हैं। भले ही पिछले साल से इस बार की रैंकिंग में मामूली सुधार हुआ हो, मगर नंबरों ने पालिका प्रशासन को धरातल पर काम करने का आइना दिखाया है।
बिंदु- निर्धारित अंक- कुल मिले अंक
नागरिक प्रतिक्रिया- 1800- 1064
सेवा आधार- 2400- 1476
प्रमाणीकरण- 1800-300
......
नगर पालिका लखीमपुर
वार्ड- 30
जनसंख्या- 151993
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नेशनल रैंक- 2021-2020-2019
लखीमपुर- 154-167-320
(एक से दस लाख की आबादी पर)
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जोन रैंक 2021--2020-2019
गोला-15-57-607
(50 से एक लाख की आबादी पर)
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जोन रैंक- 2021-2020-2019
पलिया- 12-350-128
खीरी- 25- 657 - 499 -
मोहम्मदी-45- 23- 2
(25 से 50 हजार की आबादी पर )
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नगर पंचायत - 2021- 2020- 2019
धौरहरा -18 -118 - 130
मैलानी- 37 - 487 - 278
बरवर- 43 - 294 -371
सिंगाही- 46 -247 - 312
ओयल ढ़खवा-92 -124- 480
(25 हजार की आबादी पर )
काम किया पर लापरवाही भी बरती
1. मुख्य सड़कों पर सफाई तो दिखी, लेकिन डलावघर दोपहर तक कूडे़ से पटे रहे।
2. तलीझाड़ सफाई के दावों के बीच नाले नालियां चोक ही रहीं।
3. गड्ढायुक्त सड़कों पर चलने को मजबूर रहे शहरवासी, दुरुस्त सड़कें बनवाती रही नगर पालिका
4. ग्रीन शहर बनाने के लिए गुरुगोविंद सिंह तिराहा के डिवाइडर पर पौधे लगवाए, जिनकी कागजों पर देखरेख होती रही।
5. कागजों पर होता रहा शहर का सौंदर्यीकरण।
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इन पर होता काम तो और बेहतर होती रैंक
1. समय रहते डलावघर से कूड़े का उठान
2. अतिक्रमण हटाकर सड़कों का चौडी़करण
3. नाले नालियों की विधिवत साफ सफाई
4. शौचालयों की नियमित साफ सफाई
5. फुटपाथ कब्जा मुक्त करना
6. पार्किंग स्थल निर्माण
मेला मैदान निवासी राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि स्वच्छता को लेकर सभी को जागरूक होने की जरूरत है। नगर पालिका या तो शहर के डलावघर खत्म करे या फिर सुबह जल्दी इनसे कूड़ा उठवाए, क्योंकि दोपहर तक इनमें कूड़ा पड़ा रहने से शहर गंदा सा लगता है।
फत्तेपुर निवासी पवन वर्मा का कहना है कि रैंकिंग सुधरी जरूरी है, लेकिन इसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। अगले साल टॉप-100 में शामिल होने का संकल्प लेकर पालिका प्रशासन शहर की सफाई व्यवस्था पर ध्यान दें और लोगों को भी इसके लिए जागरूक करे।