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जिला अस्पताल के मरीजों पर भारी पड़ी संडे की छुट्टी
अमर उजाला ब्यूरो/ लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 16 Apr 2017 10:05 PM IST
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जिला अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल के मरीजों पर भारी पड़ी संडे की छुट्टी
डॉक्टर से परामर्श को भी तरस गए तीमारदार, वार्ड ब्वाय के सहारे रहे मरीज
रविवार मरीजों के लिए मुसीबतों का दिन है। इस दिन डॉक्टर छुट्टी के मूड में होते हैं, जिससे मरीजों को परामर्श तक के लिए पूरा दिन डॉक्टरों के इंतजार में गुजर जाता है। डॉक्टरों के सुबह राउंड करने के बाद मरीज स्टाफ नर्स के सहारे हो जाते हैं।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड से लेकर मेडिकल महिला व पुरुष सहित न्यू सर्जिकल वार्ड में काफी संख्या में मरीज भर्ती है। रविवार का दिन इन भर्ती मरीजों के लिए काफी कष्ट भरा रहा। भर्ती मरीजों के घरवालों का कहना है कि कार्य दिवस में डॉक्टर दो बजे तक अस्पताल में रहते हैं, ऐसे में दिक्कत होने पर उन्हें तुरंत बुलाकर दिखा लेते हैं, लेकिन रविवार का दिन कष्ट भरा होता है। डॉक्टर राउंड तो दो बार करते हैं, लेकिन उसमें करीब 12 घंटे का अंतर हो जाता है। ऐसे में यदि मरीज को दिक्क्त हो तो स्टाफ नर्स से कहना पड़ता है, वह भी दवा खिलाओ आराम मिल जाएगी। यदि जोर दो तो कहते हैं कि फोन कर दिया है डॉक्टर आते ही होंगे, जिसमें कई कई घंटे गुजर जाते हैं।
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16 घंटे बाद देखा मरीज
पलिया निवासी जीनत ने बताया कि देवर जुल्फिकार का एक्सीडेंट शनिवार को हुआ था, जिसे इमरजेंसी में दिखाकर करीब पांच बजे वार्ड में भर्ती किया गया था, लेकिन उसके बाद किसी भी डॉक्टर ने उसे नहीं देखा। रविवार की सुबह करीब आठ बजे राउंड पर आए डॉक्टर ने उसका हाल जाना।
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12 घंटे करना पड़ता है इंतजार
रामापुर निवासी सुधीर का आपरेशन हुआ है, जिसके साथ रुके राम जी ने बताया कि करीब बारह घंटे बाद डॉक्टर देखने आते हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार की सुबह आठ बजेे के रात में करीब नौ दस के बीच में डॉक्टर ने आकर देखा था, जिसके बाद रविवार की सुबह आठ बजे फिर डॉक्टर देखने आए।
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दिक्कत पर स्टाफ नर्स को दिखाते हैं
पिछले करीब दस दिनों से अपने पिता का इलाज करा रही जामिंत्री ने बताया कि डॉक्टर सुबह आठ बजे के बाद दुबारा रात में नौ बजे के करीब आते हैं। इस दौरान मरीज को दिक्क्त होने पर उसे स्टाफ नर्स को ही दिखाना पड़ता है।
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स्टाफ भी करता है मनमानी
वार्ड में भर्ती वीरेंद्र पाल के साथ रुके पूरन का कहना है कि जब डॉक्टर आते हैं तो स्टाफ भी सक्रिय हो जाता है, लेकिन उनके जाने के बाद मनमानी शुरू कर देते हैं। बोतल बदलनी हो या फिर दवा आदि के बारे में पूछना हो तो कई कई बार बुलाना पड़ता है।
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वर्जन
वार्डों में डॉक्टरों के राउंड करने का रोस्टर बना है। डॉक्टर सुबह शाम वार्डों में जाकर मरीज देखते हैं। इस बीच यदि किसी मरीज को दिक्कत होती है, तो स्टाफ के फोन पर डॉक्टर फिर देखते हैं।
डॉ.आरके वर्मा, प्रभारी सीएमएस।
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डॉक्टर से परामर्श को भी तरस गए तीमारदार, वार्ड ब्वाय के सहारे रहे मरीज
रविवार मरीजों के लिए मुसीबतों का दिन है। इस दिन डॉक्टर छुट्टी के मूड में होते हैं, जिससे मरीजों को परामर्श तक के लिए पूरा दिन डॉक्टरों के इंतजार में गुजर जाता है। डॉक्टरों के सुबह राउंड करने के बाद मरीज स्टाफ नर्स के सहारे हो जाते हैं।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड से लेकर मेडिकल महिला व पुरुष सहित न्यू सर्जिकल वार्ड में काफी संख्या में मरीज भर्ती है। रविवार का दिन इन भर्ती मरीजों के लिए काफी कष्ट भरा रहा। भर्ती मरीजों के घरवालों का कहना है कि कार्य दिवस में डॉक्टर दो बजे तक अस्पताल में रहते हैं, ऐसे में दिक्कत होने पर उन्हें तुरंत बुलाकर दिखा लेते हैं, लेकिन रविवार का दिन कष्ट भरा होता है। डॉक्टर राउंड तो दो बार करते हैं, लेकिन उसमें करीब 12 घंटे का अंतर हो जाता है। ऐसे में यदि मरीज को दिक्क्त हो तो स्टाफ नर्स से कहना पड़ता है, वह भी दवा खिलाओ आराम मिल जाएगी। यदि जोर दो तो कहते हैं कि फोन कर दिया है डॉक्टर आते ही होंगे, जिसमें कई कई घंटे गुजर जाते हैं।
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16 घंटे बाद देखा मरीज
पलिया निवासी जीनत ने बताया कि देवर जुल्फिकार का एक्सीडेंट शनिवार को हुआ था, जिसे इमरजेंसी में दिखाकर करीब पांच बजे वार्ड में भर्ती किया गया था, लेकिन उसके बाद किसी भी डॉक्टर ने उसे नहीं देखा। रविवार की सुबह करीब आठ बजे राउंड पर आए डॉक्टर ने उसका हाल जाना।
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12 घंटे करना पड़ता है इंतजार
रामापुर निवासी सुधीर का आपरेशन हुआ है, जिसके साथ रुके राम जी ने बताया कि करीब बारह घंटे बाद डॉक्टर देखने आते हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार की सुबह आठ बजेे के रात में करीब नौ दस के बीच में डॉक्टर ने आकर देखा था, जिसके बाद रविवार की सुबह आठ बजे फिर डॉक्टर देखने आए।
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दिक्कत पर स्टाफ नर्स को दिखाते हैं
पिछले करीब दस दिनों से अपने पिता का इलाज करा रही जामिंत्री ने बताया कि डॉक्टर सुबह आठ बजे के बाद दुबारा रात में नौ बजे के करीब आते हैं। इस दौरान मरीज को दिक्क्त होने पर उसे स्टाफ नर्स को ही दिखाना पड़ता है।
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स्टाफ भी करता है मनमानी
वार्ड में भर्ती वीरेंद्र पाल के साथ रुके पूरन का कहना है कि जब डॉक्टर आते हैं तो स्टाफ भी सक्रिय हो जाता है, लेकिन उनके जाने के बाद मनमानी शुरू कर देते हैं। बोतल बदलनी हो या फिर दवा आदि के बारे में पूछना हो तो कई कई बार बुलाना पड़ता है।
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वर्जन
वार्डों में डॉक्टरों के राउंड करने का रोस्टर बना है। डॉक्टर सुबह शाम वार्डों में जाकर मरीज देखते हैं। इस बीच यदि किसी मरीज को दिक्कत होती है, तो स्टाफ के फोन पर डॉक्टर फिर देखते हैं।
डॉ.आरके वर्मा, प्रभारी सीएमएस।