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फसल की बर्बादी के साथ बिखरे सपने
बांकेगंज
Updated Thu, 09 Apr 2015 07:24 PM IST
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किसान छोटेलाल के खेतों में गेहूं की फसल लहलहा रही थी। अच्छी फसल देखकर उसने अपने मन में तमाम सपने संजोए थे, सोचा था कि अपनी पोती के हाथ पीले करने के साथ साहूकार से लिया कर्ज भी चुका देगा। चैत मास में सावन जैसी बारिश और तेज हवाओं के कारण पूरी फसल खेतों में बिछ गई। तेज हवाओं के साथ उसके सपने भी बिखर गए। अब उसे फसल काटने तक में दिक्कत आ रही है। मौसम की मार से उसकी उपज घटकर महज 40 फीसदी रह गई है।
ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 के मजरा कोठीपुर, बांकेपुर, अजुर्नपुर, गुलाबनगर, पसियापुर, दुलारेपुर, रमतलिया, झाऊपुर, बेचापुर सहित तीन दर्जन से भी अधिक गांवों के किसानों का कुछ यही हाल है। बेमौसम बारिश से हुए नुकसान से किसान अपना माथा पीट रहे हैं। उनका कहना है कि सर्वे के बाद अगर मुआवजा मिला भी तो वह ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होगा। मौसम की मार से जो तबाही हुई है उसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है।
इलाकाई लोगाें का कहना है कि किसानों की फसल के नुकसान का सर्वे करने के लिए यहां राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं आया। ऐसी स्थिति में वे मुआवजे की आस भी खो बैठे है। किसान कहते हैं कि फसल कुछ इस तरह बर्बाद हुई है कि उनके सामने दो जून की रोटी का भी संकट है।
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अब कैसे होंगे पोती के हाथ पीले
अगले माह तीन मई को पोती की शादी है। मैंने 11 बीघा में बोई गेहूं की फसल से बड़ी उम्मीदें लगा रखीं थी, लेकिन बर्बाद हुई फसल से हमारे सारे सपने बिखर गए। सुना था कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है, लेकिन यहां तो कोई झांकने भी नहीं आया।
-छोटेलाल, कोठीपुर
परिवार पालना भी मुश्किल
बेमौसम बारिश से आठ बीघे गेहूं की फसल तबाह होने के बाद परिवार पालने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और शादी की चिंता सताने लगी हैं। इस बार तो मौसम ने कमर ही तोड़ दी। फसल नुकसान के सर्वे की बात बेमानी साबित हो रही है।
-मंगूलाल, बांकेपुर
पेट भरने का संकट
पिछले डेढ़ महीने में बारिश और आंधी से फसलों की जैसी बर्बादी हुई हाल के बरसों में कभी नहीं हुई। इससे सपने टूट कर बिखर गए। मेरी नौ बीघा जमीन पर बोई गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। सबका पेट भरने वाले अन्नदाता के सामने खुद का पेट भरने का संकट है।
-पोथीराम, प्रतापपुर
आंधी पानी ने सबकुछ कर दिया चौपट
मैंने दस बीघा गेहूं की अपनी लहलहाती फसल से बड़ी उम्मीदें लगा रखीं थीं। आंधी, पानी ने सबकुछ चौपट कर दिया। तहसील से कोई भी राजस्व कर्मी खेतों में बर्बाद हुई फसल देखने तक नहीं आया। ऐसे में सरकार से मुआवजा मिलने की आस लगाना भी बेकार है।
-छैलबिहारी, प्रतापपुर
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ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 के मजरा कोठीपुर, बांकेपुर, अजुर्नपुर, गुलाबनगर, पसियापुर, दुलारेपुर, रमतलिया, झाऊपुर, बेचापुर सहित तीन दर्जन से भी अधिक गांवों के किसानों का कुछ यही हाल है। बेमौसम बारिश से हुए नुकसान से किसान अपना माथा पीट रहे हैं। उनका कहना है कि सर्वे के बाद अगर मुआवजा मिला भी तो वह ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होगा। मौसम की मार से जो तबाही हुई है उसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है।
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इलाकाई लोगाें का कहना है कि किसानों की फसल के नुकसान का सर्वे करने के लिए यहां राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं आया। ऐसी स्थिति में वे मुआवजे की आस भी खो बैठे है। किसान कहते हैं कि फसल कुछ इस तरह बर्बाद हुई है कि उनके सामने दो जून की रोटी का भी संकट है।
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अब कैसे होंगे पोती के हाथ पीले
अगले माह तीन मई को पोती की शादी है। मैंने 11 बीघा में बोई गेहूं की फसल से बड़ी उम्मीदें लगा रखीं थी, लेकिन बर्बाद हुई फसल से हमारे सारे सपने बिखर गए। सुना था कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है, लेकिन यहां तो कोई झांकने भी नहीं आया।
-छोटेलाल, कोठीपुर
परिवार पालना भी मुश्किल
बेमौसम बारिश से आठ बीघे गेहूं की फसल तबाह होने के बाद परिवार पालने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और शादी की चिंता सताने लगी हैं। इस बार तो मौसम ने कमर ही तोड़ दी। फसल नुकसान के सर्वे की बात बेमानी साबित हो रही है।
-मंगूलाल, बांकेपुर
पेट भरने का संकट
पिछले डेढ़ महीने में बारिश और आंधी से फसलों की जैसी बर्बादी हुई हाल के बरसों में कभी नहीं हुई। इससे सपने टूट कर बिखर गए। मेरी नौ बीघा जमीन पर बोई गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। सबका पेट भरने वाले अन्नदाता के सामने खुद का पेट भरने का संकट है।
-पोथीराम, प्रतापपुर
आंधी पानी ने सबकुछ कर दिया चौपट
मैंने दस बीघा गेहूं की अपनी लहलहाती फसल से बड़ी उम्मीदें लगा रखीं थीं। आंधी, पानी ने सबकुछ चौपट कर दिया। तहसील से कोई भी राजस्व कर्मी खेतों में बर्बाद हुई फसल देखने तक नहीं आया। ऐसे में सरकार से मुआवजा मिलने की आस लगाना भी बेकार है।
-छैलबिहारी, प्रतापपुर