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पांच महिलाओं की प्रसव के चंद घंटे बाद छुट्टी
बिजुआ (लखीमपुर खीरी)
Updated Thu, 11 Dec 2014 11:30 PM IST
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एसीएमओ डॉ. वीबीराम ने सीएचसी का निरीक्षण किया। वार्ड में जच्चा और बच्चा
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भर्ती नहीं मिले, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। साथ ही आशा वर्करों को
मिलने वाली प्रोत्साहन राशि रोकने के निर्देश प्रभारी डॉक्टर को दिए।
एसीएमओ ने वार्ड में बेड पर गद्दे न पड़े होने पर स्टोर रूम को खुलवाकर देखा। पता चला कि यहां कई साल पुराने गद्दे हैं, जो कि खराब हो चुके थे। अब अस्पताल के आधे बेड पर गद्दे नही हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि जिले पर डिमांड भेजी गई है, सामान नहीं मिल सका है। वहीं रात को पांच महिलाओं के प्रसव होने के बाद वे अस्पताल में नही थीं। जिस पर उन्हें बताया गया कि मरीज रात को रुकना नहीं चाहते। इस पर उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में जन्म के तुरंत बाद जच्चा-बच्चा को छुट्टी देना लापरवाही है, ऐसे में दो दिन मरीज भर्ती रहना चाहिए, क्योंकि मरीज के बीमार होने की संभावना रहती है। एसीएमओ ने छुट्टी लेकर चली जाने वाली गर्भवती महिलाओं के मामले में आशावर्करों को दोषी माना। उनकी प्रोत्साहन राशि रोके जाने के निर्देश दिए, वहीं खाली गद्दों पर चादरें डालने को कहा।
एसीएमओ ने वार्ड में बेड पर गद्दे न पड़े होने पर स्टोर रूम को खुलवाकर देखा। पता चला कि यहां कई साल पुराने गद्दे हैं, जो कि खराब हो चुके थे। अब अस्पताल के आधे बेड पर गद्दे नही हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि जिले पर डिमांड भेजी गई है, सामान नहीं मिल सका है। वहीं रात को पांच महिलाओं के प्रसव होने के बाद वे अस्पताल में नही थीं। जिस पर उन्हें बताया गया कि मरीज रात को रुकना नहीं चाहते। इस पर उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में जन्म के तुरंत बाद जच्चा-बच्चा को छुट्टी देना लापरवाही है, ऐसे में दो दिन मरीज भर्ती रहना चाहिए, क्योंकि मरीज के बीमार होने की संभावना रहती है। एसीएमओ ने छुट्टी लेकर चली जाने वाली गर्भवती महिलाओं के मामले में आशावर्करों को दोषी माना। उनकी प्रोत्साहन राशि रोके जाने के निर्देश दिए, वहीं खाली गद्दों पर चादरें डालने को कहा।