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जिला अस्पताल : मरीज बढ़े तो गैलरी में बेड डालकर भर्ती किए बच्चे
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जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड भर जाने के बाद गैलरी में भर्ती किए गए बच्चे
लखीमपुर खीरी/ओयल। बुखार के मरीजों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। सामान्य से लेकर इमरजेंसी ओपीडी में बुखार की आंच से तप रहे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। इससे वार्डों में बेड कम पड़ने लगे हैं। शनिवार को चिल्ड्रन वार्ड फुल हो जाने के कारण गैलरी में बेड डालकर बच्चों को भर्ती किया गया।
सामान्य से लेकर इमरजेंसी ओपीडी में शनिवार को करीब 1500 मरीज पहुंचे। गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने से इमरजेंसी की व्यवस्थाएं लड़खड़ाने लगी हैं। इमरजेंसी ओपीडी के हालात यह हैं कि बेड कम पड़ने लगे हैं।
बुखार की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। 21 बेड के चिल्ड्रन वार्ड शुक्रवार को चार बेड अतिरिक्त डाले गए थे, जो अब भर चुके हैं। शनिवार को अचानक बच्चों की संख्या में इजाफा होने पर सीएमएस ने दो बच्चों को गैलरी में बेड डलवाकर भर्ती कराया। सात वर्षीय नितिन पुत्र सुनील निवासी मितौली की हालत में सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया। जबकि दस बेड के आईसीयू वार्ड में पांच बच्चों का इलाज चल रहा है।
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खुद न करें इलाज, डॉक्टर से मिलें
डॉक्टर बताते हैं कि इन दिनों वायरल बुखार का प्रकोप है। मरीज पहले तो स्वयं दवाएं लेकर सेवन करते हैं और फिर झोलाछाप को दिखाते हैं। स्थित जब ज्यादा बिगड़ जाती है, तब अस्पताल आते हैं। इसलिए उन्हें भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। यदि मरीज समय पर अस्पताल आ जाएं तो बीमारी से छुटकारा जल्द मिल जाए।
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सामान्य से लेकर इमरजेंसी ओपीडी में शनिवार को करीब 1500 मरीज पहुंचे। गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने से इमरजेंसी की व्यवस्थाएं लड़खड़ाने लगी हैं। इमरजेंसी ओपीडी के हालात यह हैं कि बेड कम पड़ने लगे हैं।
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बुखार की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। 21 बेड के चिल्ड्रन वार्ड शुक्रवार को चार बेड अतिरिक्त डाले गए थे, जो अब भर चुके हैं। शनिवार को अचानक बच्चों की संख्या में इजाफा होने पर सीएमएस ने दो बच्चों को गैलरी में बेड डलवाकर भर्ती कराया। सात वर्षीय नितिन पुत्र सुनील निवासी मितौली की हालत में सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया। जबकि दस बेड के आईसीयू वार्ड में पांच बच्चों का इलाज चल रहा है।
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खुद न करें इलाज, डॉक्टर से मिलें
डॉक्टर बताते हैं कि इन दिनों वायरल बुखार का प्रकोप है। मरीज पहले तो स्वयं दवाएं लेकर सेवन करते हैं और फिर झोलाछाप को दिखाते हैं। स्थित जब ज्यादा बिगड़ जाती है, तब अस्पताल आते हैं। इसलिए उन्हें भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। यदि मरीज समय पर अस्पताल आ जाएं तो बीमारी से छुटकारा जल्द मिल जाए।