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दिल्ली से बजट मिला लखनऊ में अटक गया

Thu, 29 Jan 2015 12:40 AM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Thu, 29 Jan 2015 12:40 AM IST
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Delhi received the budget Stuck in Lucknow
इंदिरा आवास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 में 20,532 लाभार्थियों के आवास बनाए जाने हैं, जिनमें अधिकतर ने पहली किस्त का उपभोग कर लिया हैै। अब लाभार्र्थियों को दूसरी किस्त जारी की जानी है, जिससे गरीबों के आवास पर छत पड़ सके। लाभार्थी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो अधिकारी उन्हें बजट का टोटा बताकर बैरंग कर रहे हैं। हालांकि भारत सरकार ने धनराशि दिसंबर 2014 में ही रिलीज कर दी थी, लेकिन लखनऊ के अफसर कुंडली मारे बैठे हैं।
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बता दें कि इंदिरा आवास के लिए लाभार्थियों को दो किस्तों में 35-35 हजार की धनराशि दी जाती है। जनपद के 20532 लाभार्र्थियों को प्रथम किस्त दी गई थी, जिसके बाद दूसरी किस्त दिसंबर 2014 में जारी की जानी थी। पहली किस्त के लिए जनपद को 55,24,39,100 रुपये मिले थे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि दूसरी किस्त जारी होने में एक महीने की देरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक जनपद को बजट प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में समय पर आवास पूर्ण कराना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। बताते चलें कि पहले भी देरी की वजह से कई आवास पूर्ण नहीं कराए जा सके थे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि भारत सरकार ने दिसंबर में ही प्रदेश सरकार को धनराशि आवंटित कर दी थी, लेकिन जिले को अभी धनराशि नहीं मिली है। लिहाजा दूसरी किस्त जारी नहीं हो पा रही है। कब तक जिले को धनराशि मिलेगी? इसका जवाब अधिकारियोें के पास भी नहीं है।
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परियोजना अधिकारी, डीआरडीए डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि इंदिरा आवास की दूसरी किस्त के लिए शासन से डिमांड की जा चुकी है। बजट प्राप्त होते ही लाभार्र्थियों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जाएगी।
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लोहिया गांवों के लाभार्थियों को मिली दूसरी किस्त
जनपद की 995 में से 39 ग्राम पंचायतोें को डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना में शामिल किया गया है। लिहाजा शासन के निर्देश पर इन लोहिया गांवों के 457 लाभार्थियों को दूसरी किस्त जारी करने का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं।

ब्याज भी हो सकती है वजह
सरकारी योजनाओं में बड़ी धनराशि का हस्तांतरण बैंकों के जरिए होता है, जिसमें अच्छा खासा ब्याज भी मिल जाता है। इंदिरा आवास की पहली किस्त के लिए मिली धनराशि पर बैंक से ब्याज के तौर पर 49 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं, जो इस मद में अवशेष बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैैं कि कई बार ब्याज हासिल करनेे के लिए भी लाभार्र्थियों के खातों में धनराशि भेजने में हीला-हवाली की जाती है।

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