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शिव का प्रिय धाम, छोटी काशी
कामता सिंह कुशवाहा / श्यामकिशोर अवस्थी गोला गोकर्णनाथ।
Updated Wed, 22 Feb 2017 11:36 PM IST
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gola
- फोटो : amar ujala
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महाशिवरात्रि पर विशेष
उज्जैन की भांति मंदिरों का शहर कहा जाने वाला यह शहर पृथ्वी के गर्भ में विलीन हो चुकी सरस्वती नदी के तट पर बसा है। प्राचीन काल में भगवान शंकर ने प्रिय लगने के कारण यहां मृग रूप में विहार किया था। भगवान विष्णु ने मृग रूपधारी शिव का श्रंग यहां स्थापित किया, इस कारण यह नगर छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध है।
वाराह पुराण में वर्णन है कि यहां के वन में भ्रमण करते हुए प्रिय लगने के कारण भगवान शिव यहां रम गए। ब्रह्मा, विष्णु, देवराज इंद्र उन्हें ढूंढते यहां आए तो मृग रूपधारी भगवान शिव के सींग पकड़ लिए। उसमें से एक सींग भगवान विष्णु ने यहां स्थापित किया जो गोकर्णनाथ नाम से जाना जाता है। शिव पुराण में यहां के शिव को रावण द्वारा स्थापित और उनका नाम चंद्रभाल बताया गया है। शिवजी का वर्णन स्कंद पुराण, वामन पुराण तथा महाभारत में भी मिलता है।
पद्म पुराण में कोटद्वार नगर (अब कोटवारा ग्राम) के सदानंद ब्राह्मण द्वारा पाप मुक्ति के लिए गोकर्ण, कोर्णाक, पोनाग्र, भद्र और मांड तीर्थ स्थापित करने एवं पंच तीर्थों में स्नान कर शिवजी के दर्शन पूजन एवं रात्रि जागरण करने से मनोवांछित फल मिलने का वर्णन मिलता है। इस पुराण में गोकर्ण क्षेत्र के तीनों लोकों और सात द्वीपों में श्रेष्ठ कहा गया है।
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कई पुराणों में है छोटी काशी का महात्म्य
शिव महापुराण में छोटी काशी में स्थापित शिव का नाम चंद्रभाल कहा गया है। स्कंदपुराण, भविष्य पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में इसका वर्णन है। पद्म महापुराण में गोकर्ण क्षेत्र में गोकर्ण, कोर्णाक, पोनाग्र, मांड एवं भद्र कुंड स्थापित करने एवं पंचतीर्थों में स्नान कर शिवजी के दर्शन, पूजन, मुंडन एवं रात्रि जागरण करने से मनोवांछित फल प्राप्त होने का वर्णन मिलता है।
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दर्शनीय हैं यहां के देवालय
बूढे़बाबा का मंदिर, गोकर्ण तीर्थ से पूरब एक फर्लांग दूर तंत्रशास्त्र पर आधारित त्रिलोकीनाथ मठ मंदिर, यहां कंकड़ों की बनी समाधियां प्राचीनता की कहानी कहती हैं। इसी मार्ग पर आगे बढ़कर भूतनाथ आश्रम तथा लक्ष्मण टीला है। खुटार मार्ग पर मां मंगला देवी का मंदिर है। इसी रोड पर गोला से पांच किमी दूर क्लेशहरण शिव मंदिर अहमदनगर में स्थित है।
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व्रत कर पूजन करने से मिलता है अभीष्ट फल
गोला गोकर्णनाथ। आचार्य रामदेव शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत 24 फरवरी को रात्रि 8.32 से शुरू होगा, जो 25 फरवरी की सुबह 5.28 बजे तक रात्रिकालीन पूजन होगा। इसके बाद व्रत का पारायण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि व्रत पर पूजन करने से अभीष्ट फल प्राप्त होता है। महा शिवरात्रि में तीन प्रहर सायंकालीन, अर्धरात्रि और प्रात: पूजन करने से मानव के ज्ञात और अज्ञात पाप नष्ट होकर उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और संतान की भी प्राप्ति होती है।
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महाशिवरात्रि पर होगा दीप यज्ञ
गोला गोकर्णनाथ। 24 फरवरी महाशिवरात्रि पर भव्य दीप यज्ञ का आयोजन गोकर्णतीर्थ पर किया जाएगा। आयोजक दीपक सक्सेना ने बताया कि गोकर्ण तीर्थ पर शाम पांच बजे 16 हजार दीपों से दीप यज्ञ कराया जाएगा।
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उज्जैन की भांति मंदिरों का शहर कहा जाने वाला यह शहर पृथ्वी के गर्भ में विलीन हो चुकी सरस्वती नदी के तट पर बसा है। प्राचीन काल में भगवान शंकर ने प्रिय लगने के कारण यहां मृग रूप में विहार किया था। भगवान विष्णु ने मृग रूपधारी शिव का श्रंग यहां स्थापित किया, इस कारण यह नगर छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध है।
वाराह पुराण में वर्णन है कि यहां के वन में भ्रमण करते हुए प्रिय लगने के कारण भगवान शिव यहां रम गए। ब्रह्मा, विष्णु, देवराज इंद्र उन्हें ढूंढते यहां आए तो मृग रूपधारी भगवान शिव के सींग पकड़ लिए। उसमें से एक सींग भगवान विष्णु ने यहां स्थापित किया जो गोकर्णनाथ नाम से जाना जाता है। शिव पुराण में यहां के शिव को रावण द्वारा स्थापित और उनका नाम चंद्रभाल बताया गया है। शिवजी का वर्णन स्कंद पुराण, वामन पुराण तथा महाभारत में भी मिलता है।
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पद्म पुराण में कोटद्वार नगर (अब कोटवारा ग्राम) के सदानंद ब्राह्मण द्वारा पाप मुक्ति के लिए गोकर्ण, कोर्णाक, पोनाग्र, भद्र और मांड तीर्थ स्थापित करने एवं पंच तीर्थों में स्नान कर शिवजी के दर्शन पूजन एवं रात्रि जागरण करने से मनोवांछित फल मिलने का वर्णन मिलता है। इस पुराण में गोकर्ण क्षेत्र के तीनों लोकों और सात द्वीपों में श्रेष्ठ कहा गया है।
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कई पुराणों में है छोटी काशी का महात्म्य
शिव महापुराण में छोटी काशी में स्थापित शिव का नाम चंद्रभाल कहा गया है। स्कंदपुराण, भविष्य पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में इसका वर्णन है। पद्म महापुराण में गोकर्ण क्षेत्र में गोकर्ण, कोर्णाक, पोनाग्र, मांड एवं भद्र कुंड स्थापित करने एवं पंचतीर्थों में स्नान कर शिवजी के दर्शन, पूजन, मुंडन एवं रात्रि जागरण करने से मनोवांछित फल प्राप्त होने का वर्णन मिलता है।
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दर्शनीय हैं यहां के देवालय
बूढे़बाबा का मंदिर, गोकर्ण तीर्थ से पूरब एक फर्लांग दूर तंत्रशास्त्र पर आधारित त्रिलोकीनाथ मठ मंदिर, यहां कंकड़ों की बनी समाधियां प्राचीनता की कहानी कहती हैं। इसी मार्ग पर आगे बढ़कर भूतनाथ आश्रम तथा लक्ष्मण टीला है। खुटार मार्ग पर मां मंगला देवी का मंदिर है। इसी रोड पर गोला से पांच किमी दूर क्लेशहरण शिव मंदिर अहमदनगर में स्थित है।
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व्रत कर पूजन करने से मिलता है अभीष्ट फल
गोला गोकर्णनाथ। आचार्य रामदेव शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत 24 फरवरी को रात्रि 8.32 से शुरू होगा, जो 25 फरवरी की सुबह 5.28 बजे तक रात्रिकालीन पूजन होगा। इसके बाद व्रत का पारायण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि व्रत पर पूजन करने से अभीष्ट फल प्राप्त होता है। महा शिवरात्रि में तीन प्रहर सायंकालीन, अर्धरात्रि और प्रात: पूजन करने से मानव के ज्ञात और अज्ञात पाप नष्ट होकर उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और संतान की भी प्राप्ति होती है।
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महाशिवरात्रि पर होगा दीप यज्ञ
गोला गोकर्णनाथ। 24 फरवरी महाशिवरात्रि पर भव्य दीप यज्ञ का आयोजन गोकर्णतीर्थ पर किया जाएगा। आयोजक दीपक सक्सेना ने बताया कि गोकर्ण तीर्थ पर शाम पांच बजे 16 हजार दीपों से दीप यज्ञ कराया जाएगा।