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इतिहास लिखे जाते रण में तोपों से तलवारों से...
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मोहमदी। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर मोहम्मदी महाविद्यालय में कवि सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चला। कार्यक्रम का प्रबंधन मोहम्मदी लॉ कॉलेज की टीम ने किया। संचालन अमित तिवारी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मोहम्मदी नगरपालिका अध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओज के वरिष्ठ कवि सतीश शुक्ला ने की।
अरविंद सोनी ने किसानों का दर्द सुनाते हुए पढ़ा-
तुमने गन्ने की कीमत बढ़ाई नहीं, किस तरह दोगुनी आय हो जाएगी।
प्रशांत वाजपेई ने पढ़ा- राजनीति के तलवे चाटें ऐसा अपना शौक नहीं,
कलम उठेगी जब भी मेरी घायल हिंदुस्तान लिखेंगे।
राजमोहन पाठक ने कुछ इस तरह कविता पढ़ी- इतिहास नहीं बनते कुमकुम पायल की झंकारों से, इतिहास लिखे जाते रण में तोपों से तलवारों से।
नीतीश भारद्वाज ने पढ़ा- मुझे हिन्दू- मुस्लिम में न फंसाओ तुम, मैं इंसान हूं मुझको इंसान रहने दो। राघव शुक्ला- मेरे खाने से पहले एक दफा मां चख ले, तेरा जूठा जो खाऊं तो प्रसाद बनता है,
सुमित भारद्वाज- वतन के उन शहीदों को शत-शत नमन कर लें, कटा देते हैं सर अपना जो हिंदुस्तान के खातिर।
शांतनु त्रिवेदी- मोहन फेसबुक मीरा व्हाट्सएप राधा इंस्टा चलाती है, ये बूढ़ी दादी अकेले बैठ किसे कहानी सुना रही है।
वहीं आशीष त्रिपाठी ने संचालन करते हुए सुनाया- अंधेरा खत्म होता जाता है, दिया जब मेरी मां जलाती है। शिवओम प्यासा, हरिहर पांडेय, विनय आनंद ने भी काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। सभी कवियों को चेयरमैन संदीप मेहरोत्रा ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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अरविंद सोनी ने किसानों का दर्द सुनाते हुए पढ़ा-
तुमने गन्ने की कीमत बढ़ाई नहीं, किस तरह दोगुनी आय हो जाएगी।
प्रशांत वाजपेई ने पढ़ा- राजनीति के तलवे चाटें ऐसा अपना शौक नहीं,
कलम उठेगी जब भी मेरी घायल हिंदुस्तान लिखेंगे।
राजमोहन पाठक ने कुछ इस तरह कविता पढ़ी- इतिहास नहीं बनते कुमकुम पायल की झंकारों से, इतिहास लिखे जाते रण में तोपों से तलवारों से।
नीतीश भारद्वाज ने पढ़ा- मुझे हिन्दू- मुस्लिम में न फंसाओ तुम, मैं इंसान हूं मुझको इंसान रहने दो। राघव शुक्ला- मेरे खाने से पहले एक दफा मां चख ले, तेरा जूठा जो खाऊं तो प्रसाद बनता है,
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सुमित भारद्वाज- वतन के उन शहीदों को शत-शत नमन कर लें, कटा देते हैं सर अपना जो हिंदुस्तान के खातिर।
शांतनु त्रिवेदी- मोहन फेसबुक मीरा व्हाट्सएप राधा इंस्टा चलाती है, ये बूढ़ी दादी अकेले बैठ किसे कहानी सुना रही है।
वहीं आशीष त्रिपाठी ने संचालन करते हुए सुनाया- अंधेरा खत्म होता जाता है, दिया जब मेरी मां जलाती है। शिवओम प्यासा, हरिहर पांडेय, विनय आनंद ने भी काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। सभी कवियों को चेयरमैन संदीप मेहरोत्रा ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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