Lakhimpur Kheri: आबादी के पास तालाबों में मगरमच्छों का डेरा, अगस्त में दो ग्रामीणों को बनाया निवाला
लखीमपुर खीरी में जंगल से सटे इलाकों में बाघ ही नहीं मगरमच्छ भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। मगरमच्छ आबादी के करीब तालाबों में पहुंच रहे हैं। अगस्त महीने में ही मगरमच्छ के हमलों में दो लोगों की जान जा चुकी है।
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लखीमपुर खीरी में बारिश के मौसम में जंगल में पानी भर जाने से बाघ, तेंदुए और हाथी खेतों में घूमते नजर आ रहे हैं तो वहीं मगरमच्छ आबादी के निकट तालाबों और झीलों में आ पहुंचे हैं। ये मगरमच्छ इंसानों और पशुओं पर हमले कर रहे हैं। कई बार तो यह मगरमच्छ गांवों के अंदर तक घुस आए। पिछले दिनों बिजुआ क्षेत्र के एक गांव में मगरमच्छ रात भर चारपाई के नीचे बैठा रहा।
बारिश के मौसम में अधिकांश नदियां उफान पर हैं। नदियों के शांत पानी में रहने वाले मगरमच्छ बहाव तेज होने के कारण नदियों से निकलकर तालाबों में आ गए हैं। तालाबों में मछली पकड़ने के लिए जाने वाले ग्रामीण और तालाब के आसपास चरने जाने वाले पशु इन मगरमच्छों का शिकार हो रहे हैं। जिले में बरसात का मौसम शुरू होने के बाद से अब तक करीब छह लोग मगरमच्छ के हमलों का शिकार हो चुके हैं।
सबसे ज्यादा निघासन प्रभावित
मगरमच्छ के हमले में सबसे ज्यादा मौतें निघासन तहसील क्षेत्र में हुई हैं। यहां पिछले पांच साल में छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई पशु भी मगरमच्छ का निवाला बने हैं।
1. वर्ष 2017-मसुरहा निवासी जगदीश को मगरमच्छ ने निवाला बनाया।
2. वर्ष 2018- सिन्हौना गांव निवासी जगमोहन को जौरहा नदी में मगरमच्छ ने बनाया निवाला।
3. वर्ष 2021- बैलहा निवासी रामतीरथ को मगरमच्छ ने नाले में मार डाला।
4. वर्ष 2021-मसुरहा निवासी संदीप को मगरमच्छ ने सरयू नदी में निवाला बनाया।
5. अगस्त 2023-मसुरहा निवासी 60 वर्षीय लालजी को सरयू नदी में मगरमच्छ ने निवाला बनाया।
6. अगस्त 2023-नौरंगाबाद फार्म निवासी 45 वर्षीय राम विलास की मगरमच्छ हमले में मौत
आबादी के बीच गांवों में भी पहुंच रहे मगरमच्छ
मगरमच्छ तालाबों में ही गांव तक में घुस रहे हैं। अगस्त माह के पहले सप्ताह में बिजुआ ब्लॉक के एक गांव में मगरमच्छ गांव के अंदर घुस आया। एक घर में घुसकर मगरमच्छ रातभर चारपाई के नीचे बैठा रहा। सुबह जागने पर उसे मगरमच्छ चारपाई के नीचे होने का पता चला। सोमवार को भीराघासी गांव के मजरा मोहालीपुरवा में मगरमच्छ घुस आया। मगरमच्छ देख ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। बाद में मगरमच्छ को रेस्क्यू किया गया।