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नदियों के जरिए पड़ोसी जिलों को भेजी जा रही लकड़ी
अमर उजाला ब्यूरो खमरिया।
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:08 AM IST
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क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार की सख्ती धौरहरा में दिख रही बेअसर
जिले के धौरहरा क्षेत्र में अवैध रूप से हरे भरे पेड़ों का कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। लकड़ी माफिया चोरी-चोरी जलमार्ग से हजारों टन लकड़ी पड़ोसी जिलों को भेज रहे हैं। ईसानगर थाने का डेबर घाट लकड़ी तस्करी का मुख्य अड्डा बन चुका है। क्षेत्र में नदियों के सहारे बेशकीमती लकड़ी की तस्करी की सूचनाएं ऊपर तक हैं लेकिन स्थानीय वनाधिकारी मौन हैं।
अवैध कटान और नदियों के सहारे दूसरे जिलों को लकड़ी भेज जाने की सूचना पर मुख्य वन संरक्षक दो बार यहां जांच के लिए आ चुके हैं। इसके बाद भी धौरहरा वन रेंज के वनकर्मियों की कार्य शैली में कोई खास बदलाव नहीं आया है। क्षेत्र में पेड़ों का कटान और लकड़ी की तस्करी बदस्तूर जारी है। ईसानगर थाना क्षेत्र में चौका नदी का डेबर घाट मौजूदा समय में वनकर्मियों के लिए किसी सोने के अंडे देने वाली मुर्गी से कम साबित नहीं हो रहा है।
प्रदेश सरकार के सख्त रवैये और वरिष्ठ वनाधिकारियों के छापे पड़ने से धौरहरा वनरेंज में लकड़ी माफिया और वनकर्मियों की नींद उड़ गई है लेकिन इस वन रेंज में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। लकड़ी माफिया और वनकर्मियों की जुगलबंदी से इस क्षेत्र की हरियाली उजड़ रही है।
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प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद लकड़ी माफिया लकड़ी लाने और ले जाने के लिए सड़क मार्ग की अपेक्षा नदी मार्ग को तरजीह दे रहे हैं। डेबर घाट से नदी पार करके लकड़ी सीधे सीतापुर जिले के तंबौर ले जाई जा रही है।
नदियों के जरिए लकड़ी की तस्करी किए जाने का मामला जानकारी में आने के बाद से लगातार छापेमारी की जा रही है। छापेमारी में लकड़ी माफिया पकड़े गए और लकड़ी भी बरामद की गई है। अवैध कटान और परिवहन रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
यूपी सिंह, एसडीओ निघासन।
लकड़ी कटान और तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया गया है। क्षेत्र की दो प्लाईवुड फैक्ट्रियों को सीज किया गया है। यदि अवैध कटान या परिवहन का कोई मामला सामने आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एचएस यादव, रेंज अधिकारी, धौरहरा।
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जिले के धौरहरा क्षेत्र में अवैध रूप से हरे भरे पेड़ों का कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। लकड़ी माफिया चोरी-चोरी जलमार्ग से हजारों टन लकड़ी पड़ोसी जिलों को भेज रहे हैं। ईसानगर थाने का डेबर घाट लकड़ी तस्करी का मुख्य अड्डा बन चुका है। क्षेत्र में नदियों के सहारे बेशकीमती लकड़ी की तस्करी की सूचनाएं ऊपर तक हैं लेकिन स्थानीय वनाधिकारी मौन हैं।
अवैध कटान और नदियों के सहारे दूसरे जिलों को लकड़ी भेज जाने की सूचना पर मुख्य वन संरक्षक दो बार यहां जांच के लिए आ चुके हैं। इसके बाद भी धौरहरा वन रेंज के वनकर्मियों की कार्य शैली में कोई खास बदलाव नहीं आया है। क्षेत्र में पेड़ों का कटान और लकड़ी की तस्करी बदस्तूर जारी है। ईसानगर थाना क्षेत्र में चौका नदी का डेबर घाट मौजूदा समय में वनकर्मियों के लिए किसी सोने के अंडे देने वाली मुर्गी से कम साबित नहीं हो रहा है।
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प्रदेश सरकार के सख्त रवैये और वरिष्ठ वनाधिकारियों के छापे पड़ने से धौरहरा वनरेंज में लकड़ी माफिया और वनकर्मियों की नींद उड़ गई है लेकिन इस वन रेंज में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। लकड़ी माफिया और वनकर्मियों की जुगलबंदी से इस क्षेत्र की हरियाली उजड़ रही है।
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प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद लकड़ी माफिया लकड़ी लाने और ले जाने के लिए सड़क मार्ग की अपेक्षा नदी मार्ग को तरजीह दे रहे हैं। डेबर घाट से नदी पार करके लकड़ी सीधे सीतापुर जिले के तंबौर ले जाई जा रही है।
नदियों के जरिए लकड़ी की तस्करी किए जाने का मामला जानकारी में आने के बाद से लगातार छापेमारी की जा रही है। छापेमारी में लकड़ी माफिया पकड़े गए और लकड़ी भी बरामद की गई है। अवैध कटान और परिवहन रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
यूपी सिंह, एसडीओ निघासन।
लकड़ी कटान और तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया गया है। क्षेत्र की दो प्लाईवुड फैक्ट्रियों को सीज किया गया है। यदि अवैध कटान या परिवहन का कोई मामला सामने आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एचएस यादव, रेंज अधिकारी, धौरहरा।