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एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दूसरी कार बरामद
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 17 Sep 2015 11:26 PM IST
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दूसरे राज्यों से चोरी कर लाई गई कारों की जिले में बिक्री करने के मामले का भंडाफोड़ होने के बाद से तफ्तीश में जुटी पुलिस ने 20 दिन पूर्व एक इनोवा कार को कब्जे में लिया था, उसी रजिस्ट्रेशन नंबर की एक और इनोवा कार अमरोहा पुलिस ने बरामद की हैै। इससे स्वामित्व विवाद के बाद अब चोरी की गाड़ी होने का शक गहरा गया है, क्योंकि चेचिस नंबर हुबहू होने के साथ सिर्फ एक जीरो का अंतर मिला है।
स्वामित्व के विवाद को लेकर कोतवाली पुलिस ने 27 अगस्त को एक इनोवा कार को कब्जे लिया था, जिस पर मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील ने अपने पक्ष में कागजात प्रस्तुत कर दावा किया था। जबकि मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी अंकित सिंह ने चोरी की कारों की बिक्री करने से चर्चा में आए आलोक कार सेल्स से इनोवा खरीदने के कागजात दिखाते हुए इनोवा पर अपना दावा ठोका था। इस मामले की तफ्तीश के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए, जिसमें पता चला कि मुरादाबाद निवासी मकबूल नाम के शख्स से यह गाड़ी खरीदी गई थी। खास बात यह है कि 13 अप्रैल 2015 को तत्कालीन जेल गेट चौकी इंचार्ज धर्मदास सिद्धार्थ ने भी इस इनोवा को पकड़ा था, जिसके बाद शकील ने 16 मई 2015 को एसडीएम के आदेश से गाड़ी रिलीज कराई थी। जबकि एक बार अंकित सिंह भी कोर्ट से इनोवा रिलीज करा चुका है। पुलिस को दिए बयान में शकील ने बताया है कि इनोवा को अंकित सिंह से खरीदा था, लेकिन एनओसी न होने के चलते रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाया था, जो बाद में कराया। दोनों में असली मालिक की तलाश में पुलिस तफ्तीश कर ही रही थी तो मंगलवार को अमरोहा पुलिस ने एक इनोवा पकड़ी, जिसका नंबर भी यूपी 78 बीसी 8677 है। एसएसआई रामअवतार यादव के मुताबिक जिस मकबूल से गाड़ी खरीदे जाने की बात सामने आई है, उसके खिलाफ नोएडा, दिल्ली में कई मुकदमे दर्ज हैं। वांछित होने के चलते फरार है। उससे भी पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।
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स्वामित्व के विवाद को लेकर कोतवाली पुलिस ने 27 अगस्त को एक इनोवा कार को कब्जे लिया था, जिस पर मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील ने अपने पक्ष में कागजात प्रस्तुत कर दावा किया था। जबकि मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी अंकित सिंह ने चोरी की कारों की बिक्री करने से चर्चा में आए आलोक कार सेल्स से इनोवा खरीदने के कागजात दिखाते हुए इनोवा पर अपना दावा ठोका था। इस मामले की तफ्तीश के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए, जिसमें पता चला कि मुरादाबाद निवासी मकबूल नाम के शख्स से यह गाड़ी खरीदी गई थी। खास बात यह है कि 13 अप्रैल 2015 को तत्कालीन जेल गेट चौकी इंचार्ज धर्मदास सिद्धार्थ ने भी इस इनोवा को पकड़ा था, जिसके बाद शकील ने 16 मई 2015 को एसडीएम के आदेश से गाड़ी रिलीज कराई थी। जबकि एक बार अंकित सिंह भी कोर्ट से इनोवा रिलीज करा चुका है। पुलिस को दिए बयान में शकील ने बताया है कि इनोवा को अंकित सिंह से खरीदा था, लेकिन एनओसी न होने के चलते रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाया था, जो बाद में कराया। दोनों में असली मालिक की तलाश में पुलिस तफ्तीश कर ही रही थी तो मंगलवार को अमरोहा पुलिस ने एक इनोवा पकड़ी, जिसका नंबर भी यूपी 78 बीसी 8677 है। एसएसआई रामअवतार यादव के मुताबिक जिस मकबूल से गाड़ी खरीदे जाने की बात सामने आई है, उसके खिलाफ नोएडा, दिल्ली में कई मुकदमे दर्ज हैं। वांछित होने के चलते फरार है। उससे भी पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।
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