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स्कूल की छत गिरने से एक बालक की मौत, दो जख्मी
ईसानगर
Updated Wed, 21 Jan 2015 09:53 PM IST
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थाना क्षेत्र के गांव परसिया में बुधवार की शाम करीब साढ़े छह बजे प्राथमिक विद्यालय के बरामदे में खेल रहे तीन बच्चों पर स्कूल की छत भरभरा कर गिर गई। इसमें तीनों बच्चे मलबे में दबकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिन्हें इलाज के लिए खमरिया सीएचसी ले जाया गया। इनमें से एक बच्चे को सीएचसी में डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव के संतोष कुमार का 10 वर्षीय पुत्र रिषभ, छोटकन्न का 10 वर्षीय पुत्र सरजीत और हरकिशुन का 18 वर्षीय पुत्र इंद्रपाल प्राथमिक विद्यालय के बरामदे में खेल रहे थे। इसी बीच बरामदे की छत ढह गई, जिसके मलबे में दबने से तीनों बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हो गए। परिवारीजन और ग्रामीण जख्मी बच्चों को लेकर सीएचसी खमरिया पहुंचे, जहां डॉक्टर ने रिषभ को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब 10 साल पहले ही बना था। इस घटना से क्षेत्रीय लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि अगर स्कूल खुला होता तो छत गिरने से बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीण स्कूल भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी रमेश पंकज ने बताया कि वर्ष 2007 से उस भवन में शिक्षण कार्य नहीं हो रहा था। भवन निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था।
डीएम गौरव दयाल ने बताया कि घटना गंभीर है। भवन निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। साथ ही मृत बालक के परिवारीजनों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
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ग्रामीणों के मुताबिक गांव के संतोष कुमार का 10 वर्षीय पुत्र रिषभ, छोटकन्न का 10 वर्षीय पुत्र सरजीत और हरकिशुन का 18 वर्षीय पुत्र इंद्रपाल प्राथमिक विद्यालय के बरामदे में खेल रहे थे। इसी बीच बरामदे की छत ढह गई, जिसके मलबे में दबने से तीनों बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हो गए। परिवारीजन और ग्रामीण जख्मी बच्चों को लेकर सीएचसी खमरिया पहुंचे, जहां डॉक्टर ने रिषभ को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब 10 साल पहले ही बना था। इस घटना से क्षेत्रीय लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि अगर स्कूल खुला होता तो छत गिरने से बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीण स्कूल भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी रमेश पंकज ने बताया कि वर्ष 2007 से उस भवन में शिक्षण कार्य नहीं हो रहा था। भवन निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था।
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डीएम गौरव दयाल ने बताया कि घटना गंभीर है। भवन निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। साथ ही मृत बालक के परिवारीजनों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
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