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ऐतिहासिक रामलीला मेला आज से, सभी तैयारियां पूरी
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 01 Oct 2016 12:08 AM IST
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ramleela
- फोटो : amar ujala
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बनारस के रामनगर की तर्ज पर होती है यहां रामलीला
रामलीला पहले से अधिक भव्य बनाने में जुटे आयोजक
शहर का ऐतिहासिक रामलीला मेला एक अक्तूबर से शुरू हो रहा है। रामलीला मेले के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पात्रों के लिए परंपरागत वस्त्र, धनुष बाण, गदा, मुकुट और मुखौटे तैयार हो चुके हैं। रावण का पुतला बनाने का काम तेजी से जारी है। रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले पात्रों का चयन हो चुका है। शनिवार को मेला मैदान पर गणेश पूजा और ध्वजारोहण के साथ रामलीला शुरू होगी। समापन 12 अक्तूबर को होगा।
इस बार बन रहा 65 फुट ऊंचा रावण का पुतला
इस साल रामलीला में दहन के 65 फुट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा है। कारीगर बरकत की देखरेख में रावण के पुतले का निर्माण किया जा रहा है। पिछले साल की तरह इस साल भी रावण के साथ ही कुछ छोटे पुतलों का भी निर्माण किया जा रहा है। रावण बांस के ढांचे पर कपड़े और कागज से तैयार किया जा रहा है। इसमें आतिशबाजी की सामग्री भी भरी जाएगी।
यहां रामचरित मानस की चौपाइयों से होते हैं संवाद
लखीमपुर की रामलीला मेले में सभी पात्र संवाद राम चरितमानस की चौपाइयों में बोलते हैं। गद्य वाक्यों का प्रयोग नहीं किया जाता। बनारस के रामनगर में होने वाली रामलीला में भी रामचरित मानस की चौपाइयों में संवाद बोलने की पंरपरा है। यहां की रामलीला का मंचन भी हूबहू रामनगर की रामलीला की तर्ज पर होती है।
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ब्राह्मण बालक ही निभाते हैं भगवान की भूमिका
रामलीला मेले में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, भगवान कृष्ण, राधा, शिव, पार्वती आदि देवी देवताओं की भूमिका 14 वर्ष तक के ब्राह्मण बालक ही निभाते हैं। रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले पात्रों को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। रामलीला शुरू होने से खत्म होने तक इन पात्रों को भगवान स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। इनके खाने पीने और ठहरने की व्यवस्था 12 दिन तक मथुरा भवन में रहती है।
प्रतिदिन मथुरा भवन से निकलती है सवारी
राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, शिव, पार्वती, हनुमान और देवी देवताओं की सवारी मथुरा भवन से निकलती है। यह सवारी शहर में भ्रमण करती हुई मेला मैदान पहुंचती है। इन पालकियों को उठाने के लिए 32 कहार लगाए जाते हैं। इन कहारों के खानपान और ठहरने का इंतजाम भी मथुरा भवन में ही रहता है।
ये है रामलीला कार्यक्रम
01 अक्तूबर गणेश पूजन, ध्वजारोहण
02 अक्तूबर राम जन्म और बाल लीला
03 अक्तूबर पुष्प वाटिका गुड़मंडी में
04 अक्तूबर धनुष यज्ञ
05 अक्तूबर राम बारात भ्रमण और विवाह
06 अक्तूबर राम सीता वन गमन
07 अक्तूबर नौका लीला सेठघाट पर
08 अक्तूबर सीताहरण,खर दूषण युद्ध
09 अक्तूबर बालि सुग्रीव युद्ध
10 अक्तूबर रावण वध
11 अक्तूबर भरत मिलाप, पुरानी गल्ला मंडी
12 अक्तूबर राज तिलक
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रामलीला पहले से अधिक भव्य बनाने में जुटे आयोजक
शहर का ऐतिहासिक रामलीला मेला एक अक्तूबर से शुरू हो रहा है। रामलीला मेले के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पात्रों के लिए परंपरागत वस्त्र, धनुष बाण, गदा, मुकुट और मुखौटे तैयार हो चुके हैं। रावण का पुतला बनाने का काम तेजी से जारी है। रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले पात्रों का चयन हो चुका है। शनिवार को मेला मैदान पर गणेश पूजा और ध्वजारोहण के साथ रामलीला शुरू होगी। समापन 12 अक्तूबर को होगा।
इस बार बन रहा 65 फुट ऊंचा रावण का पुतला
इस साल रामलीला में दहन के 65 फुट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा है। कारीगर बरकत की देखरेख में रावण के पुतले का निर्माण किया जा रहा है। पिछले साल की तरह इस साल भी रावण के साथ ही कुछ छोटे पुतलों का भी निर्माण किया जा रहा है। रावण बांस के ढांचे पर कपड़े और कागज से तैयार किया जा रहा है। इसमें आतिशबाजी की सामग्री भी भरी जाएगी।
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यहां रामचरित मानस की चौपाइयों से होते हैं संवाद
लखीमपुर की रामलीला मेले में सभी पात्र संवाद राम चरितमानस की चौपाइयों में बोलते हैं। गद्य वाक्यों का प्रयोग नहीं किया जाता। बनारस के रामनगर में होने वाली रामलीला में भी रामचरित मानस की चौपाइयों में संवाद बोलने की पंरपरा है। यहां की रामलीला का मंचन भी हूबहू रामनगर की रामलीला की तर्ज पर होती है।
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ब्राह्मण बालक ही निभाते हैं भगवान की भूमिका
रामलीला मेले में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, भगवान कृष्ण, राधा, शिव, पार्वती आदि देवी देवताओं की भूमिका 14 वर्ष तक के ब्राह्मण बालक ही निभाते हैं। रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले पात्रों को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। रामलीला शुरू होने से खत्म होने तक इन पात्रों को भगवान स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। इनके खाने पीने और ठहरने की व्यवस्था 12 दिन तक मथुरा भवन में रहती है।
प्रतिदिन मथुरा भवन से निकलती है सवारी
राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, शिव, पार्वती, हनुमान और देवी देवताओं की सवारी मथुरा भवन से निकलती है। यह सवारी शहर में भ्रमण करती हुई मेला मैदान पहुंचती है। इन पालकियों को उठाने के लिए 32 कहार लगाए जाते हैं। इन कहारों के खानपान और ठहरने का इंतजाम भी मथुरा भवन में ही रहता है।
ये है रामलीला कार्यक्रम
01 अक्तूबर गणेश पूजन, ध्वजारोहण
02 अक्तूबर राम जन्म और बाल लीला
03 अक्तूबर पुष्प वाटिका गुड़मंडी में
04 अक्तूबर धनुष यज्ञ
05 अक्तूबर राम बारात भ्रमण और विवाह
06 अक्तूबर राम सीता वन गमन
07 अक्तूबर नौका लीला सेठघाट पर
08 अक्तूबर सीताहरण,खर दूषण युद्ध
09 अक्तूबर बालि सुग्रीव युद्ध
10 अक्तूबर रावण वध
11 अक्तूबर भरत मिलाप, पुरानी गल्ला मंडी
12 अक्तूबर राज तिलक