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मुर्दों को भी नहीं बख्शा, जेवर-नगदी पर किया हाथ साफ
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 25 Dec 2016 11:34 PM IST
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शवों को मोर्चरी ले जाते समय वारदात होने की आशंका
भीषण हादसे में कई लोगों की मौत से जहां चीख पुकार मची हुई थी तो वहीं मदद के बजाय कुछ लोगों ने मानवीय संवेदनाएं ताक पर रख दीं और महिलाओं के जेवर और चालक की जेब में रखे 25 हजार रुपये पर हाथ साफ कर दिया। रविवार की सुबह मोर्चरी पर पहुंचे परिवार के लोगों ने जब महिलाओं के गहने गायब देखे तो उनके होश फाख्ता हो गए। आशंका जताई है कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी से शवों को मोर्चरी ले जाते समय किसी ने हाथ साफ कर दिया।
बहन और बहनोई को खो चुके गांव बिचपरी निवासी पुष्पेंद्र ने बताया कि हादसे का शिकार हुई बोलेरो उसके शाहजहांपुर के तकेली निवासी बहनोई वीरेश की थी। वीरेश कोटेदार थे। वह जब उसकी 30 वर्षीय बहन किरन को लेकर परिवार के अन्य लोगों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे तो परिवार की अन्य महिलाओं के साथ उसकी बहन किरन झुमकी, पायल आदि गहने पहने थीं। गांव से चलने से पहले पिता ने पैसा न होने की बात बहनोई से कही, जिस पर बहनोई 25 हजार रुपये बैंक से निकालकर लाए थे। हादसे की सूचना के बाद सुबह जब वह लोग मोर्चरी पहुंचे तो देखा बहन के अलावा अन्य महिलाओं के गहने और बहनोई के पास मौजूद नगदी गायब थी। पुलिस वालों ने बहनोई की शर्ट की जेब से 600 रुपये मिलने की बात स्वीकार की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब शव एंबुलेंस और पुलिस के वाहन से जिला अस्पताल से इमरजेंसी पहुंचे तो महिलाएं जेवर पहने हुईं थी। पुलिस भी महिलाओं के गहने पहने होने की बात कह रही है। परिवार वालों और पुलिस ने शव इमरजेंसी से मोर्चरी तक ले जाने के दौरान जेवर और नगदी पर हाथ साफ करने की आशंका जता रही है।
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भीषण हादसे में कई लोगों की मौत से जहां चीख पुकार मची हुई थी तो वहीं मदद के बजाय कुछ लोगों ने मानवीय संवेदनाएं ताक पर रख दीं और महिलाओं के जेवर और चालक की जेब में रखे 25 हजार रुपये पर हाथ साफ कर दिया। रविवार की सुबह मोर्चरी पर पहुंचे परिवार के लोगों ने जब महिलाओं के गहने गायब देखे तो उनके होश फाख्ता हो गए। आशंका जताई है कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी से शवों को मोर्चरी ले जाते समय किसी ने हाथ साफ कर दिया।
बहन और बहनोई को खो चुके गांव बिचपरी निवासी पुष्पेंद्र ने बताया कि हादसे का शिकार हुई बोलेरो उसके शाहजहांपुर के तकेली निवासी बहनोई वीरेश की थी। वीरेश कोटेदार थे। वह जब उसकी 30 वर्षीय बहन किरन को लेकर परिवार के अन्य लोगों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे तो परिवार की अन्य महिलाओं के साथ उसकी बहन किरन झुमकी, पायल आदि गहने पहने थीं। गांव से चलने से पहले पिता ने पैसा न होने की बात बहनोई से कही, जिस पर बहनोई 25 हजार रुपये बैंक से निकालकर लाए थे। हादसे की सूचना के बाद सुबह जब वह लोग मोर्चरी पहुंचे तो देखा बहन के अलावा अन्य महिलाओं के गहने और बहनोई के पास मौजूद नगदी गायब थी। पुलिस वालों ने बहनोई की शर्ट की जेब से 600 रुपये मिलने की बात स्वीकार की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब शव एंबुलेंस और पुलिस के वाहन से जिला अस्पताल से इमरजेंसी पहुंचे तो महिलाएं जेवर पहने हुईं थी। पुलिस भी महिलाओं के गहने पहने होने की बात कह रही है। परिवार वालों और पुलिस ने शव इमरजेंसी से मोर्चरी तक ले जाने के दौरान जेवर और नगदी पर हाथ साफ करने की आशंका जता रही है।
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