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आखिर दरोगा हत्याकांड की सीबीआई जांच जरूरी क्यों!

Thu, 22 Oct 2015 06:55 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Thu, 22 Oct 2015 06:55 PM IST
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After all, why have a CBI inquiry into murder inspector !
शहीद दरोगा मनोज मिश्रा हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर जिले के गांव हरदासपुर में परिवार वाले नौ दिनों से अनशन पर बैठे हैं। जबकि इस घटना को हुए करीब डेढ़ माह का समय बीत चुका है। गुरुवार को राज्यपाल और सीएम के बीच हुई वार्ता की खबर से परिवार वाले कुछ आशान्वित नजर आए, लेकिन मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की बावत कुछ नहीं कहा। इससे परिवार वाले निराश भी है, क्योंकि पांच सूत्री मांग पत्र में प्रमुख रूप से हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग शामिल है।
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बरेली के फरीदपुर थाने में तैनात दरोगा मनोज मिश्रा की नौ सितंबर 2015 की रात को पशु तस्करों के साथ कथित मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। खास बात है कि इस मुठभेड़ में किसी अन्य पुलिसकर्मी या तस्कर को एक खरोंच तक नहीं आई। यह जानना भी जरूरी हैै कि दरोगा मनोज मिश्रा ने क्षेत्र में गोतस्करी के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी, जिसको लेकर दरोगा और तत्कालीन कोतवाल के बीच विवाद भी हुआ था। शहीद दरोगा के पिता श्याम मुरारी मिश्रा का आरोप हैै कि उच्चाधिकारियों और सत्तापक्ष के नेताओं के दबाव और गोतस्करों से प्राप्त होने वाले प्रलोभन के लिए कोतवाल ने गोतस्करों को खुली छूट दे रखी थी। जबकि दरोगा मनोज मिश्रा अपनी कार्यशैली से गोतस्करों के सामने चुनौती बने हुए थेे, जिसको लेकर गोतस्करों और सत्तापक्ष के नेताओं ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। इसके बाद दरोगा मनोज मिश्रा ने आला अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत भी की, लेकिन अधिकारियों ने इसका संज्ञान नहीं लिया।
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इन सवालों के जवाब खोलेंगे हत्या की मिस्ट्री
-नौ सितंबर 2015 की रात दरोगा मनोज मिश्रा को गोली लगने के बाद प्राथमिक उपचार नहीं मिला
-फरीदपुर या जिला अस्पताल बरेली में दिखाने के बजाय 35 किमी दूर स्थित श्री राममूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ही क्यों ले जाया गया
-घटनास्थल पर खून नहीं गिरा और इलाज के लिए मनोज के साथ गए पुलिसकर्मियों के शरीर या कपड़ों पर खून कैसे नहीं लगा
-हत्याकांड के मुख्य आरोपी मटरूआ को पुलिस नहीं पकड़ सकी, बल्कि सत्तापक्ष के एक नेता ने हाजिर कराया
-दरोगा हत्याकांड की प्रथम सूचना रिपोर्ट दूसरे दिन 10 सितंबर 2015 को दिन में 2:10 बजे दर्ज की गई, जिससे परिवार वालों को बड़ी साजिश की आशंका है
-शहीद दरोगा के आवास के निकट कमरे में खून और उसको धुले जाने के अवशेष मिले, जिस पर अखबार बिछाकर छिपाने का प्रयास किया गया
जिला प्रशासन पर लगाया उपेक्षा का आरोप
शहीद दरोगा के पिता श्याम मुरारी मिश्रा ने जिला प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि बेटे के अंतिम संस्कार में डीएम ने घर जाकर मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया था। इसके बाद वह और उनकी बहू शशि मिश्रा लखीमपुर में डीएम से मिले, तो उन्होंने मांगों पर बात नहीं की। सिर्फ राशन कार्ड बनवाने की पेशकश की। इससे व्यथित होकर परिवार वाले 14 अक्तूूबर 2015 से क्रमिक अनशन पर बैठे, जो अभी जारी है।
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