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बाघ के दहाडने की दहशत से हुई बंदरों की मौत
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:27 PM IST
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लखीमपुर खीरी। मोहम्मदी रेंज के आंवला जंगल में बंदरों की मौत बाघ के दहाड़ने की दहशत में कुछ का हार्टफेल होने तो कुछ का दम घुटने से मौत हुई। बंदरों के शव का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में शामिल बांकेगंज के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविकांत का कहना है कि बंदरों के शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान तो नहीं मिले हैं, लेकिन सभी बंदरों में अंदरूनी चोटें पाई गई हैं। कई बंदरों के फेफड़ों में घातक चोटें हैं।
मालूम हो कि मोहम्मदी रेंज के आंवला जंगल में सोमवार की रात कठिना नदी के किनारे 12 बंदर संदिग्ध हालत में मृत मिले थे। इनका पोस्टमार्टम चार डॉक्टरों के पैनल ने किया था। पैनल में शामिल डॉ. रविकांत का कहना है कि कुछ बंदरों के दिल में बिना जमा खून मिला है, जो इस बात को साबित करता है कि बंदरों की मौत हार्टअटैक से हुई है। बावजूद इसके जहर की जांच के लिए बंदरों का बिसरा आईवीआरआई बरेली भेजा गया है।
बंदरों का पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सकों के पैनल में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉॅ. मोहम्मद फारूक, बांकेगंज के डॉ. रविकांत, रेहरिया के डॉ. पुष्पेंद्र और सुहेला के डॉ. एके त्रिपाठी ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि कठिना नदी से पहले बांस के जंगल हैं। वहीं लगे एक जामुन के पेड़ के पास बंदरों के शव मिले हैं। पास में ही बाघ के पगमार्क भी मिले हैं। घटनास्थल के आसपास कोई खेत नहीं है। इससे जहर की संभावना कम है। अनुमान यही है कि बाघ से दहाड़ने से दहशत में आकर पेड़ से गिरने, हार्ट फेल होने और दम घुटने से बंदरों की मौत हुई होगी।
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जब तक उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिल जाती और बिसरा रिपोर्ट नहीं आ जाती वह बंदरों की मौत के बारे में अधिकारिक तौर से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।
- एसएन यादव, रेंजर
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मालूम हो कि मोहम्मदी रेंज के आंवला जंगल में सोमवार की रात कठिना नदी के किनारे 12 बंदर संदिग्ध हालत में मृत मिले थे। इनका पोस्टमार्टम चार डॉक्टरों के पैनल ने किया था। पैनल में शामिल डॉ. रविकांत का कहना है कि कुछ बंदरों के दिल में बिना जमा खून मिला है, जो इस बात को साबित करता है कि बंदरों की मौत हार्टअटैक से हुई है। बावजूद इसके जहर की जांच के लिए बंदरों का बिसरा आईवीआरआई बरेली भेजा गया है।
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बंदरों का पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सकों के पैनल में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉॅ. मोहम्मद फारूक, बांकेगंज के डॉ. रविकांत, रेहरिया के डॉ. पुष्पेंद्र और सुहेला के डॉ. एके त्रिपाठी ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि कठिना नदी से पहले बांस के जंगल हैं। वहीं लगे एक जामुन के पेड़ के पास बंदरों के शव मिले हैं। पास में ही बाघ के पगमार्क भी मिले हैं। घटनास्थल के आसपास कोई खेत नहीं है। इससे जहर की संभावना कम है। अनुमान यही है कि बाघ से दहाड़ने से दहशत में आकर पेड़ से गिरने, हार्ट फेल होने और दम घुटने से बंदरों की मौत हुई होगी।
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जब तक उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिल जाती और बिसरा रिपोर्ट नहीं आ जाती वह बंदरों की मौत के बारे में अधिकारिक तौर से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।
- एसएन यादव, रेंजर