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जालसाजी कर नौकरी करने वाला शिक्षक होगा बर्खास्त
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लखीमपुर खीरी। एक पैन कार्ड पर तीन लोगों की नौकरी का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। विभाग ने माना है कि धौरहरा में तैनात शिक्षक बिपिन कुमार गुप्ता ने फर्जी अभिलेखों के जरिए नौकरी हासिल की है। अब उसकी बर्खास्तगी के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन भत्तों की वसूली भी कराई जाएगी। बीएसए ने बताया कि धौरहरा के उक्त शिक्षक के सभी शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। हालांकि शुरू में सभी दस्तावेजों की जांच कराई गई थी लेकिन तब यह मामला पकड़ में नहीं आया। संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय ने अंकपत्र और प्रमाणपत्रों को असली करार दिया था। अब शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने पैन नंबर बदलने वाले और दस्तावेजों की द्वितीय प्रति लगाकर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों की सूची एक सप्ताह में तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश बीएसए को दिए हैं।
बता दें कि गोरखपुर के खोराबार (सूबाबाजार) निवासी बिपिन कुमार गुप्ता केंद्रीय विद्यालय गोरखपुर में कार्यरत हैं, जिन्हें सितंबर 2018 में आनलाइन आईटीआर दाखिल करने के दौरान जानकारी हुई कि उनके पैन नंबर पर लखीमपुर खीरी और बस्ती से दो शिक्षकों का आईटीआर दाखिल किया जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अपने खाते के जरिए कराए फिक्स डिपॉजिट का प्रिंट निकलवाया, तो उसमें बिपिन के असली पते की जगह प्राइमरी स्कूल हरेरामपुरवा धौरहरा का पता दर्ज मिला। इसके बाद बिपिन कुमार गुप्ता ने लखीमपुर और बस्ती के डीएम और बीएसए से शिकायत करने के साथ ही मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर धोखाधड़ी के इस मामले की जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की। बीएसए ने पूरे मामले की जांच कराई तो पता चला कि धौरहरा ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात कथित बिपिन कुमार गुप्ता की नियुक्ति 2008 में हुई थी, जिसके बाद उसने जुलाई 2018 में पैन नंबर बदला है। मामले की जांच शुरू हुई और उसे नोटिस दी गई, जिसके बाद से वह फरार हो गया। बीएसए ने 29 दिसंबर 2018 को धौरहरा ब्लॉक में तैनात शिक्षक और गोरखपुर के केंद्रीय विद्यालय में तैनात शिक्षक बिपिन कुमार गुप्ता को मूल अभिलेखों के साथ तलब किया, तो धौरहरा में तैनात बिपिन कुमार गुप्ता हाजिर नहीं हुआ।
पैन नंबर की गड़बड़ी सामने आने के बाद पकड़े जा सके फर्जी दस्तावेज
धौरहरा ब्लॉक में तैनात बिपिन कुमार गुप्ता की नियुक्ति के बाद दस्तावेजों की जांच कराई गई थी, तब फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ा जा सका था। अंकपत्र और प्रमाण पत्र का रोल नंबर और नाम, पिता का नाम एक होने के कारण संबंधित संस्थाओं ने भी सत्यापन में इन्हें ओके कर दिया था। इससे कथित शिक्षक विपिन कुमार गुप्ता आसानी से नौकरी करता रहा। पैन नंबर का मामला उजागर होने के बाद ही उसके फर्जी दस्तावेजों को पकड़ा जा सका।
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एसटीएफ भी करेगी मामले की जांच
पैन नंबर में धोखाधड़ी के साथ ही फर्जी दस्तावेजों को लगाकर नौकरी हथियाने के मामले को शिक्षा निदेशक ने गंभीरता से लिया है। मामले की जांच एसटीएफ से कराने का फैसला लिया है। बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने बताया कि पैन नंबर बदलने वाले और शैक्षिक दस्तावेजों की द्वितीय प्रति लगाकर नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सूची एसटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय और शिक्षा निदेशक कार्यालय को भेजी जानी है। अभी तक पैन नंबर बदलने वाले एक ही शिक्षक का मामला सामने आया है, जिसमें कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही दस्तावेजों की द्वितीय प्रति लगाने वाले शिक्षकों की जांच कराई जा रही है।
धौरहरा में तैनात शिक्षक बिपिन कुमार गुप्ता को फर्जी अभिलेखों के जरिए नौकरी हासिल करने का दोषी पाया गया है। शिक्षक की बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन भत्तों की वसूली कराई जाएगी।
- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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बता दें कि गोरखपुर के खोराबार (सूबाबाजार) निवासी बिपिन कुमार गुप्ता केंद्रीय विद्यालय गोरखपुर में कार्यरत हैं, जिन्हें सितंबर 2018 में आनलाइन आईटीआर दाखिल करने के दौरान जानकारी हुई कि उनके पैन नंबर पर लखीमपुर खीरी और बस्ती से दो शिक्षकों का आईटीआर दाखिल किया जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अपने खाते के जरिए कराए फिक्स डिपॉजिट का प्रिंट निकलवाया, तो उसमें बिपिन के असली पते की जगह प्राइमरी स्कूल हरेरामपुरवा धौरहरा का पता दर्ज मिला। इसके बाद बिपिन कुमार गुप्ता ने लखीमपुर और बस्ती के डीएम और बीएसए से शिकायत करने के साथ ही मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर धोखाधड़ी के इस मामले की जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की। बीएसए ने पूरे मामले की जांच कराई तो पता चला कि धौरहरा ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात कथित बिपिन कुमार गुप्ता की नियुक्ति 2008 में हुई थी, जिसके बाद उसने जुलाई 2018 में पैन नंबर बदला है। मामले की जांच शुरू हुई और उसे नोटिस दी गई, जिसके बाद से वह फरार हो गया। बीएसए ने 29 दिसंबर 2018 को धौरहरा ब्लॉक में तैनात शिक्षक और गोरखपुर के केंद्रीय विद्यालय में तैनात शिक्षक बिपिन कुमार गुप्ता को मूल अभिलेखों के साथ तलब किया, तो धौरहरा में तैनात बिपिन कुमार गुप्ता हाजिर नहीं हुआ।
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पैन नंबर की गड़बड़ी सामने आने के बाद पकड़े जा सके फर्जी दस्तावेज
धौरहरा ब्लॉक में तैनात बिपिन कुमार गुप्ता की नियुक्ति के बाद दस्तावेजों की जांच कराई गई थी, तब फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ा जा सका था। अंकपत्र और प्रमाण पत्र का रोल नंबर और नाम, पिता का नाम एक होने के कारण संबंधित संस्थाओं ने भी सत्यापन में इन्हें ओके कर दिया था। इससे कथित शिक्षक विपिन कुमार गुप्ता आसानी से नौकरी करता रहा। पैन नंबर का मामला उजागर होने के बाद ही उसके फर्जी दस्तावेजों को पकड़ा जा सका।
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एसटीएफ भी करेगी मामले की जांच
पैन नंबर में धोखाधड़ी के साथ ही फर्जी दस्तावेजों को लगाकर नौकरी हथियाने के मामले को शिक्षा निदेशक ने गंभीरता से लिया है। मामले की जांच एसटीएफ से कराने का फैसला लिया है। बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने बताया कि पैन नंबर बदलने वाले और शैक्षिक दस्तावेजों की द्वितीय प्रति लगाकर नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सूची एसटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय और शिक्षा निदेशक कार्यालय को भेजी जानी है। अभी तक पैन नंबर बदलने वाले एक ही शिक्षक का मामला सामने आया है, जिसमें कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही दस्तावेजों की द्वितीय प्रति लगाने वाले शिक्षकों की जांच कराई जा रही है।
धौरहरा में तैनात शिक्षक बिपिन कुमार गुप्ता को फर्जी अभिलेखों के जरिए नौकरी हासिल करने का दोषी पाया गया है। शिक्षक की बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन भत्तों की वसूली कराई जाएगी।
- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए