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भोंपू वाले विधायक के नाम से मशहूर थे निरवेंद्र

Mon, 07 Sep 2020 12:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:06 AM IST
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crime
पलियाकलां। निरवेंद्र कुमार मिश्रा उर्फ मुन्ना उत्तर प्रदेश विधानसभा में लगातार तीन बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और प्रदेश में अपनी अलग एक पहचान बनाई थी। उनके वाहन पर हमेशा लगा रहने वाला लाउडस्पीकर उनकी पहचान को उस समय भोंपू वाले विधायक का नाम दे गई। वह जहां भी जाते थे उनके वाहन में लाउडस्पीकर लगा रहता था और वह उसी चलते चलते लोगों को संबोधित करने लगते थे। क्षेत्र में भी जब उनका भोंपू बोलता था तो विपक्षी दलों के लोग भी सहम जाते थे। इसके अलावा उनकी पहचान थी कि वह गरीबों के हक की ही बात करते थे और उनका हक दिलाने के लिए वह कभी कहीं भी धरने प्रदर्शन करने से नहीं चूकते थे और किसी गरीब के घर आकर फरियाद करने पर फौरन ही उसके साथ चल देते थे। क्षेत्र के अधिकारियों में श्री मिश्रा के नाम का खौफ रहता था। अधिकारी गरीब की बात पहले सुनते थे। कई बार गरीबों को न्याय दिलाने के लिए कई बार अधिकारियों से सीधी झड़प भी कर लेते थे। कई वर्षों पूर्व उन्होंने ग्रामीणों की एक समस्या पर मवेशियों को ब्लॉक में बांधकर ब्लॉक अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर नायाब तरीके से विरोध जताया था। यह विरोध भी चर्चा का विषय बना रहा।
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तीन बार लगातार विधायक रहे थे श्री मिश्रा
जब पलिया विधानसभा का गठन नहीं हुआ था तो इलाके की विधानसभा निधासन 56 कही जाती थी तब वर्ष 1989, 1991 और 1993 में लगातार तीन चुनाव जीते थे। उन्होंने दो बार चुनाव निर्दलीय लडा था और एक चुनाव समाजवादी पार्टी से लडा था।
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करोड़पतियों मुझे हराकर दिखाओ
पूर्व विधायक निरवेंद्र कुमार मिश्रा उर्फ मुन्ना कुछ नया और अलग करने के लिए इलाके ही नहीं पूरे प्रदेश में मौजूद थे और इसी क्रम में उन्होंने अपने तीन बार के विधायकी के कार्यकाल में एक चुनाव ऐसा भी लडा जो आज भी लोग नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने इस चुनाव में एक चैलेंज किया कि करोडपतियों मुझे हराकर दिखाओ और इस चैलेंज के बाद उनके चुनाव ने गरीब बनाम अमीर का रूख ले लिया और निरवेंद्र कुमार को जिताने के लिए गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों ने खुद ही मोर्चा ले लिया और खुद भी चंदा देकर उनको चुनाव लडवाया ही जितवाया भी। उस चैलेंज को लोग आज भी नहीं भूले हैं और यदा कदा उस चैलेंज को याद कर लेते हैं। वर्ष 1993 के बाद हुए विधानसभा चुनाव में वह बैठ गए और फिर उनको कभी जीत नहीं मिली। लेकिन इसके बाद भी वह भी इलाके की राजनीति में सक्रिय रहे। अभी हाल ही में वह नगला गांव में हुए झगडे को लेकर धरने पर बैठ गए थे जिसमें उन्होंने मांग की थी कि सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा लिए जाएं ताकि भविष्य में झगडे न हों। उनकी मौत से क्षेत्र ने एक राजनीतिक महारथी खो दिया है।
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