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कोरोनाकाल की शादी में नहीं दिखी पहले जैसी धूम

Fri, 27 Nov 2020 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Nov 2020 01:21 AM IST
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Civic Amenities
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लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में बुधवार से शादी समारोह तो शुरू हो गए लेकिन इस बार पहले जैसी धूम नहीं दिखी और न ही आयोजक और न ही रिश्तेदार दिल खोलकर झूम सके। जनाती, बराती, रिश्तेदार और परिवार और यहां तक कि आयोजकों से लेकर कारोबारियों तक हर किसी को तमाम बंदिशों के बीच रहना पड़ा। कई जगह तो आलम यह रहा कि कोरोना के डर के कारण तमाम सगे संबंधी शादी में नहीं आए।
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कोरोना संक्रमण को लेकर शासन की तरफ से मांगलिक कार्यक्रमों में लोगों की संख्या पर लगी बंदिशों का पालन कराने में आयोजकों और मैरिज हॉल के प्रबंधकों के पसीने छूट गए। कल से शुरू हुई कोरोनाकाल की पहली शादी में मैरिज लॉन वालों को भी काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। मेहमानों को टोकने पर कई बार तो विवाद की स्थिति बनी। यही नहीं कैटरर्स को खाना नाश्ता मुहैया कराने में असुविधा हुई। कैटरर्स का कहना है कि मेहमानों की संख्या कम जरूर हुई है मगर, खर्चे बढ़ गए हैं। वेटर आदि को ग्लब्स, मास्क देने के साथ पार्टी में आने वाले लोग पानी के लिए बोतल की मांग भी करते हैं। संक्रमण के खौफ से बारबार मेजपोश बदलवाने पड़ते हैं। इसमें खर्च अधिक हो रहा है।
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कार्यक्रम के दौरान सामाजिक दूूूरी का पालन कराने में दिक्कत आ रही है। बार बार टोकना पड़ता है। अनाउंस कराने पर लोग नाराज होने लगते हैं। कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति बनती है। जबकि कोरोना का लेकर सभी को जागरूक रहना चाहिए। सतर्कता ही बचाव है।
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-आलोक माहेश्वरी, प्रबंधक शहनाई गेस्ट हाउस
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कोरोना से पहले स्वतंत्र होकर काम करते थे। अब डर के साथ काम करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को मास्क, ग्लब्स देनेे पर खर्चा बढ़ा है। बुकिंग 200 के हिसाब से हुई थी, लेकिन अब सौ की व्यवस्था करनी पड़ती है जबकि कर्मचारी आदि पर खर्च वही आता है।
-अनीस अहमद खां एवन टेंट हाउस एवं प्रदेशमंत्री टेंट हाउस संघ
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कोरोनाकाल में खानपान पर अधिक ध्यान देना पड़ रहा है। संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन कर्मचारियों पर खर्च वही आ रहा है। खाना खराब हो रहा है। तमाम लोग आते नहीं है जो आते भी हैं वह खाने से परहेज करते हैं। बार बार मेजपोश आदि बदलवाना पड़ता है।

-अनुज श्रीवास्तव कैटरर्स
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काफी कम लोग विवाह समारोह में आए थे। हर व्यक्ति भीड़भाड़ से बचने की कोशिश कर रहा है। न तो आतिशबाजी हुई और न ही बैंडबाजा बजा। साधारण तरीके से वैवाहिक समारोह हुआ है।
-हरीश श्रीवास्तव, बरातघर मालिक
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