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एसएचजी समूहों को दुग्ध उत्पादन से जोड़ने की तैयारी
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लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांवों में बनाए गए महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को दुग्ध उत्पादन से जोड़ा जाएगा। सीडीओ अरविंद सिंह ने योजना का खाका तैयार कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस नई व्यवस्था को शीघ्र लागू कराने के निर्देश दिए हैं। कलक्ट्रेट स्थित बंद पड़े पराग मिल्क बूथ को किसी महिला समूह को आवंटित करने के निर्देश महाप्रबंधक दुग्ध संघ को दिए हैं। साथ ही सभी तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों में पराग डेयरी के बूथ बनाने का निर्णय किया गया है, जिन्हें एनआरएलएम के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जाएगा।
विकास भवन सभागर में दुग्ध उत्पादन, बिक्री और स्वयं सहायता समूहों को दुग्ध समितियों से जोड़ने के लिए सीडीओ अरविंद सिंह ने बैठक की, जिसमें उप दुग्धशाला विकास अधिकारी श्याम सुंदर, वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक नंदलाल वर्मा, दुग्ध संघ के प्रभारी प्रबंधक जीएल वर्मा मौजूद रहे। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और गांवों में सप्लाई व्यवस्था सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की गई। स्वयं सहायता समूहों को दुग्ध मार्गों पर गठित दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ते हुए परस्पर विकसित करने का खाका तैयार करते हुए सीडीओ ने कहा कि इससे स्वयं सहायता समूहों और पराग के लिए विन-विन (जीत ही जीत) परिस्थिति सृजित करें। प्रबंधक जीएल वर्मा ने बताया कि कई ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां पर दुग्ध समितियां खोले जाने की आवश्यकता है। सीडीओ ने ऐसी ग्राम पंचायतों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा और वहां पर समूह की महिलाओं द्वारा दुग्ध सहकारी समितियां गठित कराने के निर्देश दिए। पलिया और निघासन में चिलिंग प्लांट स्थापित है। लिहाजा इन ब्लॉकों में सबसे पहले एक माह के अंदर दुग्ध व्यवसाय को इच्छुक महिला समूहों को सहकारी दुग्ध समितियों से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही उपायुक्त स्वत: रोजगार अरविंद कुमार और प्रबंधक दुग्ध संघ को कहा है कि यदि कोई स्वयं सहायता समूह इसके लिए चयनित होता है, तो किसी प्रकार से उसका हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
गोशाला के तालाबों में कराया जाएगा मछली पालन
लखीमपुर खीरी। गोशाला की आय के स्रोत को तलाशने के लिए सीडीओ अरविंद सिंह ने तालाबों में मछली पालन कराने का खाका तैयार किया है। जिन गोशाला में कम से कम दो हजार वर्ग मीटर में तालाब विकसित हो सकता है या वर्तमान में स्थापित है, ऐसी गोशालाओं की सूची तीन दिन में सहायक निदेशक मत्स्य को उपलब्ध कराने के निर्देश सीवीओ को दिए हैं। मछली पालन करके प्राप्त होने वाली आय से पशुओं के चारा की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
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उपायुक्त मनरेगा और संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ को जलापूर्ति के लिए मनरेगा से तालाब विकसित कराएंगे। साथ ही सुनिश्चित करेंगे कि इन तालाबों में साल के 12 महीनों में तालाब भरे रहें। सहायक निदेशक मत्स्य संजय यादव ने बताया कि मेजरकार्प मछलियां रोहू, नैन, कतला आदि का पालन फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि यह प्रजातियां गोबर के द्वारा तालाब में ही अपना आहार प्राप्त कर लेेती हैं। इन्हें अन्य प्रजाति के सापेक्ष बाहर से अतिरिक्त आहार की आवश्यकता नहीं पड़ती। केस स्टडी कर अनुमान लगाया गया कि छह माह में 10 हजार की लागत से 1.40 लाख रुपये शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और पशुओं के लिए चारा खरीदने में आसानी होगी।
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विकास भवन सभागर में दुग्ध उत्पादन, बिक्री और स्वयं सहायता समूहों को दुग्ध समितियों से जोड़ने के लिए सीडीओ अरविंद सिंह ने बैठक की, जिसमें उप दुग्धशाला विकास अधिकारी श्याम सुंदर, वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक नंदलाल वर्मा, दुग्ध संघ के प्रभारी प्रबंधक जीएल वर्मा मौजूद रहे। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और गांवों में सप्लाई व्यवस्था सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की गई। स्वयं सहायता समूहों को दुग्ध मार्गों पर गठित दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ते हुए परस्पर विकसित करने का खाका तैयार करते हुए सीडीओ ने कहा कि इससे स्वयं सहायता समूहों और पराग के लिए विन-विन (जीत ही जीत) परिस्थिति सृजित करें। प्रबंधक जीएल वर्मा ने बताया कि कई ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां पर दुग्ध समितियां खोले जाने की आवश्यकता है। सीडीओ ने ऐसी ग्राम पंचायतों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा और वहां पर समूह की महिलाओं द्वारा दुग्ध सहकारी समितियां गठित कराने के निर्देश दिए। पलिया और निघासन में चिलिंग प्लांट स्थापित है। लिहाजा इन ब्लॉकों में सबसे पहले एक माह के अंदर दुग्ध व्यवसाय को इच्छुक महिला समूहों को सहकारी दुग्ध समितियों से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही उपायुक्त स्वत: रोजगार अरविंद कुमार और प्रबंधक दुग्ध संघ को कहा है कि यदि कोई स्वयं सहायता समूह इसके लिए चयनित होता है, तो किसी प्रकार से उसका हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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गोशाला के तालाबों में कराया जाएगा मछली पालन
लखीमपुर खीरी। गोशाला की आय के स्रोत को तलाशने के लिए सीडीओ अरविंद सिंह ने तालाबों में मछली पालन कराने का खाका तैयार किया है। जिन गोशाला में कम से कम दो हजार वर्ग मीटर में तालाब विकसित हो सकता है या वर्तमान में स्थापित है, ऐसी गोशालाओं की सूची तीन दिन में सहायक निदेशक मत्स्य को उपलब्ध कराने के निर्देश सीवीओ को दिए हैं। मछली पालन करके प्राप्त होने वाली आय से पशुओं के चारा की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
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उपायुक्त मनरेगा और संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ को जलापूर्ति के लिए मनरेगा से तालाब विकसित कराएंगे। साथ ही सुनिश्चित करेंगे कि इन तालाबों में साल के 12 महीनों में तालाब भरे रहें। सहायक निदेशक मत्स्य संजय यादव ने बताया कि मेजरकार्प मछलियां रोहू, नैन, कतला आदि का पालन फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि यह प्रजातियां गोबर के द्वारा तालाब में ही अपना आहार प्राप्त कर लेेती हैं। इन्हें अन्य प्रजाति के सापेक्ष बाहर से अतिरिक्त आहार की आवश्यकता नहीं पड़ती। केस स्टडी कर अनुमान लगाया गया कि छह माह में 10 हजार की लागत से 1.40 लाख रुपये शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और पशुओं के लिए चारा खरीदने में आसानी होगी।