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अब ग्रासलैंड मैनेजमेंट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की खाद्य शृंखला को मजबूत करने करने के लिए अब ग्रासलैंड मैनेजमेंट के वैज्ञानिक प्रबंधन को वन विभाग प्राथमिकता दे रहा है। इसी कड़ी में दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जैव विविधता संरक्षण, संवर्धन के दृष्टिकोण से घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन की एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और विश्व प्रकृति निधि भारत के सहयोग से होने वाली यह दो दिवसीय कार्यशाला दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन परिसर में 14 और 15 दिसंबर को होगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि इस कार्यशाला में राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ राजेंद कुमार पांडेय और मध्य प्रदेश के रिटायर्ड मुख्य वन संरक्षक रविकांत मिश्रा ग्रासलैंड की पहचान एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष रूप से व्याख्यान देंगे। कार्यशाला में घास के मैदानों के बेहतर ढंग से वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा होगी। इसमें डीटीआर और पीटीआर के सभी वनाधिकारी, वन्यजीव प्रतिपालक और रेंजर स्तर के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
एफडी ने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में 1400 हेक्टेयर, डीटीआर बफरजोन में 50 हेक्टेयर और कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में 1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में घास के मैदान हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में ही घास का बेहतर इंतजाम करने के पीछे वजह यह भी है कि ऐसा होने पर शाकाहारी वन्यजीव भोजन के लिए जंगल के बाहर नहीं जाएंगे। जंगल की खाद्य शृंखला में शाकाहारी वन्यजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि इनकी संख्या घटने से मांसाहारी वन्यजीव भोजन की तलाश में जंगल के बाहर आसपास गांवों की ओर निकल सकते हैं। शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन के रूप में नरम घास उगाने के लिए वन विभाग अब ग्रासलैंड का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि इस कार्यशाला में राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ राजेंद कुमार पांडेय और मध्य प्रदेश के रिटायर्ड मुख्य वन संरक्षक रविकांत मिश्रा ग्रासलैंड की पहचान एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष रूप से व्याख्यान देंगे। कार्यशाला में घास के मैदानों के बेहतर ढंग से वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा होगी। इसमें डीटीआर और पीटीआर के सभी वनाधिकारी, वन्यजीव प्रतिपालक और रेंजर स्तर के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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एफडी ने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में 1400 हेक्टेयर, डीटीआर बफरजोन में 50 हेक्टेयर और कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में 1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में घास के मैदान हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में ही घास का बेहतर इंतजाम करने के पीछे वजह यह भी है कि ऐसा होने पर शाकाहारी वन्यजीव भोजन के लिए जंगल के बाहर नहीं जाएंगे। जंगल की खाद्य शृंखला में शाकाहारी वन्यजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि इनकी संख्या घटने से मांसाहारी वन्यजीव भोजन की तलाश में जंगल के बाहर आसपास गांवों की ओर निकल सकते हैं। शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन के रूप में नरम घास उगाने के लिए वन विभाग अब ग्रासलैंड का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
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