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बाघ के हमले में बाल-बाल बचे वनकर्मी
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ममरी (लखीमपुर खीरी)। देवीपुर बीट जंगल की गश्त पर निकले मोहम्मदी रेंज के दो वॉचर वन कर्मी बाघ के हमले में बाल-बाल बच गए। गन्ने की छिलाई कर रहे मजदूरों के शोर मचाने, आग जलाने पर दोनों बाघ फिर गन्ने के खेत में चले गए।
बताते हैं कि मोहम्मदी रेंज के दो वॉचर लालाराम और मुनीम बुधवार सुबह देवीपुर बीट जंगल की गश्त पर निकले थे। वन कर्मियों के अनुसार उनकी साइकिल जैसे ही मौठीखेड़ा फार्म के पास पहुंची। वैसे ही गन्ने के खेत से निकले दो बाघों ने उन पर झपट्टा मार दिया। वॉचरों ने साइकिल छोड़ कर वहां से शोर मचाते हुए भागकर अपनी जान बचाई। बाघ को देख सरदार विजेंद्र सिंह के फार्म में गन्ने की छिलाई कर रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई, जिनके शोर मचाने, आग जलाने पर दोनों बाघ जंगल की ओर चले गए।
सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद ने घटना की सूचना रेंजर मोबीन आरिफ को दी। बताया कि यही दोनों बाघ मंगलवार की शाम कठिना नदी के घमहाघाट पुल के पास विचरण करते देखे गए थे। रेंजर का कहना है कि वनकर्मी और एसटीपीएफ जवान बाघ, तेंदुओं की चहलकदमी पर पैनी नजर रख रहे हैं। रात में बाघ शिकार की तलाश में जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में पहुंच जाते हैं। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर किसानों, मजदूरों से गन्ने की छिलाई समूह बनाकर करने को कहा है।
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बताते हैं कि मोहम्मदी रेंज के दो वॉचर लालाराम और मुनीम बुधवार सुबह देवीपुर बीट जंगल की गश्त पर निकले थे। वन कर्मियों के अनुसार उनकी साइकिल जैसे ही मौठीखेड़ा फार्म के पास पहुंची। वैसे ही गन्ने के खेत से निकले दो बाघों ने उन पर झपट्टा मार दिया। वॉचरों ने साइकिल छोड़ कर वहां से शोर मचाते हुए भागकर अपनी जान बचाई। बाघ को देख सरदार विजेंद्र सिंह के फार्म में गन्ने की छिलाई कर रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई, जिनके शोर मचाने, आग जलाने पर दोनों बाघ जंगल की ओर चले गए।
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सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद ने घटना की सूचना रेंजर मोबीन आरिफ को दी। बताया कि यही दोनों बाघ मंगलवार की शाम कठिना नदी के घमहाघाट पुल के पास विचरण करते देखे गए थे। रेंजर का कहना है कि वनकर्मी और एसटीपीएफ जवान बाघ, तेंदुओं की चहलकदमी पर पैनी नजर रख रहे हैं। रात में बाघ शिकार की तलाश में जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में पहुंच जाते हैं। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर किसानों, मजदूरों से गन्ने की छिलाई समूह बनाकर करने को कहा है।
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