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सदर पुलिस तलाशेगी क्राइस्ट चर्च बम धमाके की वजह
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लखीमपुर खीरी। एटीएस की जांच रिपोर्ट आने के बाद क्राइस्ट चर्च पर बम से हमले के मामले की दोबारा विवेचना करने के लिए एसपी ने गुरुवार को आदेश कर दिए। मास्टरमाइंड और घटना में शामिल अन्य लोगों के नाम एटीएस द्वारा पता लगाए जाने के बाद अब सदर पुलिस की जिम्मेदारी होगी कि वह घटना की वजह तलाश करे। यह तभी संभव होगा जब मास्टरमाइंड कमरू का पता लगाकर पुलिस उसे पहले खोजे और फिर उससे राज उगलवा सके। एटीएस ने हमले में शामिल लोगों के बारे में जरूर बता दिया है, मगर वजह पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मास्टरमाइंड कमरू के पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगा।
एसपी के पुराने बंगले के पास मोहल्ला कपूरथला स्थित क्राइस्ट चर्च पर 17 सितंबर 16 की रात दो बम धमाके हुए थे। धमाकों से चर्च में लगे शीशे टूट गए थे। खिड़कियों की ग्रिल में लगी लोहे की पत्तियां भी उखड़ गईं थीं। धमका इतना तेज था कि चर्च के पूरे कैंपस में इसका प्रभाव महसूस किया गया था। पुलिस ने पादरी सीएल लायल की ओर से रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी। विवेचक ने मामले में बड़ी लापरवाही की। वह एक साल तक धमाके से जुड़े कोई सबूत नहीं जुटा सके। करीब एक साल तक चली जांच में न ही धमाका करने, कराने वालों और उसकी वजहों को तलाश सके। अभियुक्तों की पहचान न होने की बात कहकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
वहीं एटीएस ने अपना काम जारी रखा। वह घटना के अगले दिन भी मौके पर जांच करने आई थी। फिर जब आगरा की फोरेंसिक रिपोर्ट आई तो एटीएस के कान खड़े हो गए। फोरेंसिक रिपोर्ट में बताया गया था कि बम में केमिकल इस्तेमाल किए गए थे। यानी फेंके गए बम कोई साधारण नहीं थे, दूसरा यह खास मकसद से फेंके गए थे। इन बिंदुओं पर जांच करते हुए एटीएस ने जांच की तो पता चला कि घटना में बहराइच का कमरू मास्टरमाइंड था और उसने दो लाख रुपये देकर यह हमला कराया था।
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एटीएस की जांच में छह आरोपियों का खुलासा होने के बाद जिला पुलिस एक बार फिर हरकत में आ गई है। एटीएस की जांच रिपोर्ट पर एसपी पूनम ने प्रभारी निरीक्षक सदर फतेह सिंह को दोबारा विवेचना कराने के आदेश दिए हैं। प्रभारी निरीक्षक ने पुर्न विवेचना की जिम्मेदारी जेलगेट चौकी इंचार्ज जेपी यादव को सौंपी है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस एटीएस के खुलासे में सामने आए आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे धमाकों की वजह उगलवा सकेगी या नहीं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि चर्च की लगभग चार एकड़ भूमि पर सूबे के पूर्व सहकारिता मंत्री तत्कालिक निघासन भाजपा विधायक रामकुमार वर्मा ( अब दिवंगत) से विवाद चल रहा है। जिसका दीवानी न्यायालय में वाद विचाराधीन है। पुलिस विस्फोट को इस विवाद से भी जोड़कर देख रही थी।
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एसपी के पुराने बंगले के पास मोहल्ला कपूरथला स्थित क्राइस्ट चर्च पर 17 सितंबर 16 की रात दो बम धमाके हुए थे। धमाकों से चर्च में लगे शीशे टूट गए थे। खिड़कियों की ग्रिल में लगी लोहे की पत्तियां भी उखड़ गईं थीं। धमका इतना तेज था कि चर्च के पूरे कैंपस में इसका प्रभाव महसूस किया गया था। पुलिस ने पादरी सीएल लायल की ओर से रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी। विवेचक ने मामले में बड़ी लापरवाही की। वह एक साल तक धमाके से जुड़े कोई सबूत नहीं जुटा सके। करीब एक साल तक चली जांच में न ही धमाका करने, कराने वालों और उसकी वजहों को तलाश सके। अभियुक्तों की पहचान न होने की बात कहकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
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वहीं एटीएस ने अपना काम जारी रखा। वह घटना के अगले दिन भी मौके पर जांच करने आई थी। फिर जब आगरा की फोरेंसिक रिपोर्ट आई तो एटीएस के कान खड़े हो गए। फोरेंसिक रिपोर्ट में बताया गया था कि बम में केमिकल इस्तेमाल किए गए थे। यानी फेंके गए बम कोई साधारण नहीं थे, दूसरा यह खास मकसद से फेंके गए थे। इन बिंदुओं पर जांच करते हुए एटीएस ने जांच की तो पता चला कि घटना में बहराइच का कमरू मास्टरमाइंड था और उसने दो लाख रुपये देकर यह हमला कराया था।
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एटीएस की जांच में छह आरोपियों का खुलासा होने के बाद जिला पुलिस एक बार फिर हरकत में आ गई है। एटीएस की जांच रिपोर्ट पर एसपी पूनम ने प्रभारी निरीक्षक सदर फतेह सिंह को दोबारा विवेचना कराने के आदेश दिए हैं। प्रभारी निरीक्षक ने पुर्न विवेचना की जिम्मेदारी जेलगेट चौकी इंचार्ज जेपी यादव को सौंपी है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस एटीएस के खुलासे में सामने आए आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे धमाकों की वजह उगलवा सकेगी या नहीं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि चर्च की लगभग चार एकड़ भूमि पर सूबे के पूर्व सहकारिता मंत्री तत्कालिक निघासन भाजपा विधायक रामकुमार वर्मा ( अब दिवंगत) से विवाद चल रहा है। जिसका दीवानी न्यायालय में वाद विचाराधीन है। पुलिस विस्फोट को इस विवाद से भी जोड़कर देख रही थी।