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Lakhimpur Kheri News: आढ़तें गुलजार... सरकारी केंद्र ताक रहे किसानों की राह
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सरकारी धान खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा
लखीमपुर खीरी। धान खरीद शुरू हुए एक सप्ताह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक लखीमपुर मंडी में एक भी दाना धान नहीं खरीदा जा सका है। सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। वहीं आढ़तें किसानों की आमद से गुलजार हैं। सरकारी क्रय केंद्र पर पसरे सन्नाटे के पीछे धान की फसल में नमी होना बताया जा रहा है। साथ ही किसान सरकारी तामझाम में भी नहीं पड़ना चाहता है। फिलहाल सोमवार से सरकारी केंद्रों पर खरीद चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसान धान की फसल काटकर दूसरी फसल बोने की तैयारी करने लगे हैं। कटी फसल को लेकर किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर जाने के बजाय आढ़तों पर बेच रहे हैं। राजापुर मंडी समिति में बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों के सेंटर एक सप्ताह बाद भी सूने दिखाई दिए। केंद्रों पर कर्मचारी तो तैनात हैं, लेकिन वह सुबह से लेकर शाम तक किसानों का इंतजार करते रहते हैं। क्रय केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि किसान जो धान लेकर आ रहे हैं, उनमें ज्यादा नमी पाई जा रही है।
नियमों के अनुसार 14 प्रतिशत नमी वाले धान की ही खरीद सरकारी केंद्रों पर की जाती है, जबकि धान में 20 से लेकर 25 प्रतिशत तक नमी मापी जा रही है। ज्यादा नमी निकलने के डर से किसान अपनी फसल सीधे आढ़तों पर ले जाकर बेंच रहा है। आढ़तों पर किसान अपना धान 1800 से लेकर 1905 रुपये तक बेच रहा है। आढ़तों पर धान लेकर पहुंच रहे किसानों का कहना है कि आढ़तिए एक बार में धान की फसल देखकर बोली लगाते हैं, सौदा होते ही फसल बेंच दी जाती है।
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इस बार मंडी समिति में विभिन्न एजेंसियों के 38 केंद्र बनाए गए हैं। पूरे जिले के 169 केंद्रों पर खरीद होनी है। शासन की तरफ से इस बार सामान्य धान 2183 रुपये व ग्रेड ए वाला धान 2203 रुपया प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। फिलहाल मंडी समिति में बनाए क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटा, डस्टर, नमी मापक यंत्र, किसानों के बैठने के लिए कुर्सी और पेयजल की व्यवस्थाएं दुरुस्त बताई जा रही हैं।
सरकारी मूल्य ज्यादा लेकिन खरीद शून्य
किसान बिचौलिए के चक्कर में पड़कर अपनी फसल औने-पौने पौने दाम में न बेचें, इसके लिए हर साल सरकारी धान खरीद केंद्र बनाए जाते हैं। यहां किसानों से सरकारी मूल्य पर फसल खरीदी जाती है। इस बार सामान्य धान 2183 रुपये व ग्रेड ए वाले धान की कीमत 2203 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। बावजूद इसके भी किसान कम दामों में अपनी फसल बेच रहा है। मंडी आने वाला किसान अपनी फसल सीधे आढ़तों पर लेकर पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद जिस सेंटर का टोकन होगा वहां जाकर फसल की जांच करानी पड़ती है। यदि जांच में फसल सही पाई जाती है तभी खरीद होती है वरना किसान को वापस कर दिया जाता है।
इन कारणों से नहीं हो रही खरीद
1-धान में औसत से ज्यादा नमी पाई जा रही है।
2-भुगतान के लिए फसल बिक्री के बाद भी एक सप्ताह से ज्यादा करना पड़ता है इंतजार।
3-रजिस्ट्रेशन से लेकर फसल बिकने तक करना पड़ता है इंंतजार।
4-आढ़तों पर है नगद भुगतान की सुविधा।
5-मौसम के बदले मिजाज से पूरी तरह से नहीं पक रही धान की फसल।
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किसान धान की फसल काटकर दूसरी फसल बोने की तैयारी करने लगे हैं। कटी फसल को लेकर किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर जाने के बजाय आढ़तों पर बेच रहे हैं। राजापुर मंडी समिति में बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों के सेंटर एक सप्ताह बाद भी सूने दिखाई दिए। केंद्रों पर कर्मचारी तो तैनात हैं, लेकिन वह सुबह से लेकर शाम तक किसानों का इंतजार करते रहते हैं। क्रय केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि किसान जो धान लेकर आ रहे हैं, उनमें ज्यादा नमी पाई जा रही है।
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नियमों के अनुसार 14 प्रतिशत नमी वाले धान की ही खरीद सरकारी केंद्रों पर की जाती है, जबकि धान में 20 से लेकर 25 प्रतिशत तक नमी मापी जा रही है। ज्यादा नमी निकलने के डर से किसान अपनी फसल सीधे आढ़तों पर ले जाकर बेंच रहा है। आढ़तों पर किसान अपना धान 1800 से लेकर 1905 रुपये तक बेच रहा है। आढ़तों पर धान लेकर पहुंच रहे किसानों का कहना है कि आढ़तिए एक बार में धान की फसल देखकर बोली लगाते हैं, सौदा होते ही फसल बेंच दी जाती है।
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इस बार मंडी समिति में विभिन्न एजेंसियों के 38 केंद्र बनाए गए हैं। पूरे जिले के 169 केंद्रों पर खरीद होनी है। शासन की तरफ से इस बार सामान्य धान 2183 रुपये व ग्रेड ए वाला धान 2203 रुपया प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। फिलहाल मंडी समिति में बनाए क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटा, डस्टर, नमी मापक यंत्र, किसानों के बैठने के लिए कुर्सी और पेयजल की व्यवस्थाएं दुरुस्त बताई जा रही हैं।
सरकारी मूल्य ज्यादा लेकिन खरीद शून्य
किसान बिचौलिए के चक्कर में पड़कर अपनी फसल औने-पौने पौने दाम में न बेचें, इसके लिए हर साल सरकारी धान खरीद केंद्र बनाए जाते हैं। यहां किसानों से सरकारी मूल्य पर फसल खरीदी जाती है। इस बार सामान्य धान 2183 रुपये व ग्रेड ए वाले धान की कीमत 2203 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। बावजूद इसके भी किसान कम दामों में अपनी फसल बेच रहा है। मंडी आने वाला किसान अपनी फसल सीधे आढ़तों पर लेकर पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद जिस सेंटर का टोकन होगा वहां जाकर फसल की जांच करानी पड़ती है। यदि जांच में फसल सही पाई जाती है तभी खरीद होती है वरना किसान को वापस कर दिया जाता है।
इन कारणों से नहीं हो रही खरीद
1-धान में औसत से ज्यादा नमी पाई जा रही है।
2-भुगतान के लिए फसल बिक्री के बाद भी एक सप्ताह से ज्यादा करना पड़ता है इंतजार।
3-रजिस्ट्रेशन से लेकर फसल बिकने तक करना पड़ता है इंंतजार।
4-आढ़तों पर है नगद भुगतान की सुविधा।
5-मौसम के बदले मिजाज से पूरी तरह से नहीं पक रही धान की फसल।

सरकारी धान खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा