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शिक्षामित्रों के खिलाफ कोर्ट जाने वाले हिमांशु राणा का पुतला फूंका
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:03 PM IST
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अनशन
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षामित्रों का क्रमिक अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा
परिषदीय स्कूलों के कुछ छात्र, अभिभावक भी प्रदर्शन में हुए शामिल
समायोजित शिक्षामित्रों ने पांचवें दिन भी क्रमिक अनशन जारी रखा, जिसे धार देने के लिए नई रणनीति बनाई जा रही हैै। रविवार को अनशन स्थल पर एकत्र होने के बाद उनके समायोजन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले टीईटी मोर्चा 2011 के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला गुरु गोविंद सिंह चौक पर फूंककर शिक्षामित्रों ने गुस्सा जताया है। इसमें परिषदीय स्कूलों के कुछ बच्चे और उनके अभिभावक भी शामिल हुए, जिन्होंने समायोजित शिक्षामित्रों से ही पढ़ाई कराए जाने की बात कहकर समर्थन जताने की कोशिश की है। वहीं सोशल मीडिया पर शिक्षामित्रों और टीईटी संघर्ष मोर्चा के बीच शब्दों के तीर चलाए जा रहे हैं।
बीएसए कार्यालय परिसर में संयुक्त समायोजित शिक्षक/ शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष संजय मिश्रा और राकेश सिंह के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने सरकार से रोजी-रोटी वापस दिलाने की मांग की। अध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, लेकिन शिक्षामित्रों को उनका हक और सम्मान वापस मिलना ही चाहिए। इसके लिए सरकार जब तक निर्णय नहीं लेती, तब तक अनवरत क्रमिक अनशन जारी रहेगा। शिक्षामित्रों ने अपना पक्ष और अधिक मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। लड़ाई को निर्णायक दिशा में ले जाने की कोशिश में परिषदीय स्कूल के कुछ बच्चे यूनिफार्म पहनकर शिक्षामित्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए, जिनके साथ अभिभावक भी थे। मंच से बच्चों ने समायोजित शिक्षामित्रों को वापस स्कूल भेजने की मांग की, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो। धरना स्थल पर ही आगे की रणनीति पर शिक्षामित्रों ने चर्चा के दौरान निर्णय लिया है कि सोमवार को सभी शिक्षामित्र स्थल पर एकत्र होने के बाद भाजपा विधायक और सांसद के कार्यालय पर जाकर ज्ञापन देंगे। इस दौरान सभी शिक्षामित्र भाजपा की टोपी भी लगाकर रैली भी निकालेंगे। अनशन को प्राथमिक शिक्षक संघ की पसगवां इकाई के अध्यक्ष पवन मिश्रा ने समर्थन देने का ऐलान किया है। अनशन को पारस वर्मा, अजय सिंह, गौरव शुक्ला, अरविंद मिश्रा, अखिलेश वर्मा, विशेष शर्मा, सर्वेश वर्मा ने भी संबोधित किया।
तो बढ़ेगी दोनों संगठनों के बीच तल्खी
शिक्षामित्रों ने रविवार को टीईटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला फूंकने के साथ ही गांवों में स्कूलों से दूर रहने की चेतावनी भी दे दी है। गांवों में अपना पक्ष मजबूत करने की नियत से बच्चों और अभिभावकों का समर्थन हासिल करने की कोशिशें तेज करते हुए शिक्षामित्रों ने धरने पर परिषदीय स्कूलों के बच्चों को भी बिठाकर रणनीति की ओर इशारा कर दिया है। वहीं टीईटी संघर्ष मोर्चा ने पूरे प्रकरण के दौरान रविवार को पहली बैठक कर अवैतनिक पढ़ाने का ऐलान कर दिया है, जिससे दोनों संगठनों के बीच तकरार बढ़ने के आसार बनने लगे हैं। क्योंकि सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक ग्रुपों में संदेश वायरल कर रहे हैं, जिसमें शिक्षामित्रों की ओर से टीईटी मोर्चा वालों को स्कूल से दूर रहने की चेतावनी सख्त लहजे में दी गई है। खासकर मारपीट करने की ओर इशारा किया गया है।
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शिक्षामित्रों को राहत का इंतजार
धरना स्थल पर शिक्षामित्र एक-दूसरे से अपने भविष्य को लेकर चिंतन-मनन करते देखे। खासकर प्रदेश सरकार की ओर से उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को वापस स्कूल जाकर शिक्षण कार्य शुरू करने का बयान मीडिया में दिया था, लेकिन अभी इस बाबत कोई शासनादेश जारी न होने से उहापोह की स्थिति भी बनी हुई है। मसलन अगर वह वापस विद्यालय जाकर शिक्षण कार्य शुरू करते हैं, तो वह किस हैसियत (पद) से काम करेंगे। उनका वेतन/ मानदेय कौन और कैसे देगा। जैसे कई सवाल मुंह बाएं खड़े हैं, जिनका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।
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परिषदीय स्कूलों के कुछ छात्र, अभिभावक भी प्रदर्शन में हुए शामिल
समायोजित शिक्षामित्रों ने पांचवें दिन भी क्रमिक अनशन जारी रखा, जिसे धार देने के लिए नई रणनीति बनाई जा रही हैै। रविवार को अनशन स्थल पर एकत्र होने के बाद उनके समायोजन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले टीईटी मोर्चा 2011 के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला गुरु गोविंद सिंह चौक पर फूंककर शिक्षामित्रों ने गुस्सा जताया है। इसमें परिषदीय स्कूलों के कुछ बच्चे और उनके अभिभावक भी शामिल हुए, जिन्होंने समायोजित शिक्षामित्रों से ही पढ़ाई कराए जाने की बात कहकर समर्थन जताने की कोशिश की है। वहीं सोशल मीडिया पर शिक्षामित्रों और टीईटी संघर्ष मोर्चा के बीच शब्दों के तीर चलाए जा रहे हैं।
बीएसए कार्यालय परिसर में संयुक्त समायोजित शिक्षक/ शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष संजय मिश्रा और राकेश सिंह के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने सरकार से रोजी-रोटी वापस दिलाने की मांग की। अध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, लेकिन शिक्षामित्रों को उनका हक और सम्मान वापस मिलना ही चाहिए। इसके लिए सरकार जब तक निर्णय नहीं लेती, तब तक अनवरत क्रमिक अनशन जारी रहेगा। शिक्षामित्रों ने अपना पक्ष और अधिक मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। लड़ाई को निर्णायक दिशा में ले जाने की कोशिश में परिषदीय स्कूल के कुछ बच्चे यूनिफार्म पहनकर शिक्षामित्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए, जिनके साथ अभिभावक भी थे। मंच से बच्चों ने समायोजित शिक्षामित्रों को वापस स्कूल भेजने की मांग की, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो। धरना स्थल पर ही आगे की रणनीति पर शिक्षामित्रों ने चर्चा के दौरान निर्णय लिया है कि सोमवार को सभी शिक्षामित्र स्थल पर एकत्र होने के बाद भाजपा विधायक और सांसद के कार्यालय पर जाकर ज्ञापन देंगे। इस दौरान सभी शिक्षामित्र भाजपा की टोपी भी लगाकर रैली भी निकालेंगे। अनशन को प्राथमिक शिक्षक संघ की पसगवां इकाई के अध्यक्ष पवन मिश्रा ने समर्थन देने का ऐलान किया है। अनशन को पारस वर्मा, अजय सिंह, गौरव शुक्ला, अरविंद मिश्रा, अखिलेश वर्मा, विशेष शर्मा, सर्वेश वर्मा ने भी संबोधित किया।
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तो बढ़ेगी दोनों संगठनों के बीच तल्खी
शिक्षामित्रों ने रविवार को टीईटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला फूंकने के साथ ही गांवों में स्कूलों से दूर रहने की चेतावनी भी दे दी है। गांवों में अपना पक्ष मजबूत करने की नियत से बच्चों और अभिभावकों का समर्थन हासिल करने की कोशिशें तेज करते हुए शिक्षामित्रों ने धरने पर परिषदीय स्कूलों के बच्चों को भी बिठाकर रणनीति की ओर इशारा कर दिया है। वहीं टीईटी संघर्ष मोर्चा ने पूरे प्रकरण के दौरान रविवार को पहली बैठक कर अवैतनिक पढ़ाने का ऐलान कर दिया है, जिससे दोनों संगठनों के बीच तकरार बढ़ने के आसार बनने लगे हैं। क्योंकि सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक ग्रुपों में संदेश वायरल कर रहे हैं, जिसमें शिक्षामित्रों की ओर से टीईटी मोर्चा वालों को स्कूल से दूर रहने की चेतावनी सख्त लहजे में दी गई है। खासकर मारपीट करने की ओर इशारा किया गया है।
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शिक्षामित्रों को राहत का इंतजार
धरना स्थल पर शिक्षामित्र एक-दूसरे से अपने भविष्य को लेकर चिंतन-मनन करते देखे। खासकर प्रदेश सरकार की ओर से उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को वापस स्कूल जाकर शिक्षण कार्य शुरू करने का बयान मीडिया में दिया था, लेकिन अभी इस बाबत कोई शासनादेश जारी न होने से उहापोह की स्थिति भी बनी हुई है। मसलन अगर वह वापस विद्यालय जाकर शिक्षण कार्य शुरू करते हैं, तो वह किस हैसियत (पद) से काम करेंगे। उनका वेतन/ मानदेय कौन और कैसे देगा। जैसे कई सवाल मुंह बाएं खड़े हैं, जिनका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।