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बाइक को कार बनाकर, पूरा परिवार हो गया सवार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 17 Feb 2018 07:09 PM IST
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family on bike
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दो सीट वाली बाइक पर चार-चार लोगों को सफर करते लखीमपुर में अक्सर देखा जा सकता है। उस पर गजब यह कि बाइक चालक हेलमेट लगाने की भी जहमत नहीं उठाते। गांव से खरीदारी करने के लिए शहर आना हो या फिर रिश्तेदारी में जाना हो तो लोग पत्नी और बच्चों को एक ही बाइक पर बैठाकर चल देते हैं। अधिकांश होने वाली दुर्घटनाओं में ट्रिपल राइडिंग के मामले सामने आते हैं। इसके बाद भी लोग नहीं चेत रहे हैं। ट्रिपल राइडिंग के दौरान स्पीड ब्रेकर और इमरजेंसी में ब्रेक लगाने पर बाइक अनियंत्रित हो जाती है, जिससे अक्सर हादसे होते हैं और लोग असमय ही काल के गाल में समा जाते है। खास बात यह है कि परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस भी ऐसी प्रवृति को लेकर संजीदा नहीं है।
पेश है एक लाइव रिपोर्ट-
सीन एक
स्थान: मेला मैदान रोड
यह दृश्य मेला मैदान रोड का है। यह साहब परिवार के दो बच्चों और एक महिला के साथ बाइक से सफर कर रहे हैं। इन्हें अपनी और परिवार के जान की परवाह नहीं है और न ही कानून का भय है। बिना हेलमेट फर्राटा भरते हुए जा रहे इनको रोकने-टोकने वाला भी नहीं है। जरा सी चूक कभी भी ऐसे लोगों पर भारी पड़ती है। फिर उनके पास पछतावे के अलावा कुछ भी बाकी नहीं बचता है।
सीन दो
स्थान: संकटा देवी चौराहा
यह सीन संकटा देवी चौराहे का है। यहां पर पुलिस चौकी भी है। इस चौराहे से सीतापुर, गोला, निघासन, पलिया आदि स्थानों को छोटे-बड़े वाहन आते-जाते हैं। बिना हेलमेट फर्राटा भर रहे बाइक चालक ने बच्चों और महिला को बैठा रखा है। हेलमेट लगाने की जगह उसे बैग के ऊपर बांध रखा है। जान जोखिम में डालकर फर्राटा भरते चले जा रहे हैं।
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सीन: तीन
स्थान: स्टेशन रोड
अमूमन शहर की सभी प्रमुख सड़कों और गलियों में ट्रिपल राइडिंग देखने को मिलती है। यह दृश्य स्टेशन रोड का हैं। यह साहब मासूम बच्चे को बाइक की टंकी पर बिठाए हैं। खुद भी हेलमेट नहीं पहने हैं। इन्हें न तो अपनी जान की परवाह है और न ही बच्चों की। जहां जगह मिली, आड़े-तिरछी बाइक कर बस निकालते ही जा रहे हैं।
सीन: चार
स्थान: स्टेशन रोड
स्टेशन रोड पर ओवरब्रिज के पास से गुजर रही बाइक पर दंपति और उसके दो पुत्र सवार हैं। बाइक की टंकी पर बैठे मासूम को ऐेसा बैठाया है कि यदि अचानक हैंडिल किसी भी दिशा में मोड़ना पड़ जाए तो बाइक अनियंत्रित होने से कोई नहीं बचा सकता। जान भी जोखिम में पड़ सकती है, लेकिन इन साहब को इससे कोई मतलब नहीं दिख रहा है।
सीट दो पर बैठते हैं चार से पांच लोग
बाइक पर दो लोगों के बैठने की सीट होती है, लेकिन इस पर तीन नहीं चार से पांच लोग तक बैठकर चल रहे हैं। थोड़ी दूर के लिए नहीं बल्कि बाइक चालक गांव से शहर तक आने के लिए लंबी दूरी में भी परिवार को एक ही बाइक पर बैठाने से गुरेज नहीं करते हैं।
जा चुकी हैं एक ही परिवार के कई लोगों की जानें
पिछले साल फूलबेहड़, पीलीभीत-बस्ती हाईवे सहित कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें बाइक सवार एक ही परिवार से एक से अधिक लोगों की साथ जाने चलीं गईं, लेकिन इसके बाद भी लोग नियमों को लेकर जागरुक नहीं हो रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस भी फेर लेती है आंखे
अक्सर कुछ लोग परिवार की जान की परवाह नहीं करते। एक बाइक पर पत्नी और बच्चों के साथ सवार होकर वह भी बिना हेलमेट सफर करते हैं। इतना ही नहीं बाइक की पेट्रोल टंकी पर बैग लादने से भी गुरेज नहीं करते। इन्हें पुलिस की कार्रवाई का भी डर नहीं सताता है। वहीं, पुलिस भी देखने के बाद भी मुंह फेर लेती है।
250 से अधिक हो चुके हैं चालान
ट्रिपल राइडिंग को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाता है और कार्रवाई भी करता है, लेकिन लोग अर्थदंड पड़ने और दुर्घटना होने पर भी सबक नहीं लेते हैं। पुलिस के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो पिछले साल ट्रिपल राइडिंग में पुलिस 250 से अधिक बाइकों का चालान कर चुकी है। जनवरी से अब तक 63 चालान हुए हैं।
ट्रिपल राइडिंग और हेलमेट को लेकर आए दिन अभियान चलाया जाता है। बाइकों का चालान किया जाया है। इधर, ट्रिपल राइडिंग के मामलों में काफी कमी आई है। पब्लिक जब तक स्वयं जागरुक नहीं होगी तब तक ट्रिपिल राइडिंग जैसी समस्या पर पूरी तरह अंकुश लग पाना संभव नहीं हैं।
आरके वर्मा, सीओ सिटी
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पेश है एक लाइव रिपोर्ट-
सीन एक
स्थान: मेला मैदान रोड
यह दृश्य मेला मैदान रोड का है। यह साहब परिवार के दो बच्चों और एक महिला के साथ बाइक से सफर कर रहे हैं। इन्हें अपनी और परिवार के जान की परवाह नहीं है और न ही कानून का भय है। बिना हेलमेट फर्राटा भरते हुए जा रहे इनको रोकने-टोकने वाला भी नहीं है। जरा सी चूक कभी भी ऐसे लोगों पर भारी पड़ती है। फिर उनके पास पछतावे के अलावा कुछ भी बाकी नहीं बचता है।
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सीन दो
स्थान: संकटा देवी चौराहा
यह सीन संकटा देवी चौराहे का है। यहां पर पुलिस चौकी भी है। इस चौराहे से सीतापुर, गोला, निघासन, पलिया आदि स्थानों को छोटे-बड़े वाहन आते-जाते हैं। बिना हेलमेट फर्राटा भर रहे बाइक चालक ने बच्चों और महिला को बैठा रखा है। हेलमेट लगाने की जगह उसे बैग के ऊपर बांध रखा है। जान जोखिम में डालकर फर्राटा भरते चले जा रहे हैं।
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सीन: तीन
स्थान: स्टेशन रोड
अमूमन शहर की सभी प्रमुख सड़कों और गलियों में ट्रिपल राइडिंग देखने को मिलती है। यह दृश्य स्टेशन रोड का हैं। यह साहब मासूम बच्चे को बाइक की टंकी पर बिठाए हैं। खुद भी हेलमेट नहीं पहने हैं। इन्हें न तो अपनी जान की परवाह है और न ही बच्चों की। जहां जगह मिली, आड़े-तिरछी बाइक कर बस निकालते ही जा रहे हैं।
सीन: चार
स्थान: स्टेशन रोड
स्टेशन रोड पर ओवरब्रिज के पास से गुजर रही बाइक पर दंपति और उसके दो पुत्र सवार हैं। बाइक की टंकी पर बैठे मासूम को ऐेसा बैठाया है कि यदि अचानक हैंडिल किसी भी दिशा में मोड़ना पड़ जाए तो बाइक अनियंत्रित होने से कोई नहीं बचा सकता। जान भी जोखिम में पड़ सकती है, लेकिन इन साहब को इससे कोई मतलब नहीं दिख रहा है।
सीट दो पर बैठते हैं चार से पांच लोग
बाइक पर दो लोगों के बैठने की सीट होती है, लेकिन इस पर तीन नहीं चार से पांच लोग तक बैठकर चल रहे हैं। थोड़ी दूर के लिए नहीं बल्कि बाइक चालक गांव से शहर तक आने के लिए लंबी दूरी में भी परिवार को एक ही बाइक पर बैठाने से गुरेज नहीं करते हैं।
जा चुकी हैं एक ही परिवार के कई लोगों की जानें
पिछले साल फूलबेहड़, पीलीभीत-बस्ती हाईवे सहित कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें बाइक सवार एक ही परिवार से एक से अधिक लोगों की साथ जाने चलीं गईं, लेकिन इसके बाद भी लोग नियमों को लेकर जागरुक नहीं हो रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस भी फेर लेती है आंखे
अक्सर कुछ लोग परिवार की जान की परवाह नहीं करते। एक बाइक पर पत्नी और बच्चों के साथ सवार होकर वह भी बिना हेलमेट सफर करते हैं। इतना ही नहीं बाइक की पेट्रोल टंकी पर बैग लादने से भी गुरेज नहीं करते। इन्हें पुलिस की कार्रवाई का भी डर नहीं सताता है। वहीं, पुलिस भी देखने के बाद भी मुंह फेर लेती है।
250 से अधिक हो चुके हैं चालान
ट्रिपल राइडिंग को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाता है और कार्रवाई भी करता है, लेकिन लोग अर्थदंड पड़ने और दुर्घटना होने पर भी सबक नहीं लेते हैं। पुलिस के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो पिछले साल ट्रिपल राइडिंग में पुलिस 250 से अधिक बाइकों का चालान कर चुकी है। जनवरी से अब तक 63 चालान हुए हैं।
ट्रिपल राइडिंग और हेलमेट को लेकर आए दिन अभियान चलाया जाता है। बाइकों का चालान किया जाया है। इधर, ट्रिपल राइडिंग के मामलों में काफी कमी आई है। पब्लिक जब तक स्वयं जागरुक नहीं होगी तब तक ट्रिपिल राइडिंग जैसी समस्या पर पूरी तरह अंकुश लग पाना संभव नहीं हैं।
आरके वर्मा, सीओ सिटी