{"_id":"586b9ed14f1c1ba378158fd5","slug":"before-consolidation-officer-the-villagers-protest","type":"story","status":"publish","title_hn":"चकबंदी अधिकारी के सामने ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चकबंदी अधिकारी के सामने ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो मोहम्मदी।
Updated Tue, 03 Jan 2017 11:17 PM IST
विज्ञापन
आत्महत्या की धमकी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चकबंदी निरस्त करने की मांग, ऐसा न होने पर दी आत्महत्या की धमकी
तहसील क्षेत्र के गांव गोकन में चकबंदी में हो रही धांधली के चलते ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गांव की बैठक में चकबंदी अधिकारी के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। चकबंदी निरस्त करने की मांग की। मांग न माने जाने पर आत्महत्या की धमकी दी।
चकबंदी को लेकर हो रहे व्यापक घोटाले की शिकायत शपथ पत्र देकर सैकड़ों ग्रामीणों ने डीएम खीरी से 23 नवंबर 2016 को की थी। मंगलवार को चकबंदी के सीओ राकेश खन्ना, लेखपाल नरेश चंद्र, वीडीओ अरुण कुुमार आदि गांव पहुंचे। जहां इन लोगों को सैकड़ों ग्रामीणों का कोपभाजन बनना पड़ा।
आरोप है कि गोकन में एक साल से चकबंदी हो रही है। जिसमें दलाल और चकबंदी अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। सैकड़ों ग्रामीणों को चकबंदी विभाग ने बर्बाद कर दिया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने चकबंदी अधिकारियों के सामने जो तथ्य रखे, उनमें गांव के मुकेश, रामनाथ, गयाप्रसाद, प्रभूदयाल, श्यामावती, माताप्रसाद, सूबेदार, राजकुमार, नेतराम जैसे 126 लोगों की भूमि को कुछ खास लोगों को देकर इन्हें जलप्लावित झावर में जमीन आवंटित करने की बात की गई। कुछ किसानों के बोरिंग न दर्शाकर उन्हें दूसरों के गाटा संख्या में दर्ज करने की बात रखी।
जब जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने तथ्यों को सही पाया। जांच अधिकारी ने गांव में हो रही चकबंदी के निरस्तीकरण का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए।
प्रधान पति नरसिंह ने भी कहा कि चकबंदी अधिकारी और दलाल मिलकर किसानों के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं, जिसका विरोध आखिरी दम तक किया जाएगा।
विज्ञापन
तहसील क्षेत्र के गांव गोकन में चकबंदी में हो रही धांधली के चलते ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गांव की बैठक में चकबंदी अधिकारी के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। चकबंदी निरस्त करने की मांग की। मांग न माने जाने पर आत्महत्या की धमकी दी।
चकबंदी को लेकर हो रहे व्यापक घोटाले की शिकायत शपथ पत्र देकर सैकड़ों ग्रामीणों ने डीएम खीरी से 23 नवंबर 2016 को की थी। मंगलवार को चकबंदी के सीओ राकेश खन्ना, लेखपाल नरेश चंद्र, वीडीओ अरुण कुुमार आदि गांव पहुंचे। जहां इन लोगों को सैकड़ों ग्रामीणों का कोपभाजन बनना पड़ा।
विज्ञापन
आरोप है कि गोकन में एक साल से चकबंदी हो रही है। जिसमें दलाल और चकबंदी अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। सैकड़ों ग्रामीणों को चकबंदी विभाग ने बर्बाद कर दिया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने चकबंदी अधिकारियों के सामने जो तथ्य रखे, उनमें गांव के मुकेश, रामनाथ, गयाप्रसाद, प्रभूदयाल, श्यामावती, माताप्रसाद, सूबेदार, राजकुमार, नेतराम जैसे 126 लोगों की भूमि को कुछ खास लोगों को देकर इन्हें जलप्लावित झावर में जमीन आवंटित करने की बात की गई। कुछ किसानों के बोरिंग न दर्शाकर उन्हें दूसरों के गाटा संख्या में दर्ज करने की बात रखी।
जब जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने तथ्यों को सही पाया। जांच अधिकारी ने गांव में हो रही चकबंदी के निरस्तीकरण का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए।
प्रधान पति नरसिंह ने भी कहा कि चकबंदी अधिकारी और दलाल मिलकर किसानों के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं, जिसका विरोध आखिरी दम तक किया जाएगा।