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तटबंद पर खुद ही बना दिया बांस-बल्ली का पुल
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मिलपुरवा के लोगों ने नदी पार करने को बनाया बांस का पुल। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
सुंदरवल। थाना फूलबेहड़ में मिलपुरवा शारदा तटबंध पर खगईपुरवा गांव को जाने वाले रास्ते पर अरसे से रपटा पुल टूटा पड़ा है। इससे खासतौर पर बुजुर्गों को आने-जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। सरकारी सिस्टम और जन प्रतिनिधियों के ध्यान न देने से थक चुके ग्रामीणों ने खुद ही बांस बल्ली से अस्थायी पुल तैयार किया है। अब इसी पुल से लोग आते जाते हैं।
ग्राम पंचायत श्रीनगर के मजरा खगईपुरवा गांव को आने जाने के लिए शारदा तटबंध पर 2005 में रपटा पुल बनाया गया था। पुल बनने से ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल गई। नाव का सहारा छूट गया। आठ वर्ष पूर्व आई भीषण बाढ़ में रपटा पुल धराशाई हो गया। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ र्गइं। नाव के सहारे या फिर तैरकर तटबंध को पार करना मजबूरी हो गई। ऐसे में ग्रामीणों ने एकजुट होकर बांस-बल्ली का अस्थायी पुल तैयार किया है। इस अस्थायी पुल से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर निकल रहे है। गांव के ओमकार पाल, विनोद कुमार, स्वामी दयाल, राम सिंह, कपिल कुमार, राममूर्ति पाल, राकेश कुमार, डालचंद, कामता प्रसाद आदि ने बताया कि गांव की एक हजार से ज्यादा आबादी है। वहीं पांच सौ वोटर है। गांव में प्राइमरी स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए श्रीनगर व फूलबेहड़ आदि के स्कूल कॉलेजों में बच्चे इसी पुल से निकलकर पढ़ने जाते हैं। अध्यापकों का भी इसी पुल से आना-जाना होता है। बच्चों के भविष्य की खातिर जान जोखिम में डालकर भेजना मजबूरी है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर अधिकारियों से पुल बनवाने की मांग की, लेकिन सभी आश्वासन देकर चले गए। ऐसे में अब यह अस्थायी पुल ही साथ दे रहा है।
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ग्राम पंचायत श्रीनगर के मजरा खगईपुरवा गांव को आने जाने के लिए शारदा तटबंध पर 2005 में रपटा पुल बनाया गया था। पुल बनने से ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल गई। नाव का सहारा छूट गया। आठ वर्ष पूर्व आई भीषण बाढ़ में रपटा पुल धराशाई हो गया। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ र्गइं। नाव के सहारे या फिर तैरकर तटबंध को पार करना मजबूरी हो गई। ऐसे में ग्रामीणों ने एकजुट होकर बांस-बल्ली का अस्थायी पुल तैयार किया है। इस अस्थायी पुल से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर निकल रहे है। गांव के ओमकार पाल, विनोद कुमार, स्वामी दयाल, राम सिंह, कपिल कुमार, राममूर्ति पाल, राकेश कुमार, डालचंद, कामता प्रसाद आदि ने बताया कि गांव की एक हजार से ज्यादा आबादी है। वहीं पांच सौ वोटर है। गांव में प्राइमरी स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए श्रीनगर व फूलबेहड़ आदि के स्कूल कॉलेजों में बच्चे इसी पुल से निकलकर पढ़ने जाते हैं। अध्यापकों का भी इसी पुल से आना-जाना होता है। बच्चों के भविष्य की खातिर जान जोखिम में डालकर भेजना मजबूरी है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर अधिकारियों से पुल बनवाने की मांग की, लेकिन सभी आश्वासन देकर चले गए। ऐसे में अब यह अस्थायी पुल ही साथ दे रहा है।
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