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सर्दियां शुरू होते ही गन्ने के खेतों में आए बाघ
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 21 Nov 2015 07:16 PM IST
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सर्दियां शुरू होते ही कई बाघों ने जंगलों के बाहर निकलकर गन्ने के खेतों में डेरा जमा लिया है। आबादी के निकट गन्ने के खेतों में बाघों के दिखने से ग्रामीणों में दहशत है। कई जगह तो लोग खेतों में जाने से भी डर रहे हैं। इस बार तो बाघ ऐसे इलाकों में देखे जा रहे हैं जहां दूर-दूर तक जंगल भी नहीं हैं।
पिछले दिनों मितौली के पास रास्ते के किनारे बाघिन को देख एक चालक अपना ट्रैक्टर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ। बाधिन के साथ उसके शावक भी थे। तीन दिनों तक बाघिन मितौली कस्बे से कुछ ही दूरी पर स्थित गन्ने के खेतों में डेरा डाले रही। वन विभाग की टीम ने बाघिन की तलाश में गन्ने के खेतों की खाक छानी लेकिन टीम बाघिन के दर्शन नहीं पा सकी। बाद में वन विभाग ने दावा किया कि बाघिन के जंगल की ओर वापसी के संकेत मिले हैं।
सिकंद्राबाद के आसपास दिखे बाघिन और शावक के पगमार्क
सिंकंद्राबाद। सिकंद्राबाद के मजरा नजीमाबाद में दो दिन पहले तालाब के किनारे बाघिन और शावक के पगमार्क मिलने से सनसनी फैल गई। अगले दिन बाघिन के पगमार्क सिंकंद्राबाद से कस्ता जाने वाली रोड के किनारे दिखने से दहशत फैल गई। इस क्षेत्र में लोग अकेले खेतों में जाने से डर रहे हैं। सूरज डूबते ही बाजार में सन्नाटा छा जाता है। ग्रामीणों की सूचना पर मोहम्मदी रेंज की आंवला बीट से संबद्ध वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पगमार्क देखकर बाघिन होने की पुष्टि की। वन रक्षक उमेश वर्मा ने बताया कि पगमार्क देखने से लगता है कि बाघिन नदी किनारे की ओर बढ़ रही है।
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गन्ने के खेत में बाघिन ने शावक को जन्म दिया
गुलरिया। उत्तर खीरी वन प्रभाग की रायपुर बीट में गोंधिया गांव के निकट बाघिन ने गन्ने के खेत में एक शावक को जन्म दिया है। यहां जंगल के किनारे सोबरन सिंह का झाला है। झाले के पास ही उनके खेत हैं। इसी खेत में एक बाघिन ने बच्चे को जन्म दिया। शुक्रवार शाम गोधिया निवासी शंभू दयाल समेत कई लोगों ने बाघिन को देखा तो उनके होश उड़ गए। बाघिन अपने शावक के साथ चहलकदमी कर रही थी। वन रक्षक बीएन शुक्ला ने बाघिन के जंगल की ओर लौटने की पुष्टि की है।
बाघ ने नीलगाय का किया शिकार
संसारपुर। मैलानी थाना क्षेत्र में भरिगवां जंगल से बाहर निकले बाघ ने गांव असौवा में नीलगाय का शिकार किया है। खेतों में पगचिह्न मिलने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
असौवा गांव के पूरब में कालीचरन के गन्ने के खेत में गांव के लोग जब गन्ना छिलाई करने गए तो उन्होंने नीलगाय का आधा खाया हुआ धड़ देखा, आनन फानन में गांव के लोगों को खबर मिली, उन्होंने देखा कि पास ही मेवाराम के मसूर के खेत में बाघ के पगचिह्न बने हैं। जंगल के निकट गांव होने के कारण लोग घबरा गए हैं। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर भरिगवां जंगल में बाघ के आने की पुष्टि की है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहकर खेतों में काम करने की सलाह दी है।
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पिछले दिनों मितौली के पास रास्ते के किनारे बाघिन को देख एक चालक अपना ट्रैक्टर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ। बाधिन के साथ उसके शावक भी थे। तीन दिनों तक बाघिन मितौली कस्बे से कुछ ही दूरी पर स्थित गन्ने के खेतों में डेरा डाले रही। वन विभाग की टीम ने बाघिन की तलाश में गन्ने के खेतों की खाक छानी लेकिन टीम बाघिन के दर्शन नहीं पा सकी। बाद में वन विभाग ने दावा किया कि बाघिन के जंगल की ओर वापसी के संकेत मिले हैं।
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सिकंद्राबाद के आसपास दिखे बाघिन और शावक के पगमार्क
सिंकंद्राबाद। सिकंद्राबाद के मजरा नजीमाबाद में दो दिन पहले तालाब के किनारे बाघिन और शावक के पगमार्क मिलने से सनसनी फैल गई। अगले दिन बाघिन के पगमार्क सिंकंद्राबाद से कस्ता जाने वाली रोड के किनारे दिखने से दहशत फैल गई। इस क्षेत्र में लोग अकेले खेतों में जाने से डर रहे हैं। सूरज डूबते ही बाजार में सन्नाटा छा जाता है। ग्रामीणों की सूचना पर मोहम्मदी रेंज की आंवला बीट से संबद्ध वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पगमार्क देखकर बाघिन होने की पुष्टि की। वन रक्षक उमेश वर्मा ने बताया कि पगमार्क देखने से लगता है कि बाघिन नदी किनारे की ओर बढ़ रही है।
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गन्ने के खेत में बाघिन ने शावक को जन्म दिया
गुलरिया। उत्तर खीरी वन प्रभाग की रायपुर बीट में गोंधिया गांव के निकट बाघिन ने गन्ने के खेत में एक शावक को जन्म दिया है। यहां जंगल के किनारे सोबरन सिंह का झाला है। झाले के पास ही उनके खेत हैं। इसी खेत में एक बाघिन ने बच्चे को जन्म दिया। शुक्रवार शाम गोधिया निवासी शंभू दयाल समेत कई लोगों ने बाघिन को देखा तो उनके होश उड़ गए। बाघिन अपने शावक के साथ चहलकदमी कर रही थी। वन रक्षक बीएन शुक्ला ने बाघिन के जंगल की ओर लौटने की पुष्टि की है।
बाघ ने नीलगाय का किया शिकार
संसारपुर। मैलानी थाना क्षेत्र में भरिगवां जंगल से बाहर निकले बाघ ने गांव असौवा में नीलगाय का शिकार किया है। खेतों में पगचिह्न मिलने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
असौवा गांव के पूरब में कालीचरन के गन्ने के खेत में गांव के लोग जब गन्ना छिलाई करने गए तो उन्होंने नीलगाय का आधा खाया हुआ धड़ देखा, आनन फानन में गांव के लोगों को खबर मिली, उन्होंने देखा कि पास ही मेवाराम के मसूर के खेत में बाघ के पगचिह्न बने हैं। जंगल के निकट गांव होने के कारण लोग घबरा गए हैं। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर भरिगवां जंगल में बाघ के आने की पुष्टि की है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहकर खेतों में काम करने की सलाह दी है।