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Lakhimpur Kheri News: सड़क पर छुट्टा पशु... हादसों में जान गंवा रहे लोग
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ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर
लखीमपुर खीरी। जिले में 106 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, फिर भी छुट्टा पशु सड़क पर नजर आते हैं। लखीमपुर से सीतापुर, गोला, मितौली-मैगलगंज, धौरहरा व पलिया सभी मार्गों पर सुबह से रात तक बैठे दिखते हैं। सड़क पर डेरा जमाए छुट्टा पशु हादसे का कारण बनते हैं। तीस दिन में करीब 15 लोगों की मौत छुट्टा पशुओं के कारण हुए हादसों में हो चुकी है।
जिले में अस्थायी, बृहद गो-आश्रय स्थल, नगर पालिका, नगर पंचायत व कान्हा उपवन मिलाकर 106 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें सबसे अधिक 92 अस्थायी गो-आश्रय स्थल हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार, इन गो-आश्रय स्थलों में 29247 छुट्टा पशु संरक्षित किए गए हैं। हालांकि, पशुपालन विभाग के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है। जिले की सड़कों, कस्बों और गांवों में करीब तीन हजार छुट्टा पशु घूम रहे हैं। आखिर इन जानवरों के संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी है, शहर और नगर पंचायतों की सड़कों पर भटकते पशुओं को संरक्षित क्यों नहीं किया जा रहा, यह बड़ा सवाल है।
14 किमी की दूरी में 15 से अधिक स्थानों पर छुट्टा पशु
लखीमपुर-सीतापुर रोड पर एलआरपी चौराहे पर से ओयल कस्बे की दूरी 14 किलोमीटर है। एलआरपी से ओयल तक 15 से अधिक जगहों पर छुट्टा पशु सड़क पर बैठे नजर आते हैं। ओयल कस्बे में ही करीब 50 पशु सड़क पर बैठे दिखते हैं। सीतापुर की सीमा पर भी जानवरों का झुंड सड़क पर नजर आता है।
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मैगलगंज रोड पर जगह-जगह दिखते हैं पशु
मितौली। लखीमपुर से मितौली-मैगलगंज रोड पर जगह-जगह बेसहारा जानवर सड़क पर बैठे नजर आते हैं। बेहजम चौराहा, गौरिया, अछनीया, लालनपुर तिराहा, कचियानी मोड़, भीखमपुर, औरंगाबाद व मैगलगंज में बेसहारा जानवरों को बसेरा मुख्य मार्ग पर दिखता है। इसके अलावा कस्ता चौराहा, रतहरी, फत्तेपुर, चपरतला में भी बेसहारा जानवर सड़क पर नजर आते हैं।
आमजन और पशु गवां रहे जान
केस-एक : सोमवार की रात अज्ञात वाहन ने लखीमपुर-मैगलगंज रोड पर कचियानी मोड़ के पास करीब 12 बेसहारा पशुओं को रौंद दिया। हादसे में छह गोवंशों की मौत हो गई। घायल छह गोवंशों का पशु चिकित्सकों ने इलाज किया। इस स्थान पर प्रतिदिन जानवरों का झुंड नजर आता है।
केस-दो : दो दिन पहले नीमगांव के उमरिया निवासी पुनीत कुमार बाइक से वापस घर आ रहा था। कस्ता-भीखमपुर रोड पर बरौला फार्म के पास सांड़ से टकरा गया। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि इस हादसे में सांड़ की जान भी चली गई।
31 अक्टूबर तक संरक्षित नहीं किए जाएंगे पशु
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमदेव सिंह चौहान ने बताया कि जिले में 106 गो-आश्रय स्थलों में 29245 गोवंश संरक्षित हैं। लंबी बीमारी की वजह से 14 सितंबर से 31 अक्टूबर तक नए गोवंशों को आश्रय स्थलों में संरक्षित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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जिले में अस्थायी, बृहद गो-आश्रय स्थल, नगर पालिका, नगर पंचायत व कान्हा उपवन मिलाकर 106 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें सबसे अधिक 92 अस्थायी गो-आश्रय स्थल हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार, इन गो-आश्रय स्थलों में 29247 छुट्टा पशु संरक्षित किए गए हैं। हालांकि, पशुपालन विभाग के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है। जिले की सड़कों, कस्बों और गांवों में करीब तीन हजार छुट्टा पशु घूम रहे हैं। आखिर इन जानवरों के संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी है, शहर और नगर पंचायतों की सड़कों पर भटकते पशुओं को संरक्षित क्यों नहीं किया जा रहा, यह बड़ा सवाल है।
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14 किमी की दूरी में 15 से अधिक स्थानों पर छुट्टा पशु
लखीमपुर-सीतापुर रोड पर एलआरपी चौराहे पर से ओयल कस्बे की दूरी 14 किलोमीटर है। एलआरपी से ओयल तक 15 से अधिक जगहों पर छुट्टा पशु सड़क पर बैठे नजर आते हैं। ओयल कस्बे में ही करीब 50 पशु सड़क पर बैठे दिखते हैं। सीतापुर की सीमा पर भी जानवरों का झुंड सड़क पर नजर आता है।
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मैगलगंज रोड पर जगह-जगह दिखते हैं पशु
मितौली। लखीमपुर से मितौली-मैगलगंज रोड पर जगह-जगह बेसहारा जानवर सड़क पर बैठे नजर आते हैं। बेहजम चौराहा, गौरिया, अछनीया, लालनपुर तिराहा, कचियानी मोड़, भीखमपुर, औरंगाबाद व मैगलगंज में बेसहारा जानवरों को बसेरा मुख्य मार्ग पर दिखता है। इसके अलावा कस्ता चौराहा, रतहरी, फत्तेपुर, चपरतला में भी बेसहारा जानवर सड़क पर नजर आते हैं।
आमजन और पशु गवां रहे जान
केस-एक : सोमवार की रात अज्ञात वाहन ने लखीमपुर-मैगलगंज रोड पर कचियानी मोड़ के पास करीब 12 बेसहारा पशुओं को रौंद दिया। हादसे में छह गोवंशों की मौत हो गई। घायल छह गोवंशों का पशु चिकित्सकों ने इलाज किया। इस स्थान पर प्रतिदिन जानवरों का झुंड नजर आता है।
केस-दो : दो दिन पहले नीमगांव के उमरिया निवासी पुनीत कुमार बाइक से वापस घर आ रहा था। कस्ता-भीखमपुर रोड पर बरौला फार्म के पास सांड़ से टकरा गया। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि इस हादसे में सांड़ की जान भी चली गई।
31 अक्टूबर तक संरक्षित नहीं किए जाएंगे पशु
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमदेव सिंह चौहान ने बताया कि जिले में 106 गो-आश्रय स्थलों में 29245 गोवंश संरक्षित हैं। लंबी बीमारी की वजह से 14 सितंबर से 31 अक्टूबर तक नए गोवंशों को आश्रय स्थलों में संरक्षित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर

ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर

ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर

ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर

ओयल कस्बे में रात के समय सीतापुर रोड पर खड़े बेसहारा जानवर