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... और सूना ही रहा दुधवा पार्क
पलियाकलां
Updated Thu, 17 Dec 2015 07:46 PM IST
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दुधवा नेशनल पार्क में बृहस्पतिवार की दोपहर में पर्यटन द्वार में पड़े तालों को खोलकर उसे शुरू भले ही कर दिया गया लेकिन करीब डेढ़ दिन चले आंदोलन के कारण पर्यटन परिसर सूना ही रहा। विवाद और हड़ताल की खबरों के कारण दूरदराज के सैलानियों में जो खबर फैली थी उसका असर यह रहा कि यहां कोई सैलानी बृहस्पतिवार को नहीं आया। कहने को यह डेढ़ दिन की हड़ताल थी लेकिन पर्यटन के लिए यह पूरे दो दिन की साबित हुई।
डीएम पर दुधवा नेशनल पार्क के कर्मियों ने कई आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से उनके तबादले की मांग की थी। उनके मुताबिक इस पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र भेज कर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई थी और इसमें डीएम का तबादला 15 दिसंबर तक न होने पर 16 दिसंबर से हड़ताल का ऐलान किया था। इसी ऐलान के तहत उन्होंने 16 दिसंबर को दुधवा के मुख्य द्वार समेत पर्यटन द्वार पर ताला जड़ दिया। इस कारण यहां ठहरे करीब 50 से ज्यादा सैलानियों को मायूस होकर जाना पड़ा। बृहस्पतिवार को जब फेडरेशन ऑफ फारेस्ट, फारेस्ट मिनिस्ट्रीरियल एसोसिएशन, वन रक्षक संघ, वाहन चालक संघ के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारी यहां पहुंचे तो उनकी आंदोलनकारी कर्मियों से वार्ता हुई। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे कर्मियों ने पर्यटन द्वार का ताला खोल दिया। पर्यटन शुरू हो गया लेकिन आंदोलन की आंच के चलते यहां कोई भी सैलानी नहीं आया।
जांच के फैसले से आंदोलन स्थगित
फेडरेशन ऑफ फारेस्ट, वन रक्षक संघ, फारेस्ट मिनिस्ट्रीरियल एसोसिएशन, वाहन चालक संघ, उत्तर प्रदेश सहायक वनकर्मी संघ आदि के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने कहा कि आंदोलन का यह स्थगन निर्णय किसी दबाव के चलते नहीं किया गया है, बल्कि शासन द्वारा मामले को संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच अपर प्रमुख वन संरक्षक को सौंपे जाने के तहत किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले में जल्द ही कोई निर्णय होगा। लखनऊ से उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक उमेश चंद तिवारी, महासचिव शैलेंद्र प्रताप सिंह, बरेली मंडल अध्यक्ष कैलाश बाबू, उत्तर प्रदेश वन रक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद, प्रदेश संयुक्त मंत्री रविकांत वर्मा, खीरी के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, फारेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन खीरी के जिलाध्यक्ष मुकुल वर्मा, सहायक वन कर्मचारी संघ खीरी के जिलाध्यक्ष शीतला प्रसाद, महामंत्री मुशीर अहमद, राज्य कर्मचारी संघ खीरी के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र, वन वाहन चालक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव आदि पदाधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय किसी भी जोर दबाव का परिणाम नहीं है बल्कि शासन के इस प्रकरण की जांच को अपर प्रमुख वन संरक्षक को सौंपे जाने का परिणाम है। मामले का निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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प्रशासन पर साजिश करने का आरोप
प्रदेश पदाधिकारियों ने जब जांच तक आंदोलन को स्थगित कराया तो स्थानीय कर्मचारियों ने उनसे प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पार्क कर्मी शांत होते हैं तो प्रशासन साजिश रचने का कार्य करता है। इसको लेकर उन्होंने कई बातें प्रदेश और जिला पदाधिकारियों से कहीं। इस पर प्रदेश पदाधिकारियों से वार्ता करने के लिए एसडीएम पीके सिंह, एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र कुमार आए। कुछ देर बाद एसडीएम गोला वीके गुप्ता भी यहां आ गए। यहां डीडी पीपी सिंह भी मौजूद रहे और सभी ने पूरे प्रकरण पर चर्चा की। यहां दोनों पक्षों में लिखित समझौता हुआ। पत्र पर पदाधिकारियों और एसडीएम ने हस्ताक्षर किए। हालांकि इस पत्र पर डीडी पीपी सिंह के कोई हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।
सपा नेता का मुकदमा न्यायालय में किया गया दाखिल
पलियाकलां। 16 दिसंबर को पर्यटन शुरू कराने की मांग को लेकर दुधवा पर्यटन परिसर के पास गौरीफंटा और चंदनचौकी तिराहे पर किए प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन के मामले में कई गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया मुकदमा न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।
पार्क प्रशासन ने 16 दिसंबर को सपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रेहान खान और ढाई सौ अज्ञात लोगों पर पार्क क्षेत्र में आयुद्य सामग्री ले जाने, अवैध प्रवेश, प्राकृतिक वास स्थल से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर धाराओं में वन्य जीव एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। दुधवा वन दरोगा रामकुमार ने बताया कि मुकदमे को न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।
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डीएम पर दुधवा नेशनल पार्क के कर्मियों ने कई आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से उनके तबादले की मांग की थी। उनके मुताबिक इस पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र भेज कर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई थी और इसमें डीएम का तबादला 15 दिसंबर तक न होने पर 16 दिसंबर से हड़ताल का ऐलान किया था। इसी ऐलान के तहत उन्होंने 16 दिसंबर को दुधवा के मुख्य द्वार समेत पर्यटन द्वार पर ताला जड़ दिया। इस कारण यहां ठहरे करीब 50 से ज्यादा सैलानियों को मायूस होकर जाना पड़ा। बृहस्पतिवार को जब फेडरेशन ऑफ फारेस्ट, फारेस्ट मिनिस्ट्रीरियल एसोसिएशन, वन रक्षक संघ, वाहन चालक संघ के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारी यहां पहुंचे तो उनकी आंदोलनकारी कर्मियों से वार्ता हुई। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे कर्मियों ने पर्यटन द्वार का ताला खोल दिया। पर्यटन शुरू हो गया लेकिन आंदोलन की आंच के चलते यहां कोई भी सैलानी नहीं आया।
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जांच के फैसले से आंदोलन स्थगित
फेडरेशन ऑफ फारेस्ट, वन रक्षक संघ, फारेस्ट मिनिस्ट्रीरियल एसोसिएशन, वाहन चालक संघ, उत्तर प्रदेश सहायक वनकर्मी संघ आदि के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने कहा कि आंदोलन का यह स्थगन निर्णय किसी दबाव के चलते नहीं किया गया है, बल्कि शासन द्वारा मामले को संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच अपर प्रमुख वन संरक्षक को सौंपे जाने के तहत किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले में जल्द ही कोई निर्णय होगा। लखनऊ से उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक उमेश चंद तिवारी, महासचिव शैलेंद्र प्रताप सिंह, बरेली मंडल अध्यक्ष कैलाश बाबू, उत्तर प्रदेश वन रक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद, प्रदेश संयुक्त मंत्री रविकांत वर्मा, खीरी के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, फारेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन खीरी के जिलाध्यक्ष मुकुल वर्मा, सहायक वन कर्मचारी संघ खीरी के जिलाध्यक्ष शीतला प्रसाद, महामंत्री मुशीर अहमद, राज्य कर्मचारी संघ खीरी के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र, वन वाहन चालक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव आदि पदाधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय किसी भी जोर दबाव का परिणाम नहीं है बल्कि शासन के इस प्रकरण की जांच को अपर प्रमुख वन संरक्षक को सौंपे जाने का परिणाम है। मामले का निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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प्रशासन पर साजिश करने का आरोप
प्रदेश पदाधिकारियों ने जब जांच तक आंदोलन को स्थगित कराया तो स्थानीय कर्मचारियों ने उनसे प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पार्क कर्मी शांत होते हैं तो प्रशासन साजिश रचने का कार्य करता है। इसको लेकर उन्होंने कई बातें प्रदेश और जिला पदाधिकारियों से कहीं। इस पर प्रदेश पदाधिकारियों से वार्ता करने के लिए एसडीएम पीके सिंह, एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र कुमार आए। कुछ देर बाद एसडीएम गोला वीके गुप्ता भी यहां आ गए। यहां डीडी पीपी सिंह भी मौजूद रहे और सभी ने पूरे प्रकरण पर चर्चा की। यहां दोनों पक्षों में लिखित समझौता हुआ। पत्र पर पदाधिकारियों और एसडीएम ने हस्ताक्षर किए। हालांकि इस पत्र पर डीडी पीपी सिंह के कोई हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।
सपा नेता का मुकदमा न्यायालय में किया गया दाखिल
पलियाकलां। 16 दिसंबर को पर्यटन शुरू कराने की मांग को लेकर दुधवा पर्यटन परिसर के पास गौरीफंटा और चंदनचौकी तिराहे पर किए प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन के मामले में कई गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया मुकदमा न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।
पार्क प्रशासन ने 16 दिसंबर को सपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रेहान खान और ढाई सौ अज्ञात लोगों पर पार्क क्षेत्र में आयुद्य सामग्री ले जाने, अवैध प्रवेश, प्राकृतिक वास स्थल से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर धाराओं में वन्य जीव एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। दुधवा वन दरोगा रामकुमार ने बताया कि मुकदमे को न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।