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खीरी में 37 हजार बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में
Lakhimpur
Updated Mon, 20 May 2013 05:31 AM IST
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लखीमपुर खीरी। देश का भविष्य कहे जाने वाले नौनिहाल, कुपोषण के खतरे से जूझ रहे हैं। बच्चों को कुपोषण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सरकार ने कई दशक पूर्व से योजनाएं संचालित की हैं, फिर भी कुपोषित बच्चों के आंकड़ों में सुधार नहीं हो पा रहा है। पहले पोषाहार, फिर हॉटकुक्ड देने की शुरूआत हुई, लेकिन बच्चों की सेहत सुधरने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों की सेहत सुधर रही है। इसकी बानगी यह है कि जिले के 36,645 बच्चे कुपोषित और 406 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी के पाए गए हैं।
बता दें कि बाल विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा जिले भर में 3503 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें 5,52,177 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं को पोषाहार और केंद्र पर बच्चों को हॉटकुक्ड देने का प्रावधान है। ताकि गरीब बच्चों को कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से दूर रखा जा सके। इसके लिए पोषाहार के तौर पर एमाइलेज तथा वीनिंग फूड वितरित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलता है। वहीं केंद्र पर आने वाले बच्चों को मिड डे मील की तर्ज पर हॉटकुक्ड देने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रतिमाह 1.17 करोड़ रुपये का बजट सभी आंगनबाड़ी केेंद्रों में बांटा जाता है। बच्चों की संख्या के आंकड़ों (अप्रैल 2013 के आंकड़े) पर गौर करें तो छह माह से तीन वर्ष तक 2,77,458 और तीन से छह वर्ष तक के 2,74,719 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 36,645 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं, जबकि 406 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में रखे गए हैं। अति कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि दिसंबर 2012 में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 274 तथा जनवरी 2013 में 282 थी। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पोषाहार और हॉटकुक्ड वितरण में अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
गड़बड़ियों के बावजूद अफसरों ने नियति मान साधी चुप्पी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पंजीकृत बच्चों के मुकाबले केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति काफी कम है। वहीं पुष्टाहार बच्चों के बजाय कालाबाजारी के जरिए पशुओं का निवाला बन रहा है। हाटकुक्ड भी महीने में कभी कभार दिया जाता है। इन मामलों का कई बार खुलासा भी हो चुका है, लेकिन अधिकारियों की शह पर यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। लिहाजा बच्चों में कुपोषण की दर घटने की बजाय बढ़ रही है।
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कुछ ब्लाकों में कुपोषण की समस्या ज्यादा है, जिसके संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। कुछ केंद्रों पर गड़बड़ियां मिलने पर कार्रवाई की गई थी। ज्यादा कुपोषित बच्चों वाले केंद्रों की समीक्षा कर जरूरी उपाय किए जाएंगे।
अरविंद रस्तोगी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बता दें कि बाल विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा जिले भर में 3503 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें 5,52,177 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं को पोषाहार और केंद्र पर बच्चों को हॉटकुक्ड देने का प्रावधान है। ताकि गरीब बच्चों को कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से दूर रखा जा सके। इसके लिए पोषाहार के तौर पर एमाइलेज तथा वीनिंग फूड वितरित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलता है। वहीं केंद्र पर आने वाले बच्चों को मिड डे मील की तर्ज पर हॉटकुक्ड देने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रतिमाह 1.17 करोड़ रुपये का बजट सभी आंगनबाड़ी केेंद्रों में बांटा जाता है। बच्चों की संख्या के आंकड़ों (अप्रैल 2013 के आंकड़े) पर गौर करें तो छह माह से तीन वर्ष तक 2,77,458 और तीन से छह वर्ष तक के 2,74,719 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 36,645 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं, जबकि 406 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में रखे गए हैं। अति कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि दिसंबर 2012 में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 274 तथा जनवरी 2013 में 282 थी। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पोषाहार और हॉटकुक्ड वितरण में अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
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गड़बड़ियों के बावजूद अफसरों ने नियति मान साधी चुप्पी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पंजीकृत बच्चों के मुकाबले केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति काफी कम है। वहीं पुष्टाहार बच्चों के बजाय कालाबाजारी के जरिए पशुओं का निवाला बन रहा है। हाटकुक्ड भी महीने में कभी कभार दिया जाता है। इन मामलों का कई बार खुलासा भी हो चुका है, लेकिन अधिकारियों की शह पर यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। लिहाजा बच्चों में कुपोषण की दर घटने की बजाय बढ़ रही है।
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कुछ ब्लाकों में कुपोषण की समस्या ज्यादा है, जिसके संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। कुछ केंद्रों पर गड़बड़ियां मिलने पर कार्रवाई की गई थी। ज्यादा कुपोषित बच्चों वाले केंद्रों की समीक्षा कर जरूरी उपाय किए जाएंगे।
अरविंद रस्तोगी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी