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बाघ ने गाय और बछड़े को बनाया निवाला
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे सोहनरा भूड़ गांव किनारे दिन-दहाड़े बाघ ने एक बछड़े पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। खेतों की रखवाली कर रहे लोगों के शोर मचाने पर बाघ जंगल में चला गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, मौके पर पहुंची वन कर्मियों की टीम को बछड़े का अध खाया शव पड़ा मिलने पर उन्होंने घटना की पुष्टि की है। वहीं वनरेंज मोहम्मदी महेेशपुर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह गांव सुंदरपुर और सरदार लाल सिंह के झाले के बीच खेतों में आए बाघ ने घास चर रही गाय पर हमला कर उसे भी अपना शिकार बना लिया।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे सोहनरा भूड़ गांव किनारे वन विभाग का कंपार्टमेंट एक एवं दो की सीमा पर सागौन और जामुन के पेड़ लगाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर कुकरा गांव निवासी मोहम्मद उमर अपने पालतू पशुओं को चराने ले गए थे। दोपहर करीब एक बजे मोहम्मद उमर को सामने से एक बाघ दिखाई दिया, यह देख उनके पसीने छूट गए। जब तक वह कुछ समझ पाते इससे पहले ही बाघ ने पशुओं के झुंड पर हमला कर दिया और बछड़े को मार डाला। बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनकर खेतों की रखवाली कर रहे ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस पर बाघ अधखाए शव को छोड़कर जंगल की तरफ चला गया। ग्रामीणों की सूचना के बाद फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, राजेंद्र वर्मा, वन रक्षक रामपाल सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने शव को जमीन में दफनवा दिया।
ममरी। सरदार लाल सिंह और सुंदरपुर वासियों के अनुसार शुक्रवार सुबह देवीपुर बीट के निकट झाला और गांव के बीच गेहूं के खेतों में आए बाघ ने श्यामबाबू के खेत में घास चर रही गाय पर हमला कर अपना निवाला बना लिया। ग्रामीणों और झालावासियों के शोर मचाने, आग जलाने पर बाघ अधखाया शव छोड़कर जंगल की ओर चला गया। गांव वालों ने बताया कि इससे पूर्व बाघ ने गांव के उत्तर में विनोद पाल के खेत में एक सांड़ को मार गिराया था। जिससे बाघ की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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बफरजोन मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे जंगल में बाघ द्वारा एक बछड़े को निवाला बनाने की सूचना मिली है। रेंजर और वन कर्मियों की टीम घटनास्थल पर रवाना की गई है। जंगल के अंदर चर रहे बछड़े पर बाघ ने हमला किया है। जंगल में पालतू पशुओं को चराने ले जाना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके चरवाहे अपनी और पालतू पशुओं की जान जोखिम में डालकर चोरी-छिपे जंगल में चराने ले जाते है। वन कर्मियों को बाघ की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे सोहनरा भूड़ गांव किनारे वन विभाग का कंपार्टमेंट एक एवं दो की सीमा पर सागौन और जामुन के पेड़ लगाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर कुकरा गांव निवासी मोहम्मद उमर अपने पालतू पशुओं को चराने ले गए थे। दोपहर करीब एक बजे मोहम्मद उमर को सामने से एक बाघ दिखाई दिया, यह देख उनके पसीने छूट गए। जब तक वह कुछ समझ पाते इससे पहले ही बाघ ने पशुओं के झुंड पर हमला कर दिया और बछड़े को मार डाला। बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनकर खेतों की रखवाली कर रहे ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस पर बाघ अधखाए शव को छोड़कर जंगल की तरफ चला गया। ग्रामीणों की सूचना के बाद फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, राजेंद्र वर्मा, वन रक्षक रामपाल सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने शव को जमीन में दफनवा दिया।
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ममरी। सरदार लाल सिंह और सुंदरपुर वासियों के अनुसार शुक्रवार सुबह देवीपुर बीट के निकट झाला और गांव के बीच गेहूं के खेतों में आए बाघ ने श्यामबाबू के खेत में घास चर रही गाय पर हमला कर अपना निवाला बना लिया। ग्रामीणों और झालावासियों के शोर मचाने, आग जलाने पर बाघ अधखाया शव छोड़कर जंगल की ओर चला गया। गांव वालों ने बताया कि इससे पूर्व बाघ ने गांव के उत्तर में विनोद पाल के खेत में एक सांड़ को मार गिराया था। जिससे बाघ की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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बफरजोन मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे जंगल में बाघ द्वारा एक बछड़े को निवाला बनाने की सूचना मिली है। रेंजर और वन कर्मियों की टीम घटनास्थल पर रवाना की गई है। जंगल के अंदर चर रहे बछड़े पर बाघ ने हमला किया है। जंगल में पालतू पशुओं को चराने ले जाना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके चरवाहे अपनी और पालतू पशुओं की जान जोखिम में डालकर चोरी-छिपे जंगल में चराने ले जाते है। वन कर्मियों को बाघ की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।