{"_id":"5be04515bdec2269625f657f","slug":"81541424405-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घंटों चलतुआ से दूर खड़े रहे वनकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घंटों चलतुआ से दूर खड़े रहे वनकर्मी
Updated Mon, 05 Nov 2018 06:56 PM IST
विज्ञापन
मैलानी। चलतुआ में बाघ के हमले में ग्रामीण की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा है। बाघ पर अपना गुस्सा निकालने के बाद भी ग्रामीण शांत नहीं हुए हैं। रविवार को ग्रामीणों ने महावतों को बंधक बनाकर उनकी पिटाई की थी। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए वनकर्मी घंटों चलतुआ गांव से दूर खड़े रहे। गांव में घुसने की हिम्मत तब जुटा पाए जब पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया।
रविवार को अपराह्न तीन बजे दुधवा नेशनल पार्क के किशनपुर क्षेत्र में पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी के गांव चलतुआ निवासी 45 वर्षीय देवानंद पर बाघ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। बाद में जिला चिकित्सालय लखीमपुर में पहुंचते ही देवानंद की मौत हो गई थी। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने हमलावर बाघ को लाठी, डंडों से पीटकर मार डाला था। ग्रामीणों के हमले में बाघ के मारे जाने की खबर से पार्क प्रशासन में हड़कंप मच गया। फौरन एफडी रमेश पांडे, डीडी महावीर कौजलगि, रेंजर किशनपुर राम बरन यादव, रेंजर मैलानी नसीम अहमद, भीरा राकेश बाबू, बफर जोन मैलानी के कार्यवाहक रेंजर मोहम्मद उमर मय स्टाफ चलतुआ रवाना हुए, लेकिन ग्रामीणों ने कांबिंग में लगे महावतों को बंधक बना लिया। इसकी खबर पर सभी चलतुआ से दूर नहर पुल पर खड़े हो गए। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिसकर्मी जीप से गांव गए। पुलिसकर्मी जिम्मेदार गांववालों के सहयोग से महावतों और चारा कटर को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाकर उन्हें नहर पुल के पास खड़े वनकर्मियों के पास लाए। महावतों और चारा कटर ने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें मारापीटा है। लिहाजा ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वनकर्मी गांव पहुंचकर मारे गए बाघ के पास जाने का साहस नहीं जुटा सके। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे और अधिक पुलिस बल के आने तथा जिम्मेदार ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद वन अधिकारी गांव में दाखिल हो सके।
हाथियों ने घेर रखा था बाघ को
मैलानी। बाघ के हमले की सूचना पर कांबिंग में लगे महावत फौरन हाथियों को लेकर बाघ की तलाश में घटनास्थल की ओर रवाना हुए। उन्हें एक जगह बाघ बैठा दिखाई दिया। महावतों ने दोनों हाथियों की मदद से बाघ को घेर लिया, ताकि बाघ गांव की ओर न जाए और उसे जंगल में खदेड़ा जा सके, लेकिन वहां पहुंचे ग्रामीणों ने आक्रोश में लाठी, डंडों से पीट-पीटकर बाघ को मार डाला।
विज्ञापन
चलतुआ में ग्रामीणों को पहले ही बाघ की चहलकदमी को देखते हुए जंगल में न जाने और जंगल के किनारे समूह में जाने की हिदायत दी गई थी, ताकि ग्रामीण बाघ के हमले से बच सकें, लेकिन ग्रामीणों ने उस पर अमल नहीं किया। नतीजतन बाघ के हमले की दूसरी घटना हो गई। ग्रामीणों ने आक्रोश में राष्ट्रीय पशु की जान लेने के साथ ही कांबिंग में लगे महावतों, चारा कटर को मारापीटा। इसे गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने केस दर्ज करने के साथ ही मामले की तहरीर थाना सेहरामऊ उत्तरी पीलीभीत को भी दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
महावीर कौजलगि, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क
विज्ञापन
रविवार को अपराह्न तीन बजे दुधवा नेशनल पार्क के किशनपुर क्षेत्र में पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी के गांव चलतुआ निवासी 45 वर्षीय देवानंद पर बाघ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। बाद में जिला चिकित्सालय लखीमपुर में पहुंचते ही देवानंद की मौत हो गई थी। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने हमलावर बाघ को लाठी, डंडों से पीटकर मार डाला था। ग्रामीणों के हमले में बाघ के मारे जाने की खबर से पार्क प्रशासन में हड़कंप मच गया। फौरन एफडी रमेश पांडे, डीडी महावीर कौजलगि, रेंजर किशनपुर राम बरन यादव, रेंजर मैलानी नसीम अहमद, भीरा राकेश बाबू, बफर जोन मैलानी के कार्यवाहक रेंजर मोहम्मद उमर मय स्टाफ चलतुआ रवाना हुए, लेकिन ग्रामीणों ने कांबिंग में लगे महावतों को बंधक बना लिया। इसकी खबर पर सभी चलतुआ से दूर नहर पुल पर खड़े हो गए। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिसकर्मी जीप से गांव गए। पुलिसकर्मी जिम्मेदार गांववालों के सहयोग से महावतों और चारा कटर को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाकर उन्हें नहर पुल के पास खड़े वनकर्मियों के पास लाए। महावतों और चारा कटर ने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें मारापीटा है। लिहाजा ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वनकर्मी गांव पहुंचकर मारे गए बाघ के पास जाने का साहस नहीं जुटा सके। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे और अधिक पुलिस बल के आने तथा जिम्मेदार ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद वन अधिकारी गांव में दाखिल हो सके।
विज्ञापन
हाथियों ने घेर रखा था बाघ को
मैलानी। बाघ के हमले की सूचना पर कांबिंग में लगे महावत फौरन हाथियों को लेकर बाघ की तलाश में घटनास्थल की ओर रवाना हुए। उन्हें एक जगह बाघ बैठा दिखाई दिया। महावतों ने दोनों हाथियों की मदद से बाघ को घेर लिया, ताकि बाघ गांव की ओर न जाए और उसे जंगल में खदेड़ा जा सके, लेकिन वहां पहुंचे ग्रामीणों ने आक्रोश में लाठी, डंडों से पीट-पीटकर बाघ को मार डाला।
विज्ञापन
चलतुआ में ग्रामीणों को पहले ही बाघ की चहलकदमी को देखते हुए जंगल में न जाने और जंगल के किनारे समूह में जाने की हिदायत दी गई थी, ताकि ग्रामीण बाघ के हमले से बच सकें, लेकिन ग्रामीणों ने उस पर अमल नहीं किया। नतीजतन बाघ के हमले की दूसरी घटना हो गई। ग्रामीणों ने आक्रोश में राष्ट्रीय पशु की जान लेने के साथ ही कांबिंग में लगे महावतों, चारा कटर को मारापीटा। इसे गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने केस दर्ज करने के साथ ही मामले की तहरीर थाना सेहरामऊ उत्तरी पीलीभीत को भी दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
महावीर कौजलगि, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क