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जंगल में सल्तनत के लिए बाघों के बीच बढ़ रहा संघर्ष

Fri, 10 Aug 2018 12:15 AM IST
Updated Fri, 10 Aug 2018 12:15 AM IST
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जंगल में सल्तनत के लिए बाघों के बीच बढ़ रहा संघर्ष
सल्तनत के लिए बाघों के बीच बढ़ रहा संघर्ष
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बूढ़े बाघों को खदेड़ कर जंगल से बाहर कर रहे युवा बाघ
बाघ जंगल से निकल कर गन्ने के खेतों में बना रहे ठिकाना

लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बढ़ रही बाघों की आबादी के बीच सल्तनत कायम करने के लिए संघर्ष हो रहा है। युवा बाघ बूढ़े बाघों को जंगल से खदेड़ रहे हैं। अपने इलाके गवां चुके उम्रदराज बाघ जंगल से बाहर गन्ने के खेतों को ठिकाना बना रहे हैं। इससे मानव और बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के मैलानी, भीरा, रेंज के अलावा दक्षिण निघासन, उत्तर निघासन, मझगईं, पलिया, संपूर्णानगर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर तथा गोला रेंज से सटे इलाके में गन्ने के खेतों में ठिकाना बनाए बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में बाघ इन इलाकों में करीब बीस लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं और तीस से अधिक लोग इनके हमलों में घायल हो चुके हैं। इसके अलावा पचास से अधिक पालतू पशु भी शिकार बन चुके हैं। बूढ़े और शारीरिक रूप से अक्षम बाघ इंसानों के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि वे आसान शिकार तलाशते हैं। जंगल से बाहर रहना बाघों के लिए भी खतरे से खाली नहीं हैं। शिकारी ऐसे ही बाघों की घात में रहते हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय भी इस बात से इत्तफाक रखते हैं कि बाघों की आबादी में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी स्थिति में बाघों के बीच अपने क्षेत्र के लिए संघर्ष होना लाजिमी है। युवा बाघ बूढ़े बाघों को उनके क्षेत्र से बाहर कर रहे हैं।
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अब नए सिरे से वन प्रबंधन की जरूरत
उत्तर प्रदेश राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. बीपी सिंह का कहना है कि बाघों की बढ़ती आबादी के चलते नए सिरे से वन प्रबंधन की जरूरत है। जंगलों को आपस में जोड़कर बाघों के घर को विस्तार देना जरूरी हो गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. मुदित गुप्ता भी जंगलों में ग्रासलैंड और वेटलैंड के प्रबंधन की बात कहते हैं। उनका कहना है कि जंगल की फूड डेंसिटी बढ़ाने की जरूरत है ताकि बाघों के बीच भोजन और आवास के लिए संघर्ष की नौबत न आए।

दुधवा टाइगर रिजर्व में हैं करीब सवा सौ बाघ
चार साल पहले हुई बाघों की गणना में उतर प्रदेश के अंदर 117 बाघों की तस्वीरें कैमरों में ट्रैप हुई थी। दुधवा टाइगर रिजर्व और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों का अनुमान है अकेले दुधवा टाइगर रिजर्व में ही इस समय करीब एक सौ पच्चीस बाघ हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग में भी बाघों की संख्या में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई है। सही संख्या हाल में हुई बाघ गणना के परिणाम आने के बाद ही पता चल सकेगी।


वर्जन.......
बाघों की बढ़ती आबादी के बीच क्षेत्र के लिए आपसी संघर्ष भी बाघों के जंगल से बाहर निकलने का एक प्रमुख कारण है। मानव और बाघों के बीच बढ़ती संघर्ष की घटनाओं की समीक्षा में यह बात सामने आई है। जंगल में ग्रासलैंड मैनेजमेंट और वेटलैंड मैनेजमेंट के जरिए इन घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन
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