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नहीं रहे लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद
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गोला गोकर्णनाथ। लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद्र गुप्त हार्ट और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे। जिनका निधन हो गया, वह 80 वर्ष के थे। राजकीय सम्मान के साथ शव का मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया।
नगर निवासी स्वर्गीय तिरमलचंद गुप्ता समाजसेवा के क्षेत्र में जाने जाते थे। उनके चार पुत्र थे, जिसमें प्रेमचंद गुप्त दूसरे नंबर के थे। बड़े भाई रामकिशोर गुप्ता भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे, जो स्वर्गवासी हो चुके हैं। तीसरे नंबर के ज्ञानचंद गुप्ता, पांचवें नंबर के प्रकाशचंद्र गुप्ता है। परिवार वालों ने बताया कि 80 वर्षीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता कई वर्षों से हृदय और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे, जिनका मोहम्मदी रोड स्थित उनके निज निवास पर बुधवार की सुबह नौ बजे निधन हो गया। निधन से नगर में शोक की लहर दौड़ गई। वह अपने पीछे पुत्र लोकेश कुमार गुप्त, छोटा पुत्र नवनीत, पौत्री सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। मुक्तिधाम ने उनके बड़े पुत्र लोकेश कुमार गुप्ता ने मुखाग्नि दी। मुक्तिधाम में तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी की मौजूदगी में उन्हें गारद ने सलामी दी गई। शव यात्रा में लोकतंत्र रक्षक सेनानी परिषद के जिलाध्यक्ष प्रोफेसर विजय गुप्ता, लोकतंत्र रक्षक सेनानी सुरेशचंद्र मिश्र, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय शुक्ल रिंकू, वरुण अग्रवाल, अरविंद पांडे, अरविंद गुप्ता रामजी, अनिल जलोटा, सुनील गुप्ता, रामकृष्ण गुप्ता, अनिकेत मिश्र, अनूपचंद गुप्ता आदि शामिल हुए।
इमरजेंसी की प्रताड़ना से मौत होने तक नहीं उबरे थे प्रेमचंद गुप्ता
गोला गोकर्णनाथ। लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता को आपात काल में अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसका असर उन्हें जीवनभर भुगतने को विवश होना पड़ा। चलने फिरने में उन्हें हमेशा दिक्कतों का सामना करना पड़ा, किंतु उन्होंने माफी नहीं मांगी।
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आपातकाल लगने पर प्रेमंचंद्र गुप्ता ने कई अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन झुके नहीं। परिवार के लोग बताते हैं कि एक रात पुलिस ने उनके घर को घेर लिया और दरवाजा खुलवाकर उन्हें गोला थाने पकड़ ले गई। वहां उन्हें लिटाकर पैरों के ऊपर बेलन चलाया गया। बेलन के दोनों सिरों पर दो सिपाहियों को खड़ा किया गया था, जिससे उनकी हड्डियां चूर सी हो गई थीं। पुलिस वाले उनसे माफी मांगने और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं के नाम पते पूछ रहे थे, जो उन्होंने प्रताड़ना सहन करने के बावजूद नहीं बताए। बमुश्किल मालिश आदि कराने के बाद वह हल्का फुल्का चलते थे। किंतु साइकिल नहीं चला पाते थे। लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता बाल्यकाल से ही बंशीबाबू पुरवार और महेंद्र कुमार गुप्त वैद्य के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक बन गए थे। उन्होंने संघ से लेकर भारतीय जनसंघ के संगठन के लिए भी काफी काम किया।
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नगर निवासी स्वर्गीय तिरमलचंद गुप्ता समाजसेवा के क्षेत्र में जाने जाते थे। उनके चार पुत्र थे, जिसमें प्रेमचंद गुप्त दूसरे नंबर के थे। बड़े भाई रामकिशोर गुप्ता भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे, जो स्वर्गवासी हो चुके हैं। तीसरे नंबर के ज्ञानचंद गुप्ता, पांचवें नंबर के प्रकाशचंद्र गुप्ता है। परिवार वालों ने बताया कि 80 वर्षीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता कई वर्षों से हृदय और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे, जिनका मोहम्मदी रोड स्थित उनके निज निवास पर बुधवार की सुबह नौ बजे निधन हो गया। निधन से नगर में शोक की लहर दौड़ गई। वह अपने पीछे पुत्र लोकेश कुमार गुप्त, छोटा पुत्र नवनीत, पौत्री सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। मुक्तिधाम ने उनके बड़े पुत्र लोकेश कुमार गुप्ता ने मुखाग्नि दी। मुक्तिधाम में तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी की मौजूदगी में उन्हें गारद ने सलामी दी गई। शव यात्रा में लोकतंत्र रक्षक सेनानी परिषद के जिलाध्यक्ष प्रोफेसर विजय गुप्ता, लोकतंत्र रक्षक सेनानी सुरेशचंद्र मिश्र, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय शुक्ल रिंकू, वरुण अग्रवाल, अरविंद पांडे, अरविंद गुप्ता रामजी, अनिल जलोटा, सुनील गुप्ता, रामकृष्ण गुप्ता, अनिकेत मिश्र, अनूपचंद गुप्ता आदि शामिल हुए।
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इमरजेंसी की प्रताड़ना से मौत होने तक नहीं उबरे थे प्रेमचंद गुप्ता
गोला गोकर्णनाथ। लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता को आपात काल में अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसका असर उन्हें जीवनभर भुगतने को विवश होना पड़ा। चलने फिरने में उन्हें हमेशा दिक्कतों का सामना करना पड़ा, किंतु उन्होंने माफी नहीं मांगी।
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आपातकाल लगने पर प्रेमंचंद्र गुप्ता ने कई अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन झुके नहीं। परिवार के लोग बताते हैं कि एक रात पुलिस ने उनके घर को घेर लिया और दरवाजा खुलवाकर उन्हें गोला थाने पकड़ ले गई। वहां उन्हें लिटाकर पैरों के ऊपर बेलन चलाया गया। बेलन के दोनों सिरों पर दो सिपाहियों को खड़ा किया गया था, जिससे उनकी हड्डियां चूर सी हो गई थीं। पुलिस वाले उनसे माफी मांगने और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं के नाम पते पूछ रहे थे, जो उन्होंने प्रताड़ना सहन करने के बावजूद नहीं बताए। बमुश्किल मालिश आदि कराने के बाद वह हल्का फुल्का चलते थे। किंतु साइकिल नहीं चला पाते थे। लोकतंत्र रक्षक सेनानी प्रेमचंद गुप्ता बाल्यकाल से ही बंशीबाबू पुरवार और महेंद्र कुमार गुप्त वैद्य के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक बन गए थे। उन्होंने संघ से लेकर भारतीय जनसंघ के संगठन के लिए भी काफी काम किया।