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चीनी मिलों पर किसानों का 73 करोड़ 26 लाख रुपये ब्याज बाकी
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लखीमपुर खीरी। गन्ना सीजन 2018-19 का पेराई सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन किसी मिल ने किसानों को पूरा गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन के अंदर भुगतान न करने से चीनी मिलों पर इस वर्ष बकाया गन्ना मूल्य पर 73 करोड़ 26 लाख रुपये ब्याज की देनदारी बन गई है, जिसके भुगतान को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं हो रही है। दूसरी ओर बैंकों ने किसानों से ऋण वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है, तो वहीं बकाया गन्ना मूल्य और ब्याज का भुगतान न मिलने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
जनपद में कुल चार लाख 54 हजार 260 गन्ना किसान समितियों के सदस्य हैं, जिनमें से इस वर्ष चार लाख छह हजार 267 किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया है। खरीदे गए गन्ना के मुताबिक नौ चीनी मिलों को 39 अरब 40 करोड़ 23 लाख 94 हजार रुपये भुगतान किसानों को दिया जाना है, लेकिन अब भी 16 अरब 40 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया है। वर्ष 2016-17 में कोर्ट ने गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन में भुगतान न किए जाने पर किसानों को ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन तत्कालीन प्रदेश सरकार ने किसानों के हक पर कैंची चलाते हुए चीनी मिलों को ब्याज का भुगतान न करने की राहत प्रदान कर दी थी। इसके बाद से किसानों को उनके हक से लगातार वंचित होना पड़ा है। इस वर्ष कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई पर पुन: किसानों को बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज का भुगतान कराने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे, जिसके बाद डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने जनवरी 2019 में चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके गन्ना मूल्य भुगतान के साथ ही ब्याज की रकम का भुगतान करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी किसी मिल ने कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं किया है।
किसानों की हालत पतली, मिलों पर दरियादिली
पिछले तीन सालों में एक बार भी ब्याज का भुगतान किसानों को नहीं किया गया, उल्टे उन्हीं से बैंकों के माध्यम से वसूला जा रहा है। बैंकों के चक्रवृद्धि ब्याज की मार से किसान बेहाल हैं। 2017-18 में बकाया गन्ना मूल्य पर एक अरब 90 करोड़ 89 लाख 76 हजार रुपये किसानों के ब्याज की देनदारी चीनी मिलों पर बनी, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ। वर्ष 2016-17 में भी चीनी मिलों पर 72 करोड़ तीन लाख 77 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बनी थी, जिसका अब तक किसानों को भुगतान नहीं दिया गया।
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मिलों पर बकाया ब्याज (लाख में)
मिल - 2017-18 - 2018-19
गोला - 4659.71 - 2800.82
पलिया - 3920.67 - 1764.28
खंभारखेड़ा - 3004.92 - 1280.86
ऐरा - 2483.75 - 366.74
अजवापुर - 1384.33 - 146.86
कुंभी - 1025.25 - 248.11
गुलरिया - 745.30 - 182.98
बेलरायां - 938.45 - 305.00
संपूर्णानगर - 927.38 - 230.38
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कुल योग - 1,90,89,76,000- 73,26,03,000
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पूरे बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराना हमारी प्राथमिकता है। सभी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के साथ ही ब्याज की रकम का भुगतान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही पुन: बकाया भुगतान की समीक्षा करके ब्याज का भुगतान कराने के प्रयास किए जाएंगे।
शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
खाद-बीज-बिजली और किसान क्रेडिट कार्ड के बकाया भुगतान में देरी होने पर किसानों से मोटे ब्याज की वसूली की जा रही है। हाईकोर्ट ने भी चीनी मिलों को ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है, लेकिन किसानों को ब्याज का भुगतान न करके मिल मालिक मनमानी पर उतारू हैं। यदि मिलों ने ब्याज का भुगतान न किया, तो आंदोलन छेड़ेंगे।
अंजनी दीक्षित, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी
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जनपद में कुल चार लाख 54 हजार 260 गन्ना किसान समितियों के सदस्य हैं, जिनमें से इस वर्ष चार लाख छह हजार 267 किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया है। खरीदे गए गन्ना के मुताबिक नौ चीनी मिलों को 39 अरब 40 करोड़ 23 लाख 94 हजार रुपये भुगतान किसानों को दिया जाना है, लेकिन अब भी 16 अरब 40 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया है। वर्ष 2016-17 में कोर्ट ने गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन में भुगतान न किए जाने पर किसानों को ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन तत्कालीन प्रदेश सरकार ने किसानों के हक पर कैंची चलाते हुए चीनी मिलों को ब्याज का भुगतान न करने की राहत प्रदान कर दी थी। इसके बाद से किसानों को उनके हक से लगातार वंचित होना पड़ा है। इस वर्ष कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई पर पुन: किसानों को बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज का भुगतान कराने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे, जिसके बाद डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने जनवरी 2019 में चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके गन्ना मूल्य भुगतान के साथ ही ब्याज की रकम का भुगतान करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी किसी मिल ने कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं किया है।
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किसानों की हालत पतली, मिलों पर दरियादिली
पिछले तीन सालों में एक बार भी ब्याज का भुगतान किसानों को नहीं किया गया, उल्टे उन्हीं से बैंकों के माध्यम से वसूला जा रहा है। बैंकों के चक्रवृद्धि ब्याज की मार से किसान बेहाल हैं। 2017-18 में बकाया गन्ना मूल्य पर एक अरब 90 करोड़ 89 लाख 76 हजार रुपये किसानों के ब्याज की देनदारी चीनी मिलों पर बनी, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ। वर्ष 2016-17 में भी चीनी मिलों पर 72 करोड़ तीन लाख 77 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बनी थी, जिसका अब तक किसानों को भुगतान नहीं दिया गया।
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मिलों पर बकाया ब्याज (लाख में)
मिल - 2017-18 - 2018-19
गोला - 4659.71 - 2800.82
पलिया - 3920.67 - 1764.28
खंभारखेड़ा - 3004.92 - 1280.86
ऐरा - 2483.75 - 366.74
अजवापुर - 1384.33 - 146.86
कुंभी - 1025.25 - 248.11
गुलरिया - 745.30 - 182.98
बेलरायां - 938.45 - 305.00
संपूर्णानगर - 927.38 - 230.38
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कुल योग - 1,90,89,76,000- 73,26,03,000
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पूरे बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराना हमारी प्राथमिकता है। सभी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के साथ ही ब्याज की रकम का भुगतान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही पुन: बकाया भुगतान की समीक्षा करके ब्याज का भुगतान कराने के प्रयास किए जाएंगे।
शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
खाद-बीज-बिजली और किसान क्रेडिट कार्ड के बकाया भुगतान में देरी होने पर किसानों से मोटे ब्याज की वसूली की जा रही है। हाईकोर्ट ने भी चीनी मिलों को ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है, लेकिन किसानों को ब्याज का भुगतान न करके मिल मालिक मनमानी पर उतारू हैं। यदि मिलों ने ब्याज का भुगतान न किया, तो आंदोलन छेड़ेंगे।
अंजनी दीक्षित, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी