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आबादी के पास दिखे बाघ के पगचिन्ह, ग्रामीण दहशत में
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:28 PM IST
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आबादी के पास दिखे बाघ के पगचिह्न, दहशत में ग्रामीण
ममरी। अशर्फीगंज गांव की आबादी से दक्षिण पश्चिम की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर गुरुवार सुबह बाघ के पगचिह्न देखे जाने से क्षेत्रवासियों में दहशत फैल गई है। पगचिन्ह मिलने की पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
शुक्रवार सुबह ग्राम अशर्फीगंज, गौरीगंज, कन्हैयागंज, नयागांव के ग्रामीण अपने खेतों की ओर गए थे तो अशर्फी गंज की आबादी से पश्चिम और दक्षिण होकर मोहम्मदी महेशपुर रेंज के जंगल को जाने वाले कच्चे रास्ते पर बाघ के ताजे पग चिह्न देखकर गांव वालों के होश उड़ गए। इस स्थान की दूरी जंगल से करीब तीन किलोमीटर बताई जा रही है। अशर्फीगंज, महेशपुर के ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के पगचिन्ह उसी स्थान तक दिखे हैं जहां पिछले वर्ष 21 अक्टूबर को बाघ के हमले में मारे गए अशर्फीगंज के युवक के शव का दाह संस्कार किया गया था। गांववालों की सूचना पर पहुंचे वनरक्षक श्यामकिशोर शुक्ला, अनीस खां आदि वनकर्मियों ने पगचिन्हों का निरीक्षण कर बाघ होने की पुष्टि की। वर्ष 2017 में लालाराम पर बाघ ने हमला कर मार डाला था और गौरीगंज गांव में पीपल के नीचे बंधे एक बैल को अपना शिकार बना लिया था। वनकर्मियों ने क्षेत्रवासियों को सतर्क रहने और सुबह शाम के वक्त खेतों की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है।
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आबादी के पास दिखे बाघ के पगचिह्न, दहशत में ग्रामीण
ममरी। अशर्फीगंज गांव की आबादी से दक्षिण पश्चिम की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर गुरुवार सुबह बाघ के पगचिह्न देखे जाने से क्षेत्रवासियों में दहशत फैल गई है। पगचिन्ह मिलने की पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
शुक्रवार सुबह ग्राम अशर्फीगंज, गौरीगंज, कन्हैयागंज, नयागांव के ग्रामीण अपने खेतों की ओर गए थे तो अशर्फी गंज की आबादी से पश्चिम और दक्षिण होकर मोहम्मदी महेशपुर रेंज के जंगल को जाने वाले कच्चे रास्ते पर बाघ के ताजे पग चिह्न देखकर गांव वालों के होश उड़ गए। इस स्थान की दूरी जंगल से करीब तीन किलोमीटर बताई जा रही है। अशर्फीगंज, महेशपुर के ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के पगचिन्ह उसी स्थान तक दिखे हैं जहां पिछले वर्ष 21 अक्टूबर को बाघ के हमले में मारे गए अशर्फीगंज के युवक के शव का दाह संस्कार किया गया था। गांववालों की सूचना पर पहुंचे वनरक्षक श्यामकिशोर शुक्ला, अनीस खां आदि वनकर्मियों ने पगचिन्हों का निरीक्षण कर बाघ होने की पुष्टि की। वर्ष 2017 में लालाराम पर बाघ ने हमला कर मार डाला था और गौरीगंज गांव में पीपल के नीचे बंधे एक बैल को अपना शिकार बना लिया था। वनकर्मियों ने क्षेत्रवासियों को सतर्क रहने और सुबह शाम के वक्त खेतों की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है।
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