फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   भ्रष्टाचार रोकने में नोटबंदी नाकाम

भ्रष्टाचार रोकने में नोटबंदी नाकाम

Wed, 08 Nov 2017 10:30 PM IST
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:30 PM IST
विज्ञापन
भ्रष्टाचार रोकने में नोटबंदी नाकाम
लखीमपुर खीरी।
विज्ञापन

नोटबंदी भ्रष्टाचार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। विमुद्रीकरण के एक साल पूरा होने पर युवराजदत्त महाविद्यालय के अर्थशास्त्र और वाणिज्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया व्यक्त की।
बीएड विभाग के डॉ. मनोज मिश्र विमुद्रीकरण को सकारात्मक बताया, लेकिन लोगों के लाइन में खड़े होने को दुखद बताया। डॉ. अजय आगा ने माना कि विमुद्रीकरण बिना तैयारी के किया गया। इससे कैशलेस अर्थव्यवस्था बढ़ी, डिजिटल भुगतान बढ़ा। डॉ. आकाश वार्ष्णेय ने अनुभव किया कि विमुद्रीकरण के कारण रेजगारी और छोटे नोटों की समस्या बनी हुई है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि नोटबंदी का निर्णय सही था। सरकार और सामाजिक सहयोग से नोटबंदी की समस्या से निबटा जा सकता था। लोगों को हुई परेशानी के लिए सरकार जिम्मेदार है। नोटबंदी से भ्रष्टाचारी प्रभावित नहीं हुए। सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य पर ध्यान देतीं तो विमुद्रीकरण की जरूरत नहीं होती। डॉ. नीलम त्रिवेदी ने माना कि विमुद्रीकरण से चमत्कार की आशा थी, लेकिन ऐसा दिखाई नहीं पड़ा। डॉ. नूतन ने इसे एतिहासिक कदम बताया। डॉ. एसके दुबे ने विमुद्रीकरण को सर्जिकल स्ट्राइक बताया।
विज्ञापन

डॉ. विशाल द्विवेदी ने बताया कि विमुद्रीकरण ने सुप्तावस्था को जागृत किया। डॉ. सुनील त्रिपाठी ने नोटबंदी की विफलता को धार्मिक दायित्व से जोड़ा। डॉ. डीके सिंह ने विमुद्रीकरण की सराहना की। अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति पंत ने बताया कि बैंकों में नकदी वापस आई। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था दस शीर्षस्थ अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गई है, जो डिजिटल लेनदेन करती है। कर संग्रह में 23 प्रतिशत का उछाल आया। इसका दीर्घकालीन प्रभाव काफी अच्छा रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा अनामिका ने कहा कि विमुद्रीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू रहे हैं। अभय प्रताप ने बताया कि इससे करदाता बढ़े, लेकिन लचर व्यवस्था सामने आई। शुभद्रा ने बताया कि विमुद्रीकरण भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की संवेदनहीनता के कारण सफल नहीं हुआ। शुभम सैनी, सुमित धूरिया, जूली तिवारी, दीक्षा, अरुण प्रताप, लवकुश पांडेय, रीमा अवस्थी आदि अपने विचार रखे।

प्राचार्य डॉ. डीएन मालपानी ने कहा कि विमुद्रीकरण से आम जनता को परेशानी हुई, लेकिन अर्थव्यवस्था में आर्थिक भ्रष्टाचार रूपी बीमारी को खत्म करने के लिए यह आवश्यक था। 2.25 लाख मुखौटा कंपनियां बंद हो गईं। जीडीपी में गिरावट के बाद कर संग्रह में वृद्धि हुई। दीर्घकाल में इसके अच्छे परिणाम दिखाई देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed