{"_id":"56f8206b4f1c1bac31f1552a","slug":"13-months-dm-kinjal-innings-headlines","type":"story","status":"publish","title_hn":"13 महीने की पारी में सुर्खियों में रहीं डीएम किंजल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
13 महीने की पारी में सुर्खियों में रहीं डीएम किंजल
ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
डीएम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
थारू जनजाति के विकास के मामले में सराहना बटोरी
दुधवा के डीडी से जंग का मामला राजधानी तक छाया
सात फरवरी 2015 को जिले का कार्य संभालने वाली डीएम किंजल सिंह अपने 13 माह के कार्यकाल में सुर्खियों में रहीं। थारू जन जाति के विकास और जेल में महिला बंदियों के लिए किए गए कार्यों के लिए शासन स्तर पर उनकी सराहना हुई तो दुधवा नेशनल पार्क कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से पर्यटन ठप होने से यहां के डीडी पीपी सिंह से उनकी जंग का मामला राजधानी तक पहुंचा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने डीएम और डीडी को तलब को दोनों का पक्ष भी जाना था। हालांकि ये तबादले रूटीन के तहत किया गया है लेकिन दुधवा भी एक कारण माना जा रहा है।
डीएम किंजल सिंह ने सात फरवरी 2015 को अपना कार्यभार संभालने के बाद जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था ठीक करने के लिए यहां के सीसीटीवी कैमरों को अपने मोबाइल से जोड़ लिया था। इसके बाद लगातार निरीक्षण कर यहां की व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया। इसके बाद नगर पालिका परिषदों के विकास कार्यों की गुणवत्ता परखनी शुरू की, जिसमें भी वह चर्चा में रहीं। इसके अलावा थारू जनजाति के विकास के लिए उन्होंने चंदनचौकी क्षेत्र में द राइजिंग कार्यक्रम चलाकर दस दिनों तक खुद कैँप किया। इसके बाद जेल में महिला बंदियों के लिए काम किया और जेल में रिसाइकिलिंग प्लांट लगवाया। इसी बीच 26 नवंबर 2015 को दुधवा नेशनल पार्क के कर्मियों ने डीएम किंजल सिंह पर रात में जंगल में घूमने और प्रताड़ित करने सहित कई संगीन आरोप लगाते हुए हड़ताल शुरू कर दी थी। यह मामला राजधानी तक पहुंचा था, जिसमें दुधवा के तत्कालीन डीडी पीपी सिंह से उनकी जंग की बात सामने आने पर डीएम और डीडी को मुख्य सचिव ने 30 नवंबर को तलब किया था। उसके कुछ दिन बाद हड़ताल स्थगित हो गई थी। बाद में फिर हड़ताल हुई और जो करीब 40 दिन तक चली। शासन के हस्तक्षेप पर हड़ताल समाप्त हो गई।
विज्ञापन