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दस साल में भी लखीमपुर डिपो को नहीं मिल सकी पांच एकड़ जमीन
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:07 AM IST
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बस
- फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी।
पिछले कई सालों से लखीमपुर डिपो के लिए शुरू हुई जमीन की तलाश इस साल भी पूरी नहीं हो सकी। पूरे साल जमीन फाइनल करने के लिए लखीमपुर डिपो से लेकर कलक्ट्रेट तक सिर्फ कागजी कार्रवाई होती रही। अभी भी जमीन संबंधी फाइल डीएम कार्यालय में होना बताया जाता है। लखीमपुर डिपो के लिए 2007 से जमीन तलाशने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि इतने सालों में शहर और उसके आस-पास में कई जमीनें देखी गईं, लेकिन अभी तक एक भी जमीन फाइनल नहीं हो सकी।
शहरवासियों के लिए मुसीबत बना डिपो
शहर के बीचो-बीच स्थित रोडवेज डिपो शहर वासियों के लिए मुसीबत बन गया है। आबादी बढ़ने के साथ ही डिपो में बसों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ। वहीं डिपो परिसर में जगह कम होने के कारण चालक परिचालक बसों को रोड पर खड़ा करके सवारियां भरते हैं ,जिससे शहर के लोगों को रोजाना जाम से जूझना पड़ता है। इस कारण लगातार शहर के लोग डिपो को बाहर स्थापित करने की मांग करते आ रहे हैं।
डिपो से होता है करीब 250 बसों का संचालन
लखीमपुर डिपो की शुरूआत 2006 में हुई थी। तब बसों की संख्या 10 से 12 थी और रोजाना 40 से 50 बसों का संचालन होता था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ही डिपो में बसों की संख्या भी बढ़कर 83 हो गई। कैसरबाग, हैदरगढ़, सीतापुर, मिर्जापुर, बरेली, शाहजहांपुर, गोला, किदवईनगर और बाराबंकी डिपो की करीब 250 बसों का रोजाना संचालन हो रहा है।
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वर्कशॉप के कारण नहीं मिल रहीं निगम की बसें
लखीमपुर डिपो के पास वर्कशाप नहीं है। इस कारण डिपो को निगम की बसें नहीं मिल सकीं। इस कारण अभी तक उधार की बसों के सहारे संचालित हो रहा है। डिपो के पास अपनी बसें न होने के कारण यात्रियों से लेकर डिपो कर्मचारियों तक को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन पर हाईटेंशन का है पेच
लखीमपुर डिपो को वर्कशॉप आदि के लिए पांच एकड़ जमीन की जरूरत है। डिपो अधिकारियों ने इसके लिए लालपुर बैरियर, निघासन रोड, एलआरपी चौराहा एवं ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन देखी थी। अधिकारियों की पहली प्राथमिकता एलआरपी रोड पर पीडब्ल्यूडी की जमीन थी, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि अब अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टनगर नगर की जमीन फाइनल करके जिला प्रशासन को फाइल भेजी है, लेकिन इसके ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन का पेंच फंस गया है।
ट्रांसपोर्टनगर में जमीन देखी गई है। उस जमीन के लिए जिला प्रशासन को फाइल भेज दी गई है। जिला प्रशासन और डिपो अधिकारियों को ही इसके लिए निर्णय लेना है।
आरके श्रीवास्तव, प्रभारी एआरएम लखीमपुर डिपो
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पिछले कई सालों से लखीमपुर डिपो के लिए शुरू हुई जमीन की तलाश इस साल भी पूरी नहीं हो सकी। पूरे साल जमीन फाइनल करने के लिए लखीमपुर डिपो से लेकर कलक्ट्रेट तक सिर्फ कागजी कार्रवाई होती रही। अभी भी जमीन संबंधी फाइल डीएम कार्यालय में होना बताया जाता है। लखीमपुर डिपो के लिए 2007 से जमीन तलाशने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि इतने सालों में शहर और उसके आस-पास में कई जमीनें देखी गईं, लेकिन अभी तक एक भी जमीन फाइनल नहीं हो सकी।
शहरवासियों के लिए मुसीबत बना डिपो
शहर के बीचो-बीच स्थित रोडवेज डिपो शहर वासियों के लिए मुसीबत बन गया है। आबादी बढ़ने के साथ ही डिपो में बसों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ। वहीं डिपो परिसर में जगह कम होने के कारण चालक परिचालक बसों को रोड पर खड़ा करके सवारियां भरते हैं ,जिससे शहर के लोगों को रोजाना जाम से जूझना पड़ता है। इस कारण लगातार शहर के लोग डिपो को बाहर स्थापित करने की मांग करते आ रहे हैं।
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डिपो से होता है करीब 250 बसों का संचालन
लखीमपुर डिपो की शुरूआत 2006 में हुई थी। तब बसों की संख्या 10 से 12 थी और रोजाना 40 से 50 बसों का संचालन होता था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ही डिपो में बसों की संख्या भी बढ़कर 83 हो गई। कैसरबाग, हैदरगढ़, सीतापुर, मिर्जापुर, बरेली, शाहजहांपुर, गोला, किदवईनगर और बाराबंकी डिपो की करीब 250 बसों का रोजाना संचालन हो रहा है।
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वर्कशॉप के कारण नहीं मिल रहीं निगम की बसें
लखीमपुर डिपो के पास वर्कशाप नहीं है। इस कारण डिपो को निगम की बसें नहीं मिल सकीं। इस कारण अभी तक उधार की बसों के सहारे संचालित हो रहा है। डिपो के पास अपनी बसें न होने के कारण यात्रियों से लेकर डिपो कर्मचारियों तक को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन पर हाईटेंशन का है पेच
लखीमपुर डिपो को वर्कशॉप आदि के लिए पांच एकड़ जमीन की जरूरत है। डिपो अधिकारियों ने इसके लिए लालपुर बैरियर, निघासन रोड, एलआरपी चौराहा एवं ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन देखी थी। अधिकारियों की पहली प्राथमिकता एलआरपी रोड पर पीडब्ल्यूडी की जमीन थी, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि अब अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टनगर नगर की जमीन फाइनल करके जिला प्रशासन को फाइल भेजी है, लेकिन इसके ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन का पेंच फंस गया है।
ट्रांसपोर्टनगर में जमीन देखी गई है। उस जमीन के लिए जिला प्रशासन को फाइल भेज दी गई है। जिला प्रशासन और डिपो अधिकारियों को ही इसके लिए निर्णय लेना है।
आरके श्रीवास्तव, प्रभारी एआरएम लखीमपुर डिपो