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Kushinagar News: पिता की ही रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट पद पर तैनात हुए कुशाग्र
Mon, 11 Dec 2023 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 11 Dec 2023 01:37 AM IST
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लेफ्टिनेंट बनने के बाद राज्यवर्धन स्टेडियम में अपने परिवार के साथ कुशाग्र।
पिता की ही रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट पद पर तैनात हुए कुशाग्र
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। जिस रेजिमेंट में मेजर अमिय त्रिपाठी ने देश के लिए प्राण की आहुति दी थी, उसी रेजिमेंट में उनका बेटा 19 वर्ष बाद सैन्य अधिकारी बन गया है। यह कोई भाग्य से पाया गया पिता का स्थान नहीं, इस रेजिमेंट को पाने के लिए कुशाग्र ने अथाह मेहनत की। उन्हें, जब रेजिमेंट चुनने की बारी आई तो, अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के उद्देश्य से उसी 19 सिख रेजिमेंट को चुना।
मोक्ष और ज्ञान की भूमि गया ओटीए (आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी) में शनिवार को 24वीं पासिंग आउट परेड और पिपिंग सेरेमनी आयोजित हुई। इसके बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की उपस्थिति में देश को 121 जेंटलमैन सैन्य अधिकारी मिले। इसमें जिले के भेलया चंद्रौटा के शहीद मेजर अमिय त्रिपाठी के इकलौते पुत्र कुशाग्र त्रिपाठी ने भी शामिल रहे। कुशाग्र गया में चार वर्ष से प्रशिक्षण ले रहे थे। उन्होंने आर्मी में टेक्निकल इंजीनियरिंग परीक्षा उत्तीर्ण की थी। शहीद अमिय त्रिपाठी के भाई और कुशाग्र के चाचा अजय त्रिपाठी ने बताया कि छोटी उम्र में कुशाग्र के पिता शहीद हो गए। वे सिख रेजिमेंट के 19वीं बटालियन में तैनात थे। मां के दृढ़ निश्चय से कुशाग्र ने उसी सिख रेजिमेंट में खुद को स्थापित किया, जहां उसके पिता के सपने अधूरे थे। कुशाग्र को यह मुकाम मिलने से पूरे परिवार को खुशी है।
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परेड के बाद कंधे पर लगा बैच तो छलक पड़े परिजनों के आंसू
गया के राज्यवर्धन स्टेडियम में आयोजित परेड के बाद पीपिंग सेरेमनी के दौरान कुशाग्र का पूरा परिवार इस पल को अपने आंखो में बसाने के लिए मौजूद था। जब कुशाग्र के कंधे पर बैच लगा, तो सभी के आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वहां मौजूद अजय त्रिपाठी, अभय त्रिपाठी, स्मिता त्रिपाठी, उत्कर्ष त्रिपाठी, शुभम त्रिपाठी, सत्यम त्रिपाठी, अदिति त्रिपाठी, अनुप्रिया त्रिपाठी अन्य सभी परिजन कुशाग्र के परेड के दौरान भावुक हुए जा रहे थे। भारतीय सेना का गौरव पदक मिला, तो सबकी आंखें नम हो गईं। कुशाग्र के इस उपलब्धि के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। शहीद मेजर अमिय त्रिपाठी स्मारक संस्थान के शत्रुमर्दन प्रताप शाही, राजन शुक्ला, विनीत बांटी, पंकज ओझा आदि ने इस उपलब्धि को सराहा है।
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सुधीर कुमार मिश्र
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गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। जिस रेजिमेंट में मेजर अमिय त्रिपाठी ने देश के लिए प्राण की आहुति दी थी, उसी रेजिमेंट में उनका बेटा 19 वर्ष बाद सैन्य अधिकारी बन गया है। यह कोई भाग्य से पाया गया पिता का स्थान नहीं, इस रेजिमेंट को पाने के लिए कुशाग्र ने अथाह मेहनत की। उन्हें, जब रेजिमेंट चुनने की बारी आई तो, अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के उद्देश्य से उसी 19 सिख रेजिमेंट को चुना।
मोक्ष और ज्ञान की भूमि गया ओटीए (आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी) में शनिवार को 24वीं पासिंग आउट परेड और पिपिंग सेरेमनी आयोजित हुई। इसके बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की उपस्थिति में देश को 121 जेंटलमैन सैन्य अधिकारी मिले। इसमें जिले के भेलया चंद्रौटा के शहीद मेजर अमिय त्रिपाठी के इकलौते पुत्र कुशाग्र त्रिपाठी ने भी शामिल रहे। कुशाग्र गया में चार वर्ष से प्रशिक्षण ले रहे थे। उन्होंने आर्मी में टेक्निकल इंजीनियरिंग परीक्षा उत्तीर्ण की थी। शहीद अमिय त्रिपाठी के भाई और कुशाग्र के चाचा अजय त्रिपाठी ने बताया कि छोटी उम्र में कुशाग्र के पिता शहीद हो गए। वे सिख रेजिमेंट के 19वीं बटालियन में तैनात थे। मां के दृढ़ निश्चय से कुशाग्र ने उसी सिख रेजिमेंट में खुद को स्थापित किया, जहां उसके पिता के सपने अधूरे थे। कुशाग्र को यह मुकाम मिलने से पूरे परिवार को खुशी है।
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परेड के बाद कंधे पर लगा बैच तो छलक पड़े परिजनों के आंसू
गया के राज्यवर्धन स्टेडियम में आयोजित परेड के बाद पीपिंग सेरेमनी के दौरान कुशाग्र का पूरा परिवार इस पल को अपने आंखो में बसाने के लिए मौजूद था। जब कुशाग्र के कंधे पर बैच लगा, तो सभी के आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वहां मौजूद अजय त्रिपाठी, अभय त्रिपाठी, स्मिता त्रिपाठी, उत्कर्ष त्रिपाठी, शुभम त्रिपाठी, सत्यम त्रिपाठी, अदिति त्रिपाठी, अनुप्रिया त्रिपाठी अन्य सभी परिजन कुशाग्र के परेड के दौरान भावुक हुए जा रहे थे। भारतीय सेना का गौरव पदक मिला, तो सबकी आंखें नम हो गईं। कुशाग्र के इस उपलब्धि के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। शहीद मेजर अमिय त्रिपाठी स्मारक संस्थान के शत्रुमर्दन प्रताप शाही, राजन शुक्ला, विनीत बांटी, पंकज ओझा आदि ने इस उपलब्धि को सराहा है।
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सुधीर कुमार मिश्र