फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Amrit Sarovar: Money wasted, government concern dried up

अमृत सरोवर : पानी में बहा पैसा, सूख गया सरकारी सरोकार

Sat, 19 Sep 2026 02:46 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:46 AM IST
विज्ञापन
Amrit Sarovar: Money wasted, government concern dried up
पडरौना। जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और गांवों को खूबसूरत बनाने के नाम पर तैयार किए गए अमृत सरोवरों पर सरकारी खजाने से करीब दस करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन कई सरोवरों में पानी की जगह बदहाली नजर आ रही है। कहीं झाड़ियां और कूड़े का अंबार लगा है तो कहीं ग्रामीणों के बैठने के लिए बनाए गए चबूतरे और पाथवे टूटने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अमृत सरोवर के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया लेकिन जिम्मदारों की उदासीनता से सरकारी सरोकार सूख गया। जिन सरोवरों को गांव की जलधारा और सार्वजनिक सुविधा का केंद्र बनना था, रखरखाव के अभाव में वे अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं।
विज्ञापन

पिछले तीन साल में अलग-अलग गांवों में करीब 242 अमृत सरोवर विकसित किए गए। इसके तहत तालाबों की खोदाई, सुंदरीकरण, पाथवे, बैठने की जगह, पौधरोपण और अन्य सुविधाओं पर धन खर्च किया गया। योजना का मकसद तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ वर्षा जल का संचयन कर भूजल स्तर को बढ़ाना और ग्रामीणों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना था। मगर पड़ताल में कई जगह योजना की मूल भावना ही कमजोर पड़ती दिखाई दी।
विज्ञापन

बरसात के मौसम में भी कई अमृत सरोवरों में पर्याप्त पानी नहीं है। कुछ जगहों पर तालाब की तलहटी तक दिखाई दे रही है। ऐसे में बारिश के पानी को रोकने और भूजल रिचार्ज का उद्देश्य सवालों के घेरे में है। जहां पानी है भी, वहां साफ-सफाई और जलकुंभी समेत दूसरी समस्याएं दिख रही हैं। सरोवर के आसपास नियमित सफाई नहीं होने से झाड़ियां फैलती जा रही हैं। जगह-जगह कूड़ा-कचरा पड़ा है। पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल नहीं होने से हरियाली का दावा भी कमजोर दिख रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय जिस तरह से सरोवरों को विकसित किया गया था, बाद में उसी स्तर पर निगरानी और रखरखाव नहीं हुआ। पाथवे और बैठने के स्थान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इससे सरोवरों का सुंदरीकरण भी प्रभावित हुआ है। अमृत सरोवरों पर तीन वर्षों में करीब दस करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। तालाब का निर्माण करा देना ही जल संरक्षण नहीं है। बारिश का पानी रुके, भूजल रिचार्ज हो, सरोवर साफ रहे और ग्रामीण उसका इस्तेमाल कर सकें, तभी योजना का वास्तविक लाभ माना जाएगा।

0

कहीं सीढ़ियां टूटीं तो कहीं पाथवे पर झाड़ियां
पकड़ियार बाजार। सरोवर के किनारे बनाई गईं सीढ़ियां टूट गई हैं तो कहीं पाथवे और बैठने की व्यवस्था बदहाल है। कई सरोवरों के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। जलकुंभी ने पानी पर कब्जा जमा लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि रखरखाव नहीं हुआ तो बारिश का पानी भी ज्यादा दिनों तक टिकने वाला नहीं है। महुअवा गांव में मनरेगा से वर्ष 2022-23 में 13 लाख 90 हजार रुपये की लागत से अमृत सरोवर बनाया गया था। निर्माण के समय ही ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। इस समय सरोवर की सीढ़ियां टूट चुकी हैं। किनारे लगाए गए बेंच और पाथवे भी क्षतिग्रस्त हैं। पौधे भी अब नजर नहीं आ रहे हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सरोवर बदहाल है। सिरसिया बुजुर्ग गांव में भी वर्ष 2022-23 में मनरेगा से आठ लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर विकसित किया गया था। वर्तमान में यहां न सीढ़ियां ठीक स्थिति में हैं और न ही पाथवे का अस्तित्व साफ नजर आता है। चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। सरोवर जलकुंभी से पट गया है। संवाद

0

तमकुही क्षेत्र में भी बदहाली, जल संरक्षण की योजना देखरेख के अभाव में बदहाल

गंगुआ बजार। तमकुही ब्लॉक के मंगूरीपट्टी गांव के सरोवर में बारिश का पानी भरा है लेकिन पाथवे और आसपास का क्षेत्र झाड़-झंखाड़ से पट गया है। साफ-सफाई के अभाव में ग्रामीण भी यहां जाने से कतराते हैं। कोटवा टिकमपार गांव में सरोवर के बांध तक जाने वाले रास्ते पर झाड़ियां उग आई हैं। सरेया बुजुर्ग सहित आसपास के अन्य गांवों में भी अमृत सरोवरों की स्थिति ठीक नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल सरोवरों में बारिश का पानी है लेकिन पानी के संरक्षण और नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं हुई तो इसका लाभ लंबे समय तक नहीं मिलेगा।

0

ग्रामीण बोले

जब अमृत सरोवर बना था तो लगा था कि गांव में पानी की बड़ी समस्या दूर होगी। कुछ दिन तक तालाब में पानी भी भरा रहा लेकिन अब ज्यादातर हिस्सा सूख गया है। चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। उसकी सफाई भी नहीं होती। लाखों रुपये खर्च हुए लेकिन गांव वालों को उसका फायदा नहीं मिल रहा है। -इमाम हसन, निवासी, परसौनी।


0

सरोवर के किनारे टहलने के लिए रास्ता और बैठने के लिए बेंच बनाई गई थीं। देख-रेख नहीं होने से सब टूट-फूट गई हैं। वहां कूड़ा और गंदगी फैली रहती है, जिससे बच्चे भी वहां नहीं जाते हैं। अगर समय-समय पर देखभाल होती तो यह गांव के लोगों के लिए अच्छी जगह बन सकती थी। -नसीम अहमद, निवासी, परसौनी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed