{"_id":"6a0a1d2dd24bcc18a801d697","slug":"the-game-is-wide-open-again-medicines-at-the-counter-opd-inside-kushinagar-news-c-7-1-gkp1004-1324426-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: फिर खुला खेल...काउंटर पर दवा, अंदर ओपीडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: फिर खुला खेल...काउंटर पर दवा, अंदर ओपीडी
विज्ञापन
पडरौना शहर में एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए जुटी भीड़। संवाद
पडरौना। स्वास्थ्य विभाग की सख्ती से बचने के लिए शहर के मेडिकल स्टोर संचालकों ने कमाई का तरीका बदल लिया है। कार्य दिवसों में डॉक्टर बैठाने से परहेज कर अब रविवार को मेडिकल स्टोर्स को क्लीनिक और अवैध ओपीडी चलाई जा रही है। इसके लिए जिले के बाहर से डॉक्टर बुलाए जा रहे हैं।
रामकोला रोड, महिला अस्पताल रोड, धर्मशाला रोड और छावनी क्षेत्र के कई बड़े मेडिकल स्टोर रविवार को मिनी अस्पताल बन जाते हैं। सरकारी दफ्तर बंद होने और जांच टीमें सक्रिय न होने का फायदा उठाकर संचालक बेखौफ यह धंधा चला रहे हैं। रविवार सुबह से ही इन स्टोर्स के बाहर मरीजों का आना शुरू हो जाता है। कुछ ही घंटों में मरीजों और तीमारदारों का जमावड़ा लग जाता है। काउंटर पर पर्चा बनाने से लेकर परामर्श तक में दिन गुजर जाता है। सीएमओ कार्यालय तक शिकायत पहुंचने और कार्रवाई की सुगबुगाहट के बाद संचालकों ने यह नई तरकीब निकाली है। सोमवार से शनिवार तक सतर्क रहते हैं, रविवार को सिस्टम सुस्त होते ही धंधा शुरू हो जाता है।
मोटे कमीशन का खेल
सूत्रों के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से डॉक्टर बुलाए जाते हैं। ये डॉक्टर किसी बड़े अस्पताल से जुड़े होते हैं या सिर्फ रविवार को प्रैक्टिस के लिए आते हैं। स्टोर संचालक इन्हें मोटी फीस, दवाओं की बिक्री पर 30 से 40 फीसदी कमीशन और वातानुकूलित चैंबर मुहैया कराते हैं। डॉक्टर मरीजों को जरूरत से ज्यादा महंगी और ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं, जिससे मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ता है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी
अवैध ओपीडी में स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की पूरी अनदेखी होती है। मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं होती। मरीज स्टोर के बाहर या अगल-बगल बैठकर बारी का इंतजार करते हैं। ऑक्सीजन और फर्स्ट एड जैसी कोई सुविधा नहीं रहती। संकरी दुकान में ही पर्दा डालकर ओपीडी और इनडोर जैसा माहौल बना दिया जाता है।
रोग के हिसाब से डॉक्टरों की सेटिंग
अलग-अलग स्टोर संचालकों ने रोग के मुताबिक डॉक्टरों की सेटिंग कर रखी है। महिला अस्पताल रोड पर चर्म रोग, ईएनटी, न्यूरो, रामकोला रोड पर न्यूरो, यूरोलॉजी, स्किन और धर्मशाला रोड पर महिला डॉक्टर बैठते हैं। जटहां रोड पर खिरकिया बाजार में बिना बोर्ड के ही एक मकान में धड़ल्ले से इलाज चल रहा है। बिहार से यूपी तक के मरीज यहां जुटते हैं।
मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चलाने के नियम
मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चलाने के लिए फार्मेसी नियम और क्लिनिकल एक्ट का पालन जरूरी है। डॉक्टर का नाम स्टेट मेडिकल काउंसिल में दर्ज होना चाहिए। मेडिकल स्टोर और क्लीनिक दोनों का स्थानीय निकाय में पंजीकरण जरूरी है। क्लीनिक रजिस्ट्रेशन अलग से चाहिए। क्लीनिक और स्टोर के बीच स्पष्ट विभाजन, परामर्श कक्ष और प्रतीक्षा क्षेत्र अनिवार्य है। उचित वेंटिलेशन, प्रकाश, बैठने की जगह और बायो-मेडिकल वेस्ट के लिए डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए। इन स्टोर्स में इसका अभाव है।
कोट
बिना रजिस्ट्रेशन मेडिकल स्टोर में ओपीडी संचालित करना अवैध है। शहर में रविवार को बंदी रहती है। मेडिकल स्टोर में ओपीडी संचालित होने की जानकारी नहीं है। अगले रविवार से निगरानी बढ़ाई जाएगी। नोडल अधिकारी को इसे बंद कराने के निर्देश दिए जाएंगे। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ, कुशीनगर
विज्ञापन
रामकोला रोड, महिला अस्पताल रोड, धर्मशाला रोड और छावनी क्षेत्र के कई बड़े मेडिकल स्टोर रविवार को मिनी अस्पताल बन जाते हैं। सरकारी दफ्तर बंद होने और जांच टीमें सक्रिय न होने का फायदा उठाकर संचालक बेखौफ यह धंधा चला रहे हैं। रविवार सुबह से ही इन स्टोर्स के बाहर मरीजों का आना शुरू हो जाता है। कुछ ही घंटों में मरीजों और तीमारदारों का जमावड़ा लग जाता है। काउंटर पर पर्चा बनाने से लेकर परामर्श तक में दिन गुजर जाता है। सीएमओ कार्यालय तक शिकायत पहुंचने और कार्रवाई की सुगबुगाहट के बाद संचालकों ने यह नई तरकीब निकाली है। सोमवार से शनिवार तक सतर्क रहते हैं, रविवार को सिस्टम सुस्त होते ही धंधा शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
मोटे कमीशन का खेल
सूत्रों के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से डॉक्टर बुलाए जाते हैं। ये डॉक्टर किसी बड़े अस्पताल से जुड़े होते हैं या सिर्फ रविवार को प्रैक्टिस के लिए आते हैं। स्टोर संचालक इन्हें मोटी फीस, दवाओं की बिक्री पर 30 से 40 फीसदी कमीशन और वातानुकूलित चैंबर मुहैया कराते हैं। डॉक्टर मरीजों को जरूरत से ज्यादा महंगी और ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं, जिससे मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ता है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी
अवैध ओपीडी में स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की पूरी अनदेखी होती है। मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं होती। मरीज स्टोर के बाहर या अगल-बगल बैठकर बारी का इंतजार करते हैं। ऑक्सीजन और फर्स्ट एड जैसी कोई सुविधा नहीं रहती। संकरी दुकान में ही पर्दा डालकर ओपीडी और इनडोर जैसा माहौल बना दिया जाता है।
रोग के हिसाब से डॉक्टरों की सेटिंग
अलग-अलग स्टोर संचालकों ने रोग के मुताबिक डॉक्टरों की सेटिंग कर रखी है। महिला अस्पताल रोड पर चर्म रोग, ईएनटी, न्यूरो, रामकोला रोड पर न्यूरो, यूरोलॉजी, स्किन और धर्मशाला रोड पर महिला डॉक्टर बैठते हैं। जटहां रोड पर खिरकिया बाजार में बिना बोर्ड के ही एक मकान में धड़ल्ले से इलाज चल रहा है। बिहार से यूपी तक के मरीज यहां जुटते हैं।
मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चलाने के नियम
मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चलाने के लिए फार्मेसी नियम और क्लिनिकल एक्ट का पालन जरूरी है। डॉक्टर का नाम स्टेट मेडिकल काउंसिल में दर्ज होना चाहिए। मेडिकल स्टोर और क्लीनिक दोनों का स्थानीय निकाय में पंजीकरण जरूरी है। क्लीनिक रजिस्ट्रेशन अलग से चाहिए। क्लीनिक और स्टोर के बीच स्पष्ट विभाजन, परामर्श कक्ष और प्रतीक्षा क्षेत्र अनिवार्य है। उचित वेंटिलेशन, प्रकाश, बैठने की जगह और बायो-मेडिकल वेस्ट के लिए डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए। इन स्टोर्स में इसका अभाव है।
कोट
बिना रजिस्ट्रेशन मेडिकल स्टोर में ओपीडी संचालित करना अवैध है। शहर में रविवार को बंदी रहती है। मेडिकल स्टोर में ओपीडी संचालित होने की जानकारी नहीं है। अगले रविवार से निगरानी बढ़ाई जाएगी। नोडल अधिकारी को इसे बंद कराने के निर्देश दिए जाएंगे। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ, कुशीनगर