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Kushinagar News: निरीक्षण में खुली मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की कलई
Fri, 08 May 2026 01:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 08 May 2026 01:45 AM IST
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पडरौना। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी के निरीक्षण मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कलई खुल गई। बृहस्पतिवार को निरीक्षण के दौरान मरीजों को अस्पताल के बजाय निजी जांच केंद्रों पर भेजने, दवाओं की भारी कमी और गंदगी जैसी गंभीर शिकायतें सामने आईं। उन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अधिकारियों को 10 दिन का समय दिया है।
निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने पाया कि सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज देने के लिए भारी खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सेवाएं ठीक से नहीं मिल रही हैं। मरीजों और विशेषकर महिलाओं ने शिकायत की कि डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं, उनमें से कई अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं हैं। उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। यहां तक कि सामान्य गैस की दवा भी नहीं मिल रही। सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को सरकारी जांच सुविधाओं (जैसे एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड) के बावजूद निजी सेंटरों पर भेज रहे हैं। निरीक्षण में डॉक्टरों के चैंबर खाली पाए गए और उनकी टेबल पर निजी सेंटरों की रेफरल पर्चियां मिलीं। जिस पर प्रशासन ने नाराजगी जताई।
इसके अलावा अस्पताल में गंदगी, अव्यवस्था और बंद लिफ्ट जैसी समस्याएं भी मिलीं। मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डॉक्टर सरकारी जांचों को अविश्वसनीय बताकर बाहर से रिपोर्ट लाने को मजबूर करते हैं। इन सभी अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए 15 दिनों के भीतर सुधार के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही चेतावनी दी गई है कि सुधार न होने पर दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने पाया कि सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज देने के लिए भारी खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सेवाएं ठीक से नहीं मिल रही हैं। मरीजों और विशेषकर महिलाओं ने शिकायत की कि डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं, उनमें से कई अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं हैं। उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। यहां तक कि सामान्य गैस की दवा भी नहीं मिल रही। सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को सरकारी जांच सुविधाओं (जैसे एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड) के बावजूद निजी सेंटरों पर भेज रहे हैं। निरीक्षण में डॉक्टरों के चैंबर खाली पाए गए और उनकी टेबल पर निजी सेंटरों की रेफरल पर्चियां मिलीं। जिस पर प्रशासन ने नाराजगी जताई।
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इसके अलावा अस्पताल में गंदगी, अव्यवस्था और बंद लिफ्ट जैसी समस्याएं भी मिलीं। मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डॉक्टर सरकारी जांचों को अविश्वसनीय बताकर बाहर से रिपोर्ट लाने को मजबूर करते हैं। इन सभी अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए 15 दिनों के भीतर सुधार के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही चेतावनी दी गई है कि सुधार न होने पर दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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