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बाढ़ के भय से बंधों को बचाने के काम में तेजी

Thu, 23 Jun 2022 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 11:00 PM IST
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Speed up the work of saving the dams from the fear of flood
बाढ़ के भय से बंधों को बचाने के काम में तेजी
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तमकुहीरोड। गंडक में जलस्तर को धीरे-धीरे बढ़ता देखकर पिचिंग के काम में तेजी ला दी गई है। नरवाजोत में किमी 1.700 पर आठ करोड़ 63 लाख 35 हजार की लागत से ठोकर का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि गंडक का पानी बढ़ने के पहले पिचिंग का काम नहीं कराया गया तो बचाव का काम प्रभावित होगा। बंधों के कटने से गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
नरवाजोत सहित पिपराघाट के सभी गांवों को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किमी 1.700 पर 70 के दशक में ठोकर का निर्माण कराया गया था। पिछले साल मानसून की शुरुआत में ही वाल्मीकिनगर बैराज से चार लाख बारह हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिए जाने से इस ठोकर पर इतना दबाव बन गया कि देखते ही देखते इसका आधे से अधिक हिस्सा नदी में समा गया। ठोकर पर कई साल से आशियाना बनाकर 10 परिवारों को पलायन करना पड़ा था।
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बाद में किसी तरह से बाढ़ खंड के अभियंताओं ने इसे बचा लिया था। इसी वजह से बाढ़ खंड के प्रस्ताव पर इस साल इस क्षतिग्रस्त ठोकर की पुनर्स्थापना के लिए शासन की ओर से आठ करोड़ 63 लाख 35 हजार की वित्तीय मंजूरी दी गई। दो माह से इसका काम कराया जा रहा है। काम को पूरा कराने के लिए बाढ़ खंड के अभियंता मुस्तैदी से लगे हुए हैं। लोगों को आशंका है कि गंडक में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से पहले यदि इस कार्य को पूरा नहीं कराया गया तो स्थित भयावह हो सकती है। इससे न केवल बाढ़ बचाव कार्य प्रभावित होगा, बल्कि नोज व स्लोप का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो कभी भी स्थिति भयावह हो सकती है।
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गांव के पुजारी सिंह, दूधनाथ शर्मा, कैलाश सिंह, ध्रुव निषाद, संजय सिंह, रामायन राय, सकलदेव सिंह, पन्नालाल यादव आदि का कहना है कि इस ठोकर की मजबूती पर ही नरवाजोत बांध के साथ बुटन टोला, मोती राय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला सहित अन्य गांवों की सुरक्षा निर्भर करती है। पिछले साल जब इस ठोकर को गंडक ने निशाने पर ले लिया था तो गांवों में अफरा-तफरी मच गई थी। इस बार अभी पानी का डिस्चार्ज 80-86 हजार क्यूसेक तक बना हुआ है।

बावजूद इसके, ग्रामीणों का कहना है कि पानी के डिस्चार्ज में कभी भी वृद्धि हो सकती है। उससे बाढ़ बचाव कार्य प्रभावित होने के साथ बांध व गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इन लोगों ने विभाग से शीघ्र ठोकर पुनर्स्थापना का कार्य पूरा कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि ठोकर पर अंतिम चरण का कार्य चल रहा है और सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल बांध को कहीं से किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
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