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Kushinagar News: आदिवासी दिवस पर शिक्षा और स्वच्छता का लिया संकल्प
Sat, 10 Aug 2024 06:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 10 Aug 2024 06:22 AM IST
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मंसाछापर। पडरौना ब्लॉक के जंगल नाहर छपरा गांव में शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा नेता पप्पू पांडे के नेतृत्व में चौपाल का आयोजन किया गया। आदिवासी समुदाय को शिक्षित होने तथा साफ़-सफाई का संकल्प दिलाया गया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अपनी भाषा का संरक्षण और विकास के लिए स्वयं आगे आना होगा।
पप्पू पांडे ने कहा कि 9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर मूल निवासियों का पहला सम्मेलन हुआ था। विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरुआत 1994 में की गई थी। इस दौरान आदिवासियों के मौजूदा हालात, समस्याएं और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है। प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है। संसाधनों के अभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी खास पहचान बनाई है। गीत-संगीत-नृत्य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है।
लेकिन मौजूदा समय में आदिवासी समुदाय अपनी भाषा-संस्कृति से विमुख हो रही है। आदिवासियों को अपनी भाषा का संरक्षण और विकास के लिए स्वयं आगे आना होगा। आदिवासी जब तक अपने परिवार, गांव, अपने लोगों के बीच अपनी भाषा में बात नहीं करेंगे, तब तक भाषा का संरक्षण एवं विकास असंभव है।
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कार्यक्रम का संचालन रोशन चौधरी ने किया। इस अवसर पर कैलाश मुसहर, सुदामा मुसहर, फेकू, रामविलास, सरवन, मीना, उमा, रामु, हरि, रामायन, सावित्री, खदु, रामजीत आदि उपस्थित रहे।
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पप्पू पांडे ने कहा कि 9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर मूल निवासियों का पहला सम्मेलन हुआ था। विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरुआत 1994 में की गई थी। इस दौरान आदिवासियों के मौजूदा हालात, समस्याएं और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है। प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है। संसाधनों के अभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी खास पहचान बनाई है। गीत-संगीत-नृत्य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है।
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लेकिन मौजूदा समय में आदिवासी समुदाय अपनी भाषा-संस्कृति से विमुख हो रही है। आदिवासियों को अपनी भाषा का संरक्षण और विकास के लिए स्वयं आगे आना होगा। आदिवासी जब तक अपने परिवार, गांव, अपने लोगों के बीच अपनी भाषा में बात नहीं करेंगे, तब तक भाषा का संरक्षण एवं विकास असंभव है।
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कार्यक्रम का संचालन रोशन चौधरी ने किया। इस अवसर पर कैलाश मुसहर, सुदामा मुसहर, फेकू, रामविलास, सरवन, मीना, उमा, रामु, हरि, रामायन, सावित्री, खदु, रामजीत आदि उपस्थित रहे।